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नासिक: भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से भारतीय प्याज उत्पादकों और निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत UK भारतीय प्याज पर लगने वाली मौजूदा 4.5 प्रतिशत आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को खत्म करने पर सहमत हो गया है। माना जा रहा है कि ड्यूटी हटने से ब्रिटिश बाजार में भारतीय प्याज की कीमत प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी और आने वाले समय में निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
भारतीय प्याज की विदेशों में मांग पहले से रही है, लेकिन आयात शुल्क के कारण ब्रिटेन के बाजार में प्रतिस्पर्धा सीमित थी। अब शुल्क समाप्त होने के बाद भारतीय निर्यातकों को उम्मीद है कि वे UK में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेंगे।
ब्रिटिश बाजार में मजबूत होगी भारतीय प्याज की पकड़
वर्तमान में भारत के कुल प्याज निर्यात का केवल करीब 1 से 2 प्रतिशत हिस्सा ही UK को भेजा जाता है। निर्यातकों का मानना है कि FTA के बाद यह आंकड़ा बढ़ सकता है।
ड्यूटी हटने से भारतीय प्याज ब्रिटेन के बाजार में अन्य देशों के प्याज के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। इससे निर्यातकों को बेहतर अवसर मिलेंगे और किसानों को भी इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।
विशेष रूप से महाराष्ट्र के नासिक जिले और लासलगांव क्षेत्र के प्याज किसानों के लिए यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लासलगांव भारत के सबसे बड़े प्याज उत्पादन और व्यापार केंद्रों में शामिल है।
प्याज किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद
भारत में बड़ी संख्या में किसान प्याज की खेती पर निर्भर हैं। बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव और निर्यात संबंधी चुनौतियों के कारण कई बार किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
निर्यात बढ़ने से घरेलू बाजार पर दबाव कम हो सकता है और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि UK में भारतीय प्याज की मांग बढ़ती है, तो इसका सीधा लाभ उत्पादन क्षेत्रों के किसानों तक पहुंच सकता है।
निर्यातकों के सामने लॉजिस्टिक्स की चुनौती
हालांकि, निर्यातकों का कहना है कि केवल आयात शुल्क हटना ही पर्याप्त नहीं है। अंतरराष्ट्रीय परिवहन व्यवस्था अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पहले समुद्री मार्ग से भारतीय प्याज को UK पहुंचने में लगभग 20 से 25 दिन लगते थे। लेकिन वर्तमान में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों में आ रही बाधाओं के कारण यह समय बढ़कर 35 से 40 दिन तक पहुंच गया है।
समय बढ़ने से परिवहन लागत भी बढ़ी है। प्याज जैसी कृषि उपज के लिए लंबा परिवहन समय चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि लंबे समय तक भंडारण और गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी होता है।
ड्यूटी हटने से लागत संतुलन में मदद
निर्यातकों का कहना है कि परिवहन संबंधी समस्याओं के बावजूद आयात शुल्क समाप्त होने से भारतीय प्याज को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
अब तक 4.5 प्रतिशत ड्यूटी के कारण भारतीय प्याज की कीमत ब्रिटिश बाजार में प्रभावित होती थी। शुल्क हटने के बाद निर्यातकों को उम्मीद है कि वे बेहतर कीमत पर अपना उत्पाद बेच सकेंगे।
महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों के लिए अहम फैसला
महाराष्ट्र देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में शामिल है। नासिक जिले के लासलगांव समेत कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्याज की खेती होती है।
इन क्षेत्रों के किसान लंबे समय से निर्यात बाजार में बेहतर अवसरों की मांग करते रहे हैं। FTA को किसानों के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान हो सकती है।
सरकार और निर्यातकों की नजर आगे की संभावनाओं पर
भारत-UK व्यापार समझौते के बाद अब निर्यातकों की नजर ब्रिटेन में मांग बढ़ने और नए व्यापार अवसरों पर है। यदि निर्यात व्यवस्था बेहतर होती है और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याओं का समाधान होता है, तो भारतीय प्याज का निर्यात आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि FTA केवल प्याज निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की पहुंच को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
कुल मिलाकर, UK द्वारा भारतीय प्याज पर आयात शुल्क हटाने का फैसला किसानों और निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। हालांकि, इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए परिवहन, भंडारण और निर्यात व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी होगा।





