महाराष्ट्र

1911 से जुड़े खिलाफत हाउस मामले में वारिस पठान बोले- कानूनी रास्ता अपनाएंगे

SHIDDHANT
28 Sept 2026 10:29 PM IST
1911 से जुड़े खिलाफत हाउस मामले में वारिस पठान बोले- कानूनी रास्ता अपनाएंगे
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MUMBAI मुंबई। मुंबई के चर्चित खिलाफत हाउस जमीन मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी चर्चा तेज हो गई है। इस मामले पर AIMIM नेता वारिस पठान ने बयान देते हुए कहा कि खिलाफत हाउस को लेकर उठे विवाद का समाधान न्यायालय के फैसले के आधार पर किया जाएगा। वारिस पठान ने कहा कि मुंबई में खिलाफत हाउस का इतिहास वर्ष 1911 से जुड़ा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि खिलाफत हाउस की पुरानी संरचना को हटाकर वहां पुनर्विकास का काम शुरू कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आ रहे हैं। वारिस पठान के मुताबिक, खिलाफत कमेटी का कहना है कि यह जमीन वक्फ की संपत्ति नहीं है, जबकि वक्फ की ओर से इसे अपनी संपत्ति बताया जा रहा है। इसी विवाद को लेकर अब कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया जा रहा है। AIMIM नेता ने कहा कि सभी पक्षों को अदालत के निर्णय का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो फैसला कोर्ट देगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।
जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद
खिलाफत हाउस जमीन मामले में मुख्य विवाद संपत्ति के अधिकार और मालिकाना हक को लेकर है। एक पक्ष इसे खिलाफत कमेटी से जुड़ी संपत्ति बता रहा है, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से वक्फ से संबंधित दावा किया जा रहा है।
इस विवाद के बीच पुनर्विकास कार्य शुरू होने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले से जुड़े पक्ष कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपनी बात रखने की तैयारी में हैं।
ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा मामला
खिलाफत हाउस को मुंबई के ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। इसका संबंध खिलाफत आंदोलन के दौर से बताया जाता है। इसी वजह से यह स्थान लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का हिस्सा रहा है।
वारिस पठान ने कहा कि मामले को किसी विवाद के रूप में बढ़ाने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से न्यायालय के निर्णय का सम्मान करने की बात कही।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल खिलाफत हाउस जमीन विवाद में आगे की स्थिति अदालत और संबंधित प्राधिकरणों की कार्रवाई पर निर्भर करेगी। दोनों पक्षों के दावों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। AIMIM नेता के बयान के बाद एक बार फिर खिलाफत हाउस जमीन विवाद चर्चा में आ गया है।
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