महाराष्ट्र

भिवंडी में प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार

Kavita2
23 Oct 2026 12:05 PM IST
भिवंडी में प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार
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भिवंडी। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी में प्रतिबंधित और नियंत्रित दवाओं की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। भोईवाड़ा पुलिस ने कोडीन फॉस्फेट युक्त दवा की 119 बोतलें जब्त कर पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन दवाओं को बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे और आवश्यक लाइसेंस के बेचा जाना था। मामले की जांच के दौरान पुलिस को राजस्थान से जुड़े एक सप्लाई नेटवर्क की जानकारी भी मिली है। इसके बाद राजस्थान में कार्रवाई करते हुए एक ट्रेडिंग फर्म के मालिक को गिरफ्तार किया गया, जिस पर दवाओं की खेप उपलब्ध कराने का संदेह है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और दवाओं की आपूर्ति किन-किन क्षेत्रों में की जा रही थी।

गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने बिछाया जाल

जानकारी के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 17 सितंबर 2026 को हुई थी। भोईवाड़ा पुलिस के कर्मचारी एस.डी. सूर्यवंशी को सूचना मिली थी कि भिवंडी के सोमनागर इलाके में कोडीन फॉस्फेट युक्त दवाओं की अवैध बिक्री की जा रही है।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने संबंधित इलाके में निगरानी शुरू की। संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की।

इस दौरान अकबर आदम शाह नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से कोडीन फॉस्फेट युक्त दवा की 119 बोतलें बरामद होने की जानकारी सामने आई।

पुलिस के अनुसार, आरोपी के पास इन दवाओं की बिक्री के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं थे। इसके बाद जब्त दवाओं को कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू की गई।

119 बोतलें मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ा

प्रारंभिक कार्रवाई में बड़ी संख्या में दवा की बोतलें मिलने के बाद पुलिस ने इस मामले को केवल स्थानीय स्तर पर होने वाली अवैध बिक्री तक सीमित नहीं रखा।

जांच अधिकारियों ने यह पता लगाने का प्रयास शुरू किया कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं आरोपी तक कैसे पहुंचीं और इन्हें किस उद्देश्य से रखा गया था।

पुलिस ने दवा की खरीद, भंडारण और आपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की।

इसके साथ ही यह जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया कि आरोपी इन दवाओं को किन लोगों को बेचने वाला था।

जांच के दौरान अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई आगे बढ़ाई। इस मामले में कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है।

राजस्थान तक पहुंचा अवैध सप्लाई का सुराग

मामले में सबसे महत्वपूर्ण खुलासा तब हुआ, जब पुलिस को दवाओं की आपूर्ति का संबंध राजस्थान से होने की जानकारी मिली।

पुलिस जांच के अनुसार, भिवंडी में बरामद दवाओं की खेप राजस्थान से जुड़े एक कारोबारी नेटवर्क के माध्यम से पहुंचाई गई होने का संदेह है।

इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने राजस्थान में संबंधित स्थान पर कार्रवाई की।

वहां एक ट्रेडिंग फर्म के मालिक को गिरफ्तार किया गया। पुलिस को संदेह है कि संबंधित कारोबारी ने दवाओं की खेप उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई थी।

हालांकि, फर्म से जुड़े लेनदेन, दवाओं की खरीद के वास्तविक स्रोत और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका को लेकर जांच जारी है।

पांच गिरफ्तारियों के बाद नेटवर्क की तलाश तेज

इस मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब पूरे सप्लाई नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोडीन फॉस्फेट युक्त दवाएं वैध वितरण प्रणाली से अवैध बाजार तक कैसे पहुंचीं।

इसके लिए दवाओं की खरीद और बिक्री से संबंधित बिल, लाइसेंस, परिवहन संबंधी दस्तावेज तथा अन्य रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इससे पहले कितनी खेप प्राप्त की थीं।

यदि जांच में अन्य राज्यों या शहरों में दवाओं की अवैध आपूर्ति का प्रमाण मिलता है, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

फिलहाल पुलिस ने इस पूरे मामले में संगठित नेटवर्क की संभावित भूमिका की जांच शुरू की है।

क्या है कोडीन फॉस्फेट और क्यों होता है इसका दुरुपयोग?

कोडीन फॉस्फेट एक ओपिओइड पदार्थ है, जिसका उपयोग कुछ चिकित्सकीय दवाओं, विशेषकर खांसी से राहत देने वाली निर्धारित दवाओं में किया जाता है।

चिकित्सकीय उपयोग के बावजूद इसका दुरुपयोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।

बिना चिकित्सकीय सलाह के ऐसी दवाओं का सेवन करने से निर्भरता, अत्यधिक नींद, सांस लेने में परेशानी और अन्य गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

भारत में कोडीन युक्त दवाओं का निर्माण, वितरण और बिक्री संबंधित औषधि कानूनों और अन्य लागू नियमों के अंतर्गत नियंत्रित होती है।

सभी कोडीन युक्त दवाएं स्वतः प्रतिबंधित नहीं होतीं, लेकिन निर्धारित नियमों के विरुद्ध उनका भंडारण और कारोबार कानूनी कार्रवाई का विषय बन सकता है।

इसलिए पुलिस जांच में दवा की प्रकृति, उसकी मात्रा, बिक्री संबंधी दस्तावेज और वैधानिक अनुमतियों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

बिना लाइसेंस दवा बेचने पर कानूनी कार्रवाई

भारत में औषधियों की बिक्री के लिए निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है।

कुछ दवाओं को केवल पंजीकृत चिकित्सक के वैध पर्चे के आधार पर बेचा जा सकता है। इसके अलावा दवा विक्रेता के पास आवश्यक लाइसेंस और खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड होना चाहिए।

यदि नियंत्रित दवाओं का कारोबार निर्धारित नियमों के विपरीत किया जाता है, तो संबंधित परिस्थितियों में औषधि कानून और स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम के प्रावधान लागू हो सकते हैं।

हालांकि, भिवंडी के इस मामले में आरोपियों के खिलाफ दर्ज विशिष्ट कानूनी धाराओं की पूरी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

पुलिस जांच के निष्कर्ष और जब्त दवाओं से संबंधित रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

पहले भी सामने आ चुके हैं अवैध कफ सिरप के मामले

महाराष्ट्र में कोडीन युक्त कफ सिरप के कथित अवैध कारोबार के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।

मार्च 2023 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने भिवंडी-वाडा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए कोडीन आधारित कफ सिरप की 3,195 बोतलें जब्त की थीं। उस कार्रवाई में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

इसके अलावा अगस्त 2026 में भी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने एक अंतरराज्यीय नेटवर्क से संबंधित कार्रवाई में बड़ी मात्रा में कोडीन आधारित कफ सिरप बरामद किया था। जांच में गुजरात से मुंबई और भिवंडी क्षेत्र तक आपूर्ति होने की जानकारी सामने आई थी।

ये अलग-अलग मामले हैं, और वर्तमान कार्रवाई से इनका कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं हुआ है।

अवैध दवा कारोबार के खिलाफ निगरानी बढ़ाने की जरूरत

भिवंडी में सामने आए इस मामले ने नियंत्रित दवाओं की आपूर्ति और बिक्री पर निगरानी की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है।

दवाओं का वैध चिकित्सकीय उपयोग सुनिश्चित करने के साथ उनके दुरुपयोग को रोकना भी महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, दवा दुकानों और वितरकों के रिकॉर्ड का नियमित सत्यापन तथा संदिग्ध आपूर्ति की जांच इस तरह के मामलों पर रोक लगाने में सहायक हो सकती है।

इसमें पुलिस, औषधि नियंत्रण विभाग और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण है।

पुलिस जांच में और खुलासों की संभावना

भोईवाड़ा पुलिस की कार्रवाई में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी और 119 बोतलों की जब्ती के बाद जांच आगे बढ़ रही है।

राजस्थान से जुड़े कथित सप्लाई नेटवर्क के सामने आने से पुलिस का ध्यान अब दवाओं के स्रोत और वितरण प्रणाली पर केंद्रित है।

जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपियों ने कितनी मात्रा में दवाओं की आपूर्ति की, इनके वास्तविक खरीदार कौन थे और अवैध कारोबार से कितनी रकम अर्जित की गई।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका और दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

पूरी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस कथित अवैध कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।

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