महाराष्ट्र

ठाणे SATIS ब्रिज के टॉयलेट में वेंडरों का अवैध स्टोरेज, 2 लाख का सामान जब्त

Kavita2
21 Aug 2026 10:15 AM IST
ठाणे SATIS ब्रिज के टॉयलेट में वेंडरों का अवैध स्टोरेज, 2 लाख का सामान जब्त
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ठाणे। ठाणे रेलवे स्टेशन के बाहर बने SATIS (स्टेशन एरिया ट्रैफिक इम्प्रूवमेंट स्कीम) ब्रिज पर नगर निगम की व्यवस्था में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां अनधिकृत स्ट्रीट वेंडरों द्वारा नगर निगम के सार्वजनिक टॉयलेट का कथित तौर पर अवैध इस्तेमाल सामान रखने के लिए किया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि वेंडरों ने महिलाओं और TMT कर्मचारियों के लिए आरक्षित टॉयलेट की डुप्लीकेट चाबियां तक बनवा ली थीं। रात के समय इन टॉयलेट का इस्तेमाल कथित तौर पर सामान रखने और अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई से बचने के लिए किया जाता था।

मामला सामने आने के बाद ठाणे नगर निगम (TMC) ने कार्रवाई करते हुए करीब 2 लाख रुपये कीमत का सामान जब्त किया है। कार्रवाई के बाद निगम प्रशासन ने सार्वजनिक सुविधाओं के दुरुपयोग और अवैध कब्जे को लेकर सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं।

बीजेपी नेता की शिकायत के बाद खुला मामला

इस पूरे मामले का खुलासा बीजेपी नेता और पूर्व पार्षद संजय वाघुले की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने ठाणे नगर निगम के असिस्टेंट कमिश्नर महेश जामदार के सामने इस संबंध में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि SATIS ब्रिज पर बने नगर निगम के टॉयलेट का इस्तेमाल उन लोगों द्वारा किया जा रहा है, जिन्हें सार्वजनिक सुविधा के रूप में इस्तेमाल के लिए दी गई जगह में सामान रखने की अनुमति नहीं है।

शिकायत मिलने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने मामले की जांच की और कार्रवाई के लिए टीम भेजी। जांच के दौरान सामने आया कि कुछ स्ट्रीट वेंडरों ने टॉयलेट की डुप्लीकेट चाबियां बनवा रखी थीं। इन चाबियों की मदद से वे रात के समय टॉयलेट के अंदर सामान रख रहे थे।

महिलाओं और TMT कर्मचारियों के लिए आरक्षित था टॉयलेट

जिस टॉयलेट का इस्तेमाल सामान रखने के लिए किया जा रहा था, वह सामान्य स्टोरेज की जगह नहीं था। यह सुविधा महिलाओं और ठाणे म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट (TMT) कर्मचारियों के लिए आरक्षित बताई गई है। ऐसे में सार्वजनिक सुविधा के लिए निर्धारित स्थान का व्यावसायिक सामान रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने से नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर लंबे समय तक डुप्लीकेट चाबियों के जरिए टॉयलेट का इस्तेमाल कैसे होता रहा और इसकी जानकारी संबंधित विभाग के अधिकारियों को क्यों नहीं हुई। शिकायत सामने आने के बाद निगम ने तत्काल कार्रवाई कर यह स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संपत्ति का इस तरह इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जाएगा।

रात में सामान रखने का आरोप

शिकायत के मुताबिक, वेंडर दिन के समय सड़क और ब्रिज के आसपास अपना कारोबार करते थे, जबकि रात में उनका सामान टॉयलेट के अंदर रख दिया जाता था। इस तरह टॉयलेट उनके लिए एक तरह के अवैध स्टोरेज स्पेस में बदल गया था।

आरोप यह भी है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी अभियानों से सामान बचाने के लिए किया जाता था। यदि दिन में कार्रवाई होती, तो सामान किसी अन्य स्थान पर रखने के बजाय टॉयलेट में सुरक्षित कर दिया जाता था। इससे निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठते हैं।

करीब 2 लाख रुपये का सामान जब्त

नगर निगम की टीम ने कार्रवाई के दौरान वेंडरों का सामान जब्त कर लिया। जब्त सामान की अनुमानित कीमत करीब 2 लाख रुपये बताई गई है। इसमें स्ट्रीट वेंडिंग से जुड़ी सामग्री और अन्य सामान शामिल होने की जानकारी है।

नगर निगम की कार्रवाई के बाद SATIS ब्रिज और आसपास के इलाके में अवैध रूप से सामान रखने वालों के खिलाफ निगरानी बढ़ाए जाने की संभावना है। अधिकारियों की ओर से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि सार्वजनिक सुविधाओं का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अलावा किसी अन्य काम के लिए न किया जाए।

सार्वजनिक सुविधा के दुरुपयोग पर उठे सवाल

इस घटना ने सार्वजनिक सुविधाओं की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित SATIS ब्रिज पर हर दिन बड़ी संख्या में यात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में महिलाओं और कर्मचारियों के लिए बनाए गए टॉयलेट का उपयोग सामान रखने के लिए होना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक सुविधा की उपयोगिता को भी प्रभावित करता है।

खास तौर पर महिलाओं के लिए निर्धारित टॉयलेट का इस तरह इस्तेमाल किए जाने से सवाल उठता है कि जरूरत के समय यात्रियों को यह सुविधा उपलब्ध थी या नहीं। यदि सार्वजनिक शौचालय नियमित रूप से स्टोरेज के रूप में इस्तेमाल हो रहा था, तो इससे वहां साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है।

जिम्मेदारी तय करने की मांग

मामले के सामने आने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि टॉयलेट की डुप्लीकेट चाबियां आखिर वेंडरों तक कैसे पहुंचीं। साथ ही, यदि वेंडर लंबे समय से रात में टॉयलेट का इस्तेमाल कर रहे थे, तो संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा होता है।

स्थानीय स्तर पर इस मामले में जिम्मेदारी तय करने और यह पता लगाने की मांग हो सकती है कि नगर निगम की संपत्ति तक अनधिकृत लोगों की पहुंच कैसे बनी। अधिकारियों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस व्यवस्था में किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही रही या नहीं।

कार्रवाई के बाद बढ़ी निगरानी

नगर निगम की ओर से सामान जब्त किए जाने के बाद अब इस तरह के अतिक्रमण और सार्वजनिक संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। SATIS ब्रिज जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान पर अवैध स्टोरेज और अतिक्रमण की गतिविधियां यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।

फिलहाल करीब 2 लाख रुपये का सामान जब्त किए जाने के बाद मामला चर्चा में है। एक ओर निगम ने कार्रवाई कर अवैध इस्तेमाल को रोकने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित निगरानी कितनी जरूरी है। अब देखना होगा कि नगर निगम इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और भविष्य में टॉयलेट या अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए कौन-सी व्यवस्था लागू की जाती है।

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