महाराष्ट्र

इगतपुरी स्कूल में बदहाली, बारिश में टपक रही छत

Kavita2
9 Aug 2026 4:09 PM IST
इगतपुरी स्कूल में बदहाली, बारिश में टपक रही छत
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इगतपुरी। नासिक जिले के इगतपुरी तालुका के परदेवी गांव स्थित जिला परिषद प्राथमिक स्कूल की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण छात्रों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भारी बारिश के बीच स्कूल की छत से पानी टपकने और कई जगह छत की शीट क्षतिग्रस्त होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में पर्याप्त पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं है। मानसून के मौसम में भी छात्रों को साफ पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा पौष्टिक भोजन, पानी और जरूरी दवाओं की कमी की शिकायत भी सामने आई है। ग्रामीणों ने महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर स्कूल की स्थिति सुधारने की मांग की है।

एक कमरे में 60 से 70 छात्र

ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में कक्षाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। करीब 60 से 70 छात्र एक बड़े कमरे में एक ही कक्षा में बैठने को मजबूर हैं। एक ही कमरे में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के बैठने से पढ़ाई का वातावरण प्रभावित हो रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि विद्यार्थियों को पर्याप्त जगह नहीं मिलने से शिक्षकों के लिए भी पढ़ाना मुश्किल होता है। बच्चों को लंबे समय तक भीड़भाड़ वाले कमरे में बैठना पड़ता है। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि छात्रों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।

ग्रामीणों ने स्कूल में नया सेक्शन शुरू करने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों को उनकी कक्षा के अनुसार पर्याप्त स्थान मिल सके और शिक्षण व्यवस्था बेहतर तरीके से संचालित हो सके।

बारिश में टपकती है स्कूल की छत

इगतपुरी तालुका में पिछले दिनों से भारी बारिश का दौर जारी है। बारिश के कारण परदेवी प्राथमिक स्कूल की छत की हालत और खराब हो गई है। स्कूल की छत पर लगी शीट कई जगहों से क्षतिग्रस्त बताई जा रही है। बारिश होने पर पानी कक्षा के अंदर पहुंच जाता है।

ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों को पानी के बीच बैठकर पढ़ाई और शिक्षण कार्य करना पड़ता है। फर्श पर पानी जमा होने से फिसलने का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को असुरक्षित माहौल में पढ़ने के लिए मजबूर करना गंभीर चिंता का विषय है।

पीने के पानी की सुविधा का अभाव

स्कूल में पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है। खास बात यह है कि मानसून के दौरान भी विद्यार्थियों को नियमित रूप से पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल बेहद जरूरी है। पानी की कमी के कारण बच्चों को परेशानी होती है और उनके स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने स्कूल में स्थायी पेयजल व्यवस्था करने की मांग की है।

पौष्टिक भोजन और दवाओं की भी कमी

स्कूल में छात्रों के लिए पौष्टिक भोजन और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, विद्यार्थियों की शिक्षा के साथ उनके स्वास्थ्य और पोषण पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।

स्कूल में प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से किसी बच्चे के अचानक बीमार पड़ने या चोट लगने की स्थिति में समस्या खड़ी हो सकती है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से स्कूल में जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

अभिभावकों में बढ़ी चिंता

स्कूल की मौजूदा स्थिति को लेकर अभिभावकों में नाराजगी के साथ-साथ चिंता भी बढ़ रही है। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में शिक्षा मिलना उनका अधिकार है। यदि स्कूल भवन की छत ही सुरक्षित नहीं है और बारिश के दौरान कक्षाओं में पानी भर जाता है तो बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूल भवन की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए और क्षतिग्रस्त छत की मरम्मत की जाए। इसके साथ ही पेयजल, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाओं को भी जल्द उपलब्ध कराया जाए।

नया सेक्शन खोलने की मांग

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में स्कूल में एक नया सेक्शन शुरू करना भी शामिल है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन कक्षाओं और शिक्षण व्यवस्था का विस्तार उसी अनुपात में नहीं हुआ है।

एक ही कमरे में 60 से 70 विद्यार्थियों के बैठने से बच्चों को पर्याप्त जगह नहीं मिलती। शिक्षक भी हर विद्यार्थी पर व्यक्तिगत ध्यान नहीं दे पाते। नया सेक्शन शुरू होने से कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या कम होगी और पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाया जा सकेगा।

शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों और अभिभावकों ने महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि विभागीय स्तर पर स्कूल की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराया जाना चाहिए और आवश्यक कार्यों के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि शिक्षा विभाग स्कूल की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर लेकर आवश्यक धनराशि और संसाधन उपलब्ध कराएगा। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी शहरों के विद्यार्थियों की तरह सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए।

बारिश के बीच सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती

फिलहाल इगतपुरी में बारिश का दौर जारी है। ऐसे में स्कूल की क्षतिग्रस्त छत और पानी की समस्या विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो बारिश के दौरान दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की समस्याएं केवल भवन तक सीमित नहीं हैं। पेयजल, भोजन, दवाओं और पर्याप्त कक्षाओं की व्यवस्था भी जरूरी है। इन सभी सुविधाओं को उपलब्ध कराकर ही बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण दिया जा सकता है।

परदेवी प्राथमिक स्कूल की स्थिति ने ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर हैं कि छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़ी इन समस्याओं का समाधान कितनी जल्दी किया जाता है।

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