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ग्रामीण इलाकों में ICU सुविधाओं में सुधार की उम्मीद, SC के निर्देश के बाद स्वास्थ्य ढांचे पर जोर

Maharashtra महाराष्ट्र: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में गंभीर मरीजों के लिए ICU बेड और क्रिटिकल केयर सुविधाओं तक बेहतर पहुंच की उम्मीद बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘गहन देखभाल सेवाओं के संगठन और वितरण के लिए दिशानिर्देशों’ में दी गई सिफारिशों को लागू करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद देश के स्वास्थ्य ढांचे में सुधार की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
यह विस्तृत दिशानिर्देश देशभर के जाने-माने क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की एक समिति द्वारा तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य गहन देखभाल सेवाओं को अधिक प्रभावी और समान रूप से उपलब्ध कराना है। इसमें विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में ICU सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए बताया गया कि कोविड महामारी के बाद राज्य में ICU बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ। वर्ष 2020 में जहां राज्य में लगभग 9,300 ICU बेड उपलब्ध थे, वहीं 2022 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 39,700 हो गई, जो चार गुना से अधिक वृद्धि को दर्शाती है। इसके बावजूद कई ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी भरोसेमंद बिजली आपूर्ति, वेंटिलेटर, मॉनिटरिंग सिस्टम और अन्य जरूरी उपकरणों की कमी देखी जा रही है। दिशानिर्देशों में अस्पतालों के ICU ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें बेड के बीच पर्याप्त स्थान, आइसोलेशन सुविधाएं, निरंतर ऑक्सीजन आपूर्ति और मजबूत पावर बैकअप जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
इसके अलावा दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गंभीर मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता अनिवार्य है। इनमें वेंटिलेटर, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, इन्फ्यूजन पंप और अन्य जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों के लागू होने से अस्पतालों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में जहां पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है, वहां गंभीर मरीजों के इलाज में यह बदलाव महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि केवल बुनियादी ढांचे का विस्तार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता भी उतनी ही आवश्यक है। ICU सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद देश में क्रिटिकल केयर सेवाओं के मानक बेहतर हो सकते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य असमानता को कम करने में मदद मिल सकती है।





