महाराष्ट्र

तहलका रेप कांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तरुण तेजपाल जाएंगे जेल

Ratna Netam
6 Aug 2026 2:55 PM IST
तहलका रेप कांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तरुण तेजपाल जाएंगे जेल
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महाराष्ट्र : तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को वर्ष 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को मापुसा की ट्रायल कोर्ट के वर्ष 2021 के फैसले को पलटते हुए तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया और उन्हें 10 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हाई कोर्ट ने तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
यह मामला पिछले एक दशक से देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा है। वर्ष 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इस फैसले को गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अब हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया है।
जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने गोवा सरकार की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्य और परिस्थितियां आरोपी के खिलाफ पर्याप्त हैं। अदालत ने तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376(2)(f) और 376(2)(k) के तहत दुष्कर्म तथा यौन उत्पीड़न का दोषी माना। इसके अलावा उन्हें धारा 354ए और 354बी के तहत भी दोषसिद्ध किया गया।
फैसला सुनाए जाने के दौरान तरुण तेजपाल अदालत में मौजूद थे। दोषी ठहराए जाने के बाद उनके वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि घटना को लगभग 13 वर्ष बीत चुके हैं और उनके मुवक्किल के खिलाफ किसी अन्य आपराधिक मामले का रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि सजा के आदेश पर कम से कम आठ सप्ताह की रोक लगाई जाए ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जा सके।
अदालत के समक्ष स्वयं तरुण तेजपाल ने भी अपनी उम्र और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए नरमी की मांग की। उन्होंने कहा कि वह अब 62 वर्ष के हैं और स्वयं को इस मामले में पीड़ित मानते हैं। उन्होंने अदालत से अपील करते हुए कहा कि उनकी पत्नी है और वह इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहते हैं। हालांकि, अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और दोषसिद्धि के साथ 10 वर्ष की सजा सुनाई।
सुनवाई के दौरान गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत में कहा कि निचली अदालत का फैसला "गलत निष्कर्षों का एक स्पष्ट उदाहरण" था। उनके अनुसार, ट्रायल कोर्ट ने पूरे मामले में आरोपी के बजाय पीड़िता के व्यवहार पर अधिक सवाल उठाए और यह तय करने की कोशिश की कि यौन उत्पीड़न की शिकार महिला को घटना के बाद किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए। सरकार ने इसे न्यायिक दृष्टिकोण की गंभीर त्रुटि बताया।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने दलील दी कि पीड़िता के बयान में विरोधाभास हैं और सीसीटीवी फुटेज आरोपों की पुष्टि नहीं करते। हालांकि हाई कोर्ट ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, विशेष रूप से तरुण तेजपाल द्वारा पीड़िता को भेजे गए माफीनामे वाले ईमेल, को महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए दोषसिद्धि का आधार बनाया।
यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में आयोजित तहलका मैगजीन के वार्षिक कार्यक्रम 'थिंक फेस्ट' के दौरान एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में पत्रिका की एक जूनियर महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का आरोप लगाया था। मामला सामने आने के बाद देशभर में व्यापक चर्चा हुई और 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में मई 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी।
सितंबर 2017 में सेशन कोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय किए और दोनों पक्षों की निजता की रक्षा के लिए पूरे मुकदमे की सुनवाई इन-कैमरा की गई। अभियोजन पक्ष ने 71 गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए थे। इसके बावजूद मई 2021 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया और 10 वर्ष की सजा सुनाई है।
इस फैसले को भारतीय न्याय व्यवस्था में यौन अपराधों से जुड़े मामलों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। अब माना जा रहा है कि तरुण तेजपाल इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा।
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