महाराष्ट्र

ठाणे के स्कूलों में छात्रों की हीमोग्लोबिनोपैथी स्क्रीनिंग शुरू

Kavita2
17 Aug 2026 4:30 PM IST
ठाणे के स्कूलों में छात्रों की हीमोग्लोबिनोपैथी स्क्रीनिंग शुरू
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ठाणे। ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (TMC) के शिक्षा विभाग ने राजीव गांधी मेडिकल कॉलेज और कलवा स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल के सहयोग से नगर निगम स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत छात्रों की हीमोग्लोबिनोपैथी की स्क्रीनिंग की जाएगी।

इस पहल का आधिकारिक शुभारंभ 15 अगस्त 2026 को कलवा स्थित TMC स्कूल नंबर 69 में किया गया। अभियान का उद्देश्य बच्चों में खून से जुड़ी आनुवंशिक बीमारियों की समय पर पहचान करना और उन्हें बेहतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

हीमोग्लोबिनोपैथी खून से संबंधित उन बीमारियों का समूह है, जो माता-पिता से बच्चों में आनुवंशिक रूप से पहुंचती हैं। इनमें सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया प्रमुख बीमारियां हैं। ये बीमारियां संक्रामक नहीं होतीं और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलतीं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इन बीमारियों की पहचान अगर बचपन या किशोरावस्था में ही कर ली जाए तो प्रभावित बच्चों को समय पर इलाज और आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलती है।

TMC अधिकारियों ने बताया कि इस स्क्रीनिंग अभियान के माध्यम से नगर निगम स्कूलों के छात्रों की जांच की जाएगी। जांच के दौरान जिन बच्चों में बीमारी के संकेत मिलेंगे, उन्हें आगे की चिकित्सा सुविधा और विशेषज्ञों की सलाह उपलब्ध कराई जाएगी।

समय पर जांच होने से मेडिकल टीमें प्रभावित छात्रों को जरूरी उपचार, टीकाकरण, पोषण संबंधी सलाह और नियमित स्वास्थ्य निगरानी की सुविधा प्रदान कर सकेंगी।

आनुवंशिक बीमारियों की पहचान पर जोर

हीमोग्लोबिनोपैथी जैसी बीमारियां शरीर में हीमोग्लोबिन के निर्माण से जुड़ी होती हैं। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद एक महत्वपूर्ण तत्व है, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।

सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों में अक्सर खून की कमी, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में शुरुआती जांच और नियमित उपचार बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कई बार इन बीमारियों के लक्षण शुरुआती उम्र में स्पष्ट नहीं होते, जिसके कारण समय पर पहचान नहीं हो पाती। इसलिए स्कूल स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाना काफी प्रभावी साबित हो सकता है।

स्कूलों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

ठाणे नगर निगम का यह अभियान छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, स्कूल बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का सबसे बेहतर माध्यम हैं। बड़ी संख्या में बच्चे स्कूलों में आते हैं, इसलिए यहां स्वास्थ्य जांच कार्यक्रमों के जरिए गंभीर बीमारियों की पहचान आसान हो जाती है।

इस अभियान के दौरान छात्रों और अभिभावकों को भी हीमोग्लोबिनोपैथी से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। उन्हें बीमारी के कारणों, बचाव और इलाज के तरीकों के बारे में जागरूक किया जाएगा।

विशेषज्ञों की निगरानी में होगी जांच

अभियान में राजीव गांधी मेडिकल कॉलेज और छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। मेडिकल टीम छात्रों की जांच करेगी और जरूरत पड़ने पर आगे की चिकित्सा प्रक्रिया शुरू करेगी।

अधिकारियों ने बताया कि जिन छात्रों में बीमारी की पुष्टि होगी, उनके लिए नियमित फॉलो-अप की व्यवस्था की जाएगी। इससे बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।

बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में कदम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आनुवंशिक बीमारियों की शुरुआती पहचान से बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है। समय पर इलाज मिलने से बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है और बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं।

TMC की यह पहल न केवल स्वास्थ्य जांच तक सीमित है, बल्कि बच्चों और परिवारों को जागरूक करने का भी प्रयास है। इससे लोगों में आनुवंशिक बीमारियों को लेकर फैली गलत धारणाओं को दूर करने में मदद मिलेगी।

नगर निगम प्रशासन का कहना है कि छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए भविष्य में भी ऐसे अभियान चलाए जाएंगे। स्कूलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना और बच्चों को बेहतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना इसका मुख्य उद्देश्य है।

ठाणे में शुरू किया गया यह स्क्रीनिंग अभियान बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि इसके माध्यम से समय रहते बीमारियों की पहचान होगी और जरूरतमंद छात्रों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

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