महाराष्ट्र

AI और ड्रोन के दौर में HAM रेडियो संभालेगा मोर्चा, अनंत चतुर्दशी पर तैनात होंगे ऑपरेटर

Kavita2
16 Sept 2026 11:23 AM IST
AI और ड्रोन के दौर में HAM रेडियो संभालेगा मोर्चा, अनंत चतुर्दशी पर तैनात होंगे ऑपरेटर
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मुंबई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी, हाईटेक कैमरों और ड्रोन के दौर में मुंबई में गणेश विसर्जन के दौरान एक सदी से भी पुरानी संचार तकनीक भी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी। अनंत चतुर्दशी पर गणेश प्रतिमाओं के अंतिम विसर्जन के दौरान HAM यानी एमेच्योर रेडियो ऑपरेटर अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात रहेंगे। इनका मुख्य उद्देश्य आपात स्थिति या सामान्य संचार नेटवर्क में बाधा आने पर वैकल्पिक कम्युनिकेशन नेटवर्क उपलब्ध कराना होगा।

इस साल गणेशोत्सव के अंतिम दिन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर बड़े स्तर पर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। मुंबई में इस दिन लाखों श्रद्धालु सड़कों और प्रमुख विसर्जन स्थलों पर पहुंचते हैं। गिरगांव चौपाटी समेत कई स्थानों पर देर रात तक भीड़ बनी रहती है। ऐसे में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने भीड़ प्रबंधन के साथ अलग-अलग टीमों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है।

इसी जरूरत को देखते हुए आधुनिक तकनीक के साथ HAM रेडियो नेटवर्क को भी तैयार रखा जाएगा।

क्या है HAM रेडियो?

HAM रेडियो को एमेच्योर रेडियो भी कहा जाता है। यह वायरलेस कम्युनिकेशन की पुरानी और भरोसेमंद तकनीकों में शामिल है। लाइसेंस प्राप्त ऑपरेटर रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए एक-दूसरे से संपर्क स्थापित करते हैं।

इस व्यवस्था की खासियत यह है कि इसके लिए मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत नहीं होती। प्राकृतिक आपदा, बिजली गुल होने या मोबाइल नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव जैसी परिस्थितियों में HAM रेडियो वैकल्पिक संचार माध्यम के रूप में काम कर सकता है।

दुनियाभर में एमेच्योर रेडियो ऑपरेटर आपदा और आपात स्थितियों के दौरान संचार व्यवस्था में सहयोग करते रहे हैं। भारत में भी HAM रेडियो नेटवर्क का इस्तेमाल चक्रवात, बाढ़ और दूसरे बड़े आयोजनों के दौरान किया जाता रहा है।

विसर्जन स्थलों पर तैनात होंगे ऑपरेटर

अनंत चतुर्दशी पर HAM ऑपरेटरों को अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात करने की योजना है। वे वायरलेस उपकरणों के जरिए आपस में संपर्क बनाए रखेंगे और जरूरत पड़ने पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने में मदद करेंगे।

बड़े आयोजन के दौरान यदि किसी स्थान पर अचानक भीड़ बढ़ती है, किसी व्यक्ति को चिकित्सकीय सहायता की जरूरत होती है या कोई दूसरी आपात स्थिति पैदा होती है तो तेजी से सूचना पहुंचाना महत्वपूर्ण हो जाता है।

मोबाइल नेटवर्क पर एक साथ लाखों लोगों के सक्रिय होने से कभी-कभी नेटवर्क धीमा पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में स्वतंत्र रेडियो नेटवर्क बैकअप कम्युनिकेशन के तौर पर उपयोगी हो सकता है।

AI और ड्रोन भी रखेंगे नजर

इस बार सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक की भी बड़ी भूमिका रहेगी। भीड़ की निगरानी और संवेदनशील स्थानों पर नजर रखने के लिए AI आधारित निगरानी प्रणाली तथा ड्रोन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

AI आधारित कैमरे बड़ी भीड़ के बीच असामान्य गतिविधियों की पहचान और भीड़ के घनत्व की निगरानी में सहायता कर सकते हैं। वहीं ड्रोन से ऊपर से बड़े क्षेत्र पर नजर रखने में मदद मिलती है।

लेकिन तकनीक पर आधारित किसी भी व्यवस्था में बैकअप सिस्टम महत्वपूर्ण होता है। इसी वजह से HAM रेडियो जैसे स्वतंत्र संचार नेटवर्क की उपयोगिता बनी रहती है।

लाखों लोगों की भीड़ बनेगी चुनौती

मुंबई का गणेशोत्सव देश के सबसे बड़े सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों में शामिल है। अनंत चतुर्दशी के दिन शहर के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी और छोटी गणेश प्रतिमाएं विसर्जन के लिए निकलती हैं।

विसर्जन यात्राओं के दौरान कई सड़कों पर भारी भीड़ रहती है। श्रद्धालुओं के साथ मंडलों के सदस्य, स्वयंसेवक, सुरक्षा कर्मचारी और आपातकालीन सेवाओं की टीमें भी मौजूद रहती हैं।

इस दौरान ट्रैफिक प्रबंधन, मेडिकल सहायता, लापता लोगों की सूचना, भीड़ नियंत्रण और विसर्जन स्थलों की सुरक्षा जैसे कई काम एक साथ चलते हैं। इन सभी व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग टीमों के बीच तेज और विश्वसनीय संचार जरूरी होता है।

मोबाइल नेटवर्क फेल हुआ तो काम आएगा रेडियो

HAM रेडियो की सबसे बड़ी उपयोगिता आपातकालीन बैकअप के रूप में मानी जाती है। सामान्य परिस्थितियों में मोबाइल फोन और इंटरनेट संचार के प्रमुख साधन हैं, लेकिन बड़ी भीड़ के दौरान नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है।

इसके अलावा किसी तकनीकी खराबी या बिजली संबंधी समस्या के कारण भी संचार प्रभावित हो सकता है। HAM ऑपरेटर अपने रेडियो उपकरणों की मदद से ऐसी परिस्थितियों में संदेशों का आदान-प्रदान जारी रख सकते हैं।

हालांकि HAM रेडियो पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों के आधिकारिक वायरलेस नेटवर्क का विकल्प नहीं है। इसे एक सहयोगी और अतिरिक्त संचार व्यवस्था के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

एक सदी पुरानी तकनीक आज भी उपयोगी

एमेच्योर रेडियो का इतिहास एक सदी से अधिक पुराना है। इंटरनेट, स्मार्टफोन और सैटेलाइट कम्युनिकेशन आने के बावजूद आपात स्थितियों में इसकी उपयोगिता बनी हुई है।

इसकी बड़ी वजह इसका अपेक्षाकृत स्वतंत्र नेटवर्क है। ऑपरेटर आवश्यक उपकरण और उपलब्ध रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए संपर्क बना सकते हैं। इसी कारण आपदा प्रबंधन में HAM ऑपरेटरों की भूमिका कई बार महत्वपूर्ण साबित हुई है।

पुराने और नए सिस्टम का अनोखा मेल

अनंत चतुर्दशी की सुरक्षा व्यवस्था इस बार आधुनिक और पारंपरिक तकनीक के मेल का उदाहरण बनेगी। एक तरफ AI आधारित निगरानी, कैमरे और ड्रोन भीड़ पर नजर रखेंगे, तो दूसरी तरफ HAM ऑपरेटर रेडियो के जरिए वैकल्पिक कम्युनिकेशन चैनल तैयार रखेंगे।

25 सितंबर को अंतिम विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन के लिए निर्बाध संचार महत्वपूर्ण होगा। अलग-अलग एजेंसियों और स्वयंसेवी समूहों के बीच समन्वय जितना मजबूत होगा, किसी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया उतनी ही तेजी से दी जा सकेगी।

इस तरह स्मार्टफोन और AI के दौर में करीब एक सदी पुरानी रेडियो तकनीक एक बार फिर साबित करेगी कि आपात संचार में पुराने लेकिन स्वतंत्र नेटवर्क की उपयोगिता आज भी बनी हुई है।

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