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मुंबई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के बीच शुक्रवार को मुंबई में खुद को ‘जेन नेक्स्ट मुंबई’ का सदस्य बताने वाले लोगों के एक समूह ने जवाबी प्रदर्शन किया। समूह ने बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा के पास शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते हुए संविधान के सम्मान और उसकी रक्षा का संदेश दिया।
यह जवाबी प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब CJP के समर्थक मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। चुनाव आयोग और सरकार ने मतदाता सूची में राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है।
इसी प्रदर्शन के जवाब में ‘जेन नेक्स्ट मुंबई’ के नाम से सामने आए समूह ने अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना और संविधान के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि अभिजीत दिपके जैसे लोग संविधान को खत्म करने की बात करते हैं। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है और इसे प्रदर्शनकारी के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। समूह ने अपने प्रदर्शन के दौरान संविधान की रक्षा और उसके सम्मान को प्रमुख मुद्दा बनाया।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “अभिजीत दिपके जैसे लोग संविधान को खत्म करने की बात करते हैं। लेकिन आज हम बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे खड़े हैं क्योंकि हम जानते हैं कि संविधान की रक्षा और सम्मान कैसे किया जाता है।” प्रदर्शनकारी ने आगे कहा कि इसी उद्देश्य से समूह शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए एकत्र हुआ है और CJP के व्यवहार का विरोध किया जा रहा है।
मुंबई में शुक्रवार को CJP के प्रदर्शन के कारण राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज रहीं। CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके इससे पहले भी चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा चुके हैं। CJP ने अपने आंदोलन को देश के अन्य हिस्सों तक ले जाने की बात भी कही है।
वहीं ‘जेन नेक्स्ट मुंबई’ के प्रदर्शनकारियों ने CJP के रुख का विरोध किया। समूह ने बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे प्रदर्शन कर संविधान के सम्मान को अपने कार्यक्रम का मुख्य संदेश बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने का तरीका शांतिपूर्ण और संविधान के दायरे में होना चाहिए।
दोनों समूहों के अलग-अलग रुख के कारण मुंबई में चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज दिखाई दी। एक तरफ CJP मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही थी, जबकि दूसरी तरफ ‘जेन नेक्स्ट मुंबई’ से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने CJP के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
CJP के प्रदर्शन को देखते हुए मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी। शिवाजी पार्क और आसपास के क्षेत्र में पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। CJP के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
इस बीच जवाबी प्रदर्शन करने वाले समूह ने खुद को ‘जेन नेक्स्ट मुंबई’ से जुड़ा बताया। समूह के सदस्यों ने कहा कि वे किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपना पक्ष रखने के लिए एकत्र हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने संविधान और बाबासाहेब अंबेडकर का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी।
मुंबई में हुए इन प्रदर्शनों के केंद्र में चुनाव आयोग, मतदाता सूची और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर अलग-अलग दावे और विचार रहे। CJP ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है, जबकि जवाबी प्रदर्शन करने वाले समूह ने CJP के तरीके और उसके नेताओं के बयानों पर आपत्ति जताई।
CJP की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर दूसरी तरफ भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने CJP और अन्य प्रदर्शनकारियों की ओर से चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें कथित रूप से ‘फर्जी नैरेटिव’ बताया है।
शुक्रवार का जवाबी प्रदर्शन इस कारण भी चर्चा में रहा कि प्रदर्शनकारियों ने बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे खड़े होकर संविधान की रक्षा और सम्मान का मुद्दा उठाया। समूह के सदस्यों ने कहा कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और वे इसी तरीके से CJP के रुख का विरोध कर रहे हैं।
मुंबई में एक तरफ CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और दूसरी तरफ ‘जेन नेक्स्ट मुंबई’ के नाम से सामने आए समूह के जवाबी प्रदर्शन ने चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर जारी बहस को और तेज कर दिया है। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखी, जबकि CJP और उसके संस्थापक को लेकर जवाबी प्रदर्शन में लगाए गए आरोप प्रदर्शनकारियों के दावे हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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