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Maharashtra महाराष्ट्र: पिंपरी-चिंचवड़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आबादी के चलते कचरा उत्पादन में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। हाल के वर्षों में शहर में रोजाना उत्पन्न होने वाला कचरा 2017 के 832 टन से बढ़कर अब 1,579 टन तक पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी के कारण मोशी वेस्ट डिपो की क्षमता लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
नगर निगम (PCMC) के सामने अब कचरा प्रबंधन एक गंभीर चुनौती बन गया है। शहर में कचरे के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए प्रशासन ने ‘वेस्ट-टू-एनर्जी’ प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके तहत कचरे से बिजली उत्पादन की योजना बनाई गई है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह कदम भी पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए PCMC प्रशासन ने एक नया निर्देश जारी किया है, जिसके तहत 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाली हाउसिंग सोसायटियों को अपने परिसर में ही कचरा प्रोसेसिंग प्लांट लगाना अनिवार्य किया गया है। इस निर्णय का शहर की विभिन्न सोसायटी फेडरेशनों ने कड़ा विरोध किया है, जिससे प्रशासन और नागरिक संगठनों के बीच मतभेद की स्थिति बन गई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिंपरी-चिंचवड़ की आबादी अब 30 लाख से अधिक हो चुकी है। बढ़ती जनसंख्या के साथ कचरे की मात्रा में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे शहर में कचरा प्रबंधन प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
मोशी वेस्ट डिपो, जिसे 1991 में स्थापित किया गया था, पिछले 35 वर्षों से शहर के कचरे का मुख्य निस्तारण स्थल रहा है। 81 एकड़ क्षेत्र में फैले इस डिपो पर अब क्षमता से अधिक कचरा जमा हो चुका है, जिससे वहां ‘कचरे का पहाड़’ जैसी स्थिति बन गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जल्द ही प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो आने वाले समय में कचरा संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है। प्रशासन अब नए विकल्पों और दीर्घकालिक समाधान पर विचार कर रहा है।





