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विमान के टॉयलेट में छिपाकर सोना निकालने वाले गिरोह का पर्दाफाश पांच को किया गिरफ्तार

मुंबई : डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने सोने की तस्करी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य विमान के टॉयलेट में छिपाकर रखे गए तस्करी के सोने को निकालकर एयरपोर्ट से बाहर पहुंचाने का काम करते थे। गिरफ्तार आरोपियों में एक यात्री, एयरपोर्ट सफाई कर्मचारी और गिरोह के समन्वयक शामिल हैं।
DRI अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई। अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि दुबई से आने वाली एक उड़ान में एक यात्री सोने की तस्करी करने वाला है। सूचना के आधार पर एजेंसी ने निगरानी शुरू की और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई। जांच में पता चला कि तस्करी का सोना विमान के अंदर छिपाया जाना था, जिसे बाद में एयरपोर्ट स्टाफ की मदद से बाहर निकाला जाना था।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मोहम्मद उरवा (29), राजेश मांजरेकर (56), जहीर कुरैशी (42), मोहम्मद अजहर काजी (39) और मोहम्मद अहमद (26) के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी की भूमिका सोने की तस्करी की पूरी योजना में अलग-अलग थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, दुबई से आने वाला यात्री मोहम्मद उरवा कथित तौर पर विमान के अंदर सोना छिपाने वाला था। इसके बाद एयरपोर्ट के निजी स्टाफ से जुड़े राजेश मांजरेकर और जहीर कुरैशी की मदद से उस सोने को विमान के टॉयलेट से निकालकर एयरपोर्ट परिसर से बाहर पहुंचाने की योजना थी।
DRI अधिकारियों ने बताया कि तस्करी के इस तरीके में गिरोह विमान के अंदर मौजूद सुविधाओं का गलत इस्तेमाल करता था। तस्कर सुरक्षा जांच से बचने के लिए सोने को ऐसी जगह छिपाने की कोशिश करते थे, जहां आमतौर पर यात्रियों की नजर कम जाती है। बाद में एयरपोर्ट स्टाफ की मदद से उसे बाहर निकालने का प्रयास किया जाता था।
अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला केवल एक यात्री द्वारा सोना लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा था। इसी वजह से DRI ने यात्री के साथ-साथ एयरपोर्ट से जुड़े कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों को भी जांच के दायरे में लिया।
DRI ने मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह गिरोह कब से सक्रिय था और इससे पहले कितनी बार इस तरह की तस्करी की गई। इसके अलावा गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी के मामलों में अक्सर तस्कर नए-नए तरीके अपनाते हैं। वे सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने के लिए यात्रियों, एयरपोर्ट कर्मचारियों और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में केवल सोना बरामद करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि पूरे नेटवर्क को पकड़ना जरूरी होता है।
DRI अब गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर सकती है। इससे यह पता लगाया जाएगा कि गिरोह के संपर्क किन लोगों से थे और तस्करी से होने वाले आर्थिक लाभ को किस तरह बांटा जाता था।
मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (CSMI) देश के प्रमुख हवाई अड्डों में शामिल है और यहां अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बड़ी संख्या में आवाजाही होती है। इसी कारण राजस्व और सुरक्षा एजेंसियां यहां सोने, विदेशी मुद्रा और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी रोकने के लिए लगातार निगरानी रखती हैं।
अधिकारियों का कहना है कि एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील स्थानों पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि कोई कर्मचारी तस्करी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो इससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाती है।
सोने की तस्करी भारत में लंबे समय से एक चुनौती बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में अंतर के कारण तस्कर अवैध तरीके से सोना लाने का प्रयास करते हैं। जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर ऐसे नेटवर्क को तोड़ने में जुटी रहती हैं।
DRI अधिकारियों ने कहा कि इस मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एजेंसी का लक्ष्य तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाना और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है।
फिलहाल पांचों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। DRI की इस कार्रवाई को हवाई मार्ग से होने वाली सोने की तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।





