महाराष्ट्र

पूर्व सांसद आनंद परांजपे बने पार्टी प्रवक्ता, एकनाथ शिंदे ने सौंपी जिम्मेदारी

Kavita2
20 Oct 2026 3:12 PM IST
पूर्व सांसद आनंद परांजपे बने पार्टी प्रवक्ता, एकनाथ शिंदे ने सौंपी जिम्मेदारी
x

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पार्टी ने पूर्व सांसद और महाराष्ट्र के राज्य संगठन प्रमुख आनंद परांजपे को अपना प्रवक्ता नियुक्त किया है। पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से इस नियुक्ति की घोषणा किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि यह निर्णय शिवसेना के मुख्य नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्देश पर लिया गया है। इस नई जिम्मेदारी के साथ आनंद परांजपे अब पार्टी की नीतियों, राजनीतिक फैसलों और विभिन्न मुद्दों पर आधिकारिक पक्ष रखने की भूमिका निभाएंगे। उनकी नियुक्ति को शिवसेना की संगठनात्मक और मीडिया समन्वय व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आनंद परांजपे महाराष्ट्र की राजनीति में जाना-पहचाना नाम हैं। वह ठाणे और कल्याण लोकसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इससे पहले जून 2026 में एकनाथ शिंदे ने उन्हें शिवसेना का प्रदेश संगठन प्रमुख नियुक्त किया था। अब प्रवक्ता की जिम्मेदारी मिलने से पार्टी में उनकी भूमिका और व्यापक हो सकती है। हालांकि, प्रवक्ता नियुक्ति की मूल सोशल मीडिया पोस्ट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।


एकनाथ शिंदे के निर्देश पर नियुक्ति

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिवसेना नेतृत्व ने आनंद परांजपे को पार्टी का प्रवक्ता बनाने का निर्णय लिया है।

इस संबंध में पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से घोषणा किए जाने की बात कही गई है।

नई जिम्मेदारी के तहत परांजपे पार्टी की राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों से संबंधित मुद्दों पर पक्ष रख सकेंगे।

विभिन्न राजनीतिक विषयों पर मीडिया से संवाद करना और पार्टी के अधिकृत विचारों को जनता तक पहुंचाना प्रवक्ता के प्रमुख कार्यों में शामिल होता है।

शिवसेना नेतृत्व की ओर से यह फैसला संगठन में जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण के रूप में भी देखा जा रहा है।

पहले से संभाल रहे प्रदेश संगठन प्रमुख की जिम्मेदारी

आनंद परांजपे को जून 2026 में शिवसेना का महाराष्ट्र राज्य संगठन प्रमुख नियुक्त किया गया था।

एकनाथ शिंदे ने उनकी नियुक्ति की घोषणा करते हुए उन्हें एक वर्ष के लिए यह जिम्मेदारी सौंपी थी।

संगठन प्रमुख के रूप में उनका कार्य पार्टी की गतिविधियों में समन्वय बनाए रखना और विभिन्न स्तरों पर संगठन को सक्रिय करने से जुड़ा है।

अब प्रवक्ता का पद मिलने के बाद वह संगठनात्मक जिम्मेदारियों के साथ पार्टी की सार्वजनिक संवाद व्यवस्था में भी भूमिका निभा सकेंगे।

हालांकि, दोनों पदों के कार्यों और अधिकारों के संबंध में पार्टी की विस्तृत नई व्यवस्था सामने नहीं आई है।

ठाणे और कल्याण से रह चुके हैं सांसद

आनंद परांजपे का राजनीतिक अनुभव लंबे समय का है। वह महाराष्ट्र के ठाणे और कल्याण लोकसभा क्षेत्रों से सांसद रह चुके हैं।

उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत शिवसेना के साथ की थी।

इसके बाद महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से भी जुड़े।

संसदीय राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों में काम करने के कारण परांजपे को विभिन्न राजनीतिक मुद्दों का अनुभव है।

पार्टी के प्रवक्ता के रूप में यह अनुभव सार्वजनिक संवाद और राजनीतिक विषयों पर पक्ष रखने में उपयोगी हो सकता है।

14 साल बाद शिवसेना में हुई थी वापसी

आनंद परांजपे ने मई 2026 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में वापसी की थी।

उन्होंने 14 मई को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था।

इसके बाद मुंबई स्थित बालासाहेब भवन में आयोजित कार्यक्रम में वह शिवसेना में शामिल हुए।

इस अवसर पर सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे, मंत्री दादा भुसे और उदय सामंत सहित कई नेता उपस्थित थे।

परांजपे ने पार्टी में वापसी के दौरान कहा था कि उनका राजनीतिक सफर शिवसेना से ही शुरू हुआ था और संगठन के प्रति उनका विशेष लगाव है।

उन्होंने एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे द्वारा दी जाने वाली जिम्मेदारियों को निभाने की प्रतिबद्धता भी जताई थी।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

शिवसेना में वापसी से पहले आनंद परांजपे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में सक्रिय थे।

उन्होंने पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सहित विभिन्न संगठनात्मक पदों पर काम किया था।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में विभाजन के बाद वह अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट से जुड़े रहे।

इसके अलावा उन्होंने ठाणे और पालघर क्षेत्रों में संगठनात्मक समन्वय की जिम्मेदारी भी संभाली थी।

मई 2026 में उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देकर शिवसेना में लौटने का फैसला किया।

इस तरह परांजपे के पास संसदीय राजनीति के साथ विभिन्न दलों की संगठनात्मक और मीडिया गतिविधियों में काम करने का अनुभव है।

पिता प्रकाश परांजपे भी रहे सांसद

आनंद परांजपे का परिवार लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति और शिवसेना से जुड़ा रहा है।

उनके पिता प्रकाश परांजपे शिवसेना के वरिष्ठ नेता थे और चार बार सांसद रहे थे।

पिता के निधन के बाद आनंद परांजपे ने ठाणे लोकसभा उपचुनाव लड़ा और संसद पहुंचे।

इसके बाद उन्होंने कल्याण लोकसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया।

आनंद परांजपे ने पूर्व में कहा था कि शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से उन्हें राजनीतिक जीवन में आगे बढ़ने का अवसर मिला।

उनके परिवार की शिवसेना से पुरानी संबद्धता भी पार्टी में उनकी वापसी की चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू रही है।

पार्टी की मीडिया रणनीति में निभाएंगे भूमिका

राजनीतिक दलों में प्रवक्ता की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रवक्ता मीडिया के माध्यम से पार्टी की नीतियों और निर्णयों को जनता तक पहुंचाने का काम करते हैं।

इसके अलावा राजनीतिक घटनाक्रम, सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक मुद्दों पर पार्टी का आधिकारिक पक्ष रखना भी इस पद की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।

आनंद परांजपे को इस पद पर नियुक्त किए जाने के बाद वह राज्य की राजनीति से जुड़े विभिन्न विषयों पर शिवसेना की ओर से संवाद कर सकेंगे।

उनका पूर्व राजनीतिक अनुभव पार्टी की संवाद व्यवस्था में उपयोगी साबित हो सकता है।

महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण समय पर नियुक्ति

आनंद परांजपे को नई जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है, जब महाराष्ट्र में विभिन्न राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हैं।

शिवसेना के दोनों गुट अपने-अपने स्तर पर संगठनात्मक कार्यक्रम और राजनीतिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्सा है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) विपक्षी राजनीति में सक्रिय है।

इन परिस्थितियों में पार्टी के लिए आधिकारिक संवाद और राजनीतिक मुद्दों पर अपना पक्ष प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण बना हुआ है।

संगठन और जनसंपर्क पर रहेगा जोर

शिवसेना में संगठन प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे आनंद परांजपे के सामने अब प्रवक्ता के रूप में नई भूमिका होगी।

इस जिम्मेदारी के तहत पार्टी के संगठनात्मक फैसलों और सार्वजनिक मुद्दों को लेकर संवाद स्थापित करना महत्वपूर्ण रहेगा।

साथ ही पार्टी नेतृत्व द्वारा लिए गए निर्णयों की जानकारी मीडिया और आम जनता तक पहुंचाने में उनकी भागीदारी होगी।

उनकी नियुक्ति से जुड़े विस्तृत कार्यविभाजन और भविष्य के कार्यक्रमों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

शिंदे नेतृत्व ने जताया भरोसा

आनंद परांजपे की नियुक्ति को एकनाथ शिंदे द्वारा उन्हें दी गई एक और संगठनात्मक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।

मई में शिवसेना में वापसी, जून में राज्य संगठन प्रमुख की नियुक्ति और अब प्रवक्ता की जिम्मेदारी उनके राजनीतिक सफर का नया चरण है।

पूर्व सांसद होने के कारण परांजपे को संसदीय कार्यप्रणाली और सार्वजनिक मुद्दों पर काम करने का अनुभव भी है।

अब पार्टी की ओर से वह किस प्रकार की जिम्मेदारियां संभालेंगे और किन मुद्दों पर संवाद करेंगे, यह आगे के राजनीतिक कार्यक्रमों से स्पष्ट होगा।

फिलहाल शिवसेना ने आनंद परांजपे को प्रवक्ता नियुक्त कर अपनी संगठनात्मक और मीडिया व्यवस्था में एक नया बदलाव किया है।

Next Story