महाराष्ट्र

चीनी एक्सपोर्ट में 6.43 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी, FIR

Kavita2
24 Aug 2026 9:53 AM IST
चीनी एक्सपोर्ट में 6.43 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी, FIR
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मुंबई। अमेरिका को चीनी निर्यात करने का कोटा हासिल करने के लिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने का मामला सामने आया है। मुंबई की पंतनगर पुलिस ने घाटकोपर स्थित एक कंपनी के मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि कंपनी मालिक ने एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी APEDA को 6.43 करोड़ रुपये की नकली बैंक गारंटी सौंपकर अमेरिका को चीनी निर्यात करने का कोटा हासिल किया था।

मामले में आरोपी की पहचान राजेश तुलसीदास नखुआ के रूप में हुई है। वह घाटकोपर स्थित 'मेक इंडिया इम्पेक्स' कंपनी के मालिक बताए गए हैं। शिकायत के मुताबिक कंपनी को अमेरिका में 8,584 मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने का कोटा मिला था। आरोप है कि कोटा हासिल करने के बावजूद कंपनी ने निर्धारित मात्रा में चीनी का निर्यात पूरा नहीं किया।

इस मामले में APEDA की ओर से डिप्टी जनरल मैनेजर प्रशांत प्रमोद वाघमारे ने पंतनगर पुलिस स्टेशन में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। 53 वर्षीय वाघमारे की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कंपनी मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में बैंक गारंटी से जुड़े दस्तावेजों और कोटा हासिल करने की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल किए जाने की संभावना है।

शिकायत के अनुसार अमेरिका को चीनी निर्यात करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत कंपनी ने आवेदन किया था। इस दौरान संबंधित शर्तों को पूरा करने के लिए बैंक गारंटी जमा कराई गई। आरोप है कि कंपनी की तरफ से पेश की गई 6.43 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी वास्तविक नहीं थी। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

पुलिस के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह पता लगाना होगा कि कथित फर्जी बैंक गारंटी किस तरह तैयार की गई और इसे बनाने में कौन-कौन शामिल था। क्या दस्तावेज किसी बैंक के नाम पर तैयार किए गए थे और उसमें इस्तेमाल किए गए हस्ताक्षर, मुहर तथा अन्य विवरण वास्तविक थे या नहीं, इसकी भी जांच की जा सकती है।

इसके अलावा पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि बैंक गारंटी APEDA के समक्ष जमा करते समय किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और सत्यापन की प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई। यदि जांच में अन्य व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका सामने आती है तो मामले का दायरा बढ़ सकता है।

शिकायत में कंपनी को मिले 8,584 मीट्रिक टन चीनी के निर्यात कोटे का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि कंपनी ने यह कोटा हासिल तो कर लिया, लेकिन निर्धारित निर्यात को पूरा नहीं किया। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर सकती है कि कोटा मिलने के बाद कंपनी ने वास्तव में कितनी चीनी निर्यात की और निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं होने के पीछे क्या कारण रहे।

अमेरिका को चीनी निर्यात की प्रक्रिया में निर्धारित कोटा और उससे जुड़ी शर्तों का पालन महत्वपूर्ण होता है। ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य निर्यात को नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से पूरा करना होता है। यदि कोई कंपनी गलत या जाली दस्तावेजों के जरिए कोटा हासिल करती है तो यह पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।

APEDA की भूमिका कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने तथा उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्राधिकरण के सामने प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रामाणिकता बेहद अहम होती है। इसी वजह से कथित तौर पर 6.43 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी का मामला गंभीर माना जा रहा है।

पंतनगर पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। बैंक गारंटी जारी करने वाले कथित बैंक से भी दस्तावेजों की पुष्टि कराई जा सकती है। इसके अलावा कंपनी के रिकॉर्ड, ईमेल, वित्तीय लेनदेन और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज जांच के दायरे में आ सकते हैं।

जांच में यह भी देखा जा सकता है कि कथित फर्जी बैंक गारंटी तैयार करने का उद्देश्य केवल निर्यात कोटा हासिल करना था या इसके पीछे किसी अन्य तरह का आर्थिक लाभ लेने की योजना थी। पुलिस आरोपी कंपनी मालिक से पूछताछ कर दस्तावेजों की उत्पत्ति और उन्हें जमा करने की परिस्थितियों के बारे में जानकारी जुटा सकती है।

मामले में शिकायतकर्ता प्रशांत प्रमोद वाघमारे ने APEDA की ओर से पुलिस के सामने संबंधित रिकॉर्ड और जानकारी प्रस्तुत की है। पुलिस अब इन दस्तावेजों का परीक्षण कर आरोपों की पुष्टि करेगी। जरूरत पड़ने पर बैंक अधिकारियों और निर्यात प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।

फर्जी बैंक गारंटी से जुड़े मामलों में दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी महत्वपूर्ण साबित होती है। जांच के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि बैंक गारंटी में किसी वास्तविक दस्तावेज में बदलाव किया गया था या पूरा दस्तावेज ही कथित रूप से फर्जी तैयार किया गया। डिजिटल रिकॉर्ड से भी महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।

फिलहाल पंतनगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। कंपनी मालिक पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। पुलिस के सामने अब 6.43 करोड़ रुपये की कथित फर्जी बैंक गारंटी, 8,584 मीट्रिक टन चीनी के निर्यात कोटे और निर्यात पूरा नहीं किए जाने से जुड़ी पूरी कड़ी को सामने लाने की चुनौती है।

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