महाराष्ट्र

मुंबई में MNS शिवसेना UBT के विरोध मार्च पर FIR

Ratna Netam
4 Oct 2026 9:52 PM IST
मुंबई में MNS शिवसेना UBT के विरोध मार्च पर FIR
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मुंबई : महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना (UBT) के संयुक्त विरोध मार्च को लेकर विवाद बढ़ गया है। मुंबई पुलिस ने रविवार को मार्च के आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। आरोप है कि दक्षिण मुंबई में निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद जरूरी पुलिस अनुमति के बिना विरोध मार्च निकाला गया। इस मामले में आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है।विरोध मार्च का नेतृत्व शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने किया। दोनों नेताओं ने मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ यानी SIR के मुद्दे को लेकर संयुक्त रूप से मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताया गया और मार्च बीएमसी मुख्यालय तक ले जाया गया।इस राजनीतिक प्रदर्शन में दोनों दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। लंबे समय बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का इस तरह एक मुद्दे पर साथ आकर प्रदर्शन करना भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
बिना अनुमति मार्च निकालने का आरोप
पुलिस की कार्रवाई का मुख्य आधार विरोध मार्च के लिए जरूरी अनुमति नहीं लिए जाने और लागू निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन को बताया गया है। दक्षिण मुंबई जैसे संवेदनशील और व्यस्त इलाके में बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमति और निर्धारित शर्तों का पालन जरूरी होता है।आरोप है कि आयोजकों ने इन शर्तों का पालन किए बिना मार्च निकाला। इसके बाद आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम और मार्च के आयोजन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।एफआईआर दर्ज होने के बाद इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। विरोध मार्च पहले ही SIR को लेकर राजनीतिक बहस के बीच आयोजित किया गया था और अब पुलिस कार्रवाई के बाद मामला और चर्चा में आ गया है।
SIR के मुद्दे पर निकाला गया मार्च
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में निकाले गए इस मार्च का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ था। दोनों नेताओं ने इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताया।मार्च के दौरान बड़ी संख्या में दोनों दलों के कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शनकारी बीएमसी मुख्यालय की ओर बढ़े और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाई।मतदाता सूची किसी भी चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसे में सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से जुड़ी प्रक्रिया राजनीतिक दलों के लिए भी अहम होती है। इसी वजह से SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।
उद्धव और राज ठाकरे एक साथ
इस विरोध प्रदर्शन का एक बड़ा राजनीतिक पहलू उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक मंच पर आना भी रहा। महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों नेताओं की अपनी अलग-अलग राजनीतिक पहचान है। इस बार SIR के मुद्दे पर दोनों दलों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन करने का फैसला किया।उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की MNS के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने मार्च को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। दोनों नेताओं ने मिलकर विरोध मार्च का नेतृत्व किया और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया।दोनों दलों के इस संयुक्त प्रदर्शन को आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस मार्च का घोषित मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा रहा।
दक्षिण मुंबई में लागू थी निषेधाज्ञा
पुलिस के अनुसार, जिस इलाके में मार्च निकाला गया वहां निषेधाज्ञा लागू थी। ऐसे में बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों के साथ मार्च निकालना नियमों के उल्लंघन के दायरे में आने का आरोप है।दक्षिण मुंबई में कई महत्वपूर्ण सरकारी और प्रशासनिक कार्यालय मौजूद हैं। इसी कारण बड़े प्रदर्शन, रैली या मार्च के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस विशेष सतर्कता बरतती है।विरोध प्रदर्शन के दौरान भी पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। बाद में आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
आयोजकों की भूमिका की होगी जांच
आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस यह जांच करेगी कि विरोध मार्च के आयोजन की जिम्मेदारी किन लोगों के पास थी और इसके लिए किसी स्तर पर अनुमति मांगी गई थी या नहीं।इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि मार्च के दौरान लागू प्रतिबंधों और पुलिस की ओर से दिए गए निर्देशों का किस हद तक पालन किया गया। जांच के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।फिलहाल एफआईआर आयोजकों के खिलाफ दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच के बाद ही अलग-अलग व्यक्तियों की जिम्मेदारी और कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के संकेत
SIR को लेकर निकाला गया विरोध मार्च और उसके बाद दर्ज एफआईआर ने मुंबई में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। एक तरफ MNS और शिवसेना (UBT) ने मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे को लेकर संयुक्त प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने अनुमति और निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन को लेकर कानूनी कार्रवाई की है।इस पूरे घटनाक्रम में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का संयुक्त रूप से मार्च का नेतृत्व करना भी प्रमुख राजनीतिक तस्वीर बनकर सामने आया है। दोनों नेताओं की मौजूदगी से SIR का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में और प्रमुखता से उभरा है।अब नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और एफआईआर के बाद आयोजकों की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल मुंबई पुलिस की कार्रवाई के बाद संयुक्त विरोध मार्च का मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा में आ गया है।
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