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सड़क चौड़ीकरण के लिए 694 पेड़ों की कटाई शुरू, पर्यावरणविदों ने मांगा वैकल्पिक समाधान

छत्रपति संभाजीनगर: नगर नाका से दौलताबाद टी-पॉइंट तक सड़क को चौड़ा करने की परियोजना ने एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बहस छेड़ दी है। प्रस्तावित छह लेन सड़क के लिए पुराने पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई शुरू होने से स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों में नाराजगी है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार, परियोजना के रास्ते में आने वाले लगभग 694 पेड़ काटे जाने हैं। वहीं, पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस मार्ग पर पेड़ों की वास्तविक संख्या 700 से 750 के बीच हो सकती है।
यह मार्ग यातायात के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे छह लेन का बनाने का प्रस्ताव पहले से चर्चा में रहा है। सड़क के विस्तार को आवागमन बेहतर बनाने और भविष्य में बढ़ने वाले यातायात का दबाव संभालने के लिए आवश्यक बताया जा रहा है। दूसरी ओर, प्रस्तावित मार्ग के दोनों किनारों पर बड़ी संख्या में पुराने और देशी प्रजातियों के पेड़ मौजूद हैं। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण के लिए उनकी कटाई को लेकर विरोध शुरू हो गया है।
पर्यावरणविदों के मुताबिक, सड़क किनारे बरगद, नीम, इमली, शीशम, महारुख और काशिद जैसी देशी प्रजातियों के पेड़ हैं। इनमें से कई पेड़ 50 से 100 वर्ष पुराने बताए जा रहे हैं। लंबे समय से सड़क किनारे खड़े ये पेड़ केवल हरियाली का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि आसपास के पर्यावरण, स्थानीय तापमान और जैव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि सड़क विस्तार की योजना बनाते समय पुराने पेड़ों को बचाने के लिए पर्याप्त प्रयास क्यों नहीं किए गए। लोगों का कहना है कि विकास परियोजनाओं की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन उनके कारण होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करना भी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। सड़क की डिजाइन में बदलाव या अन्य तकनीकी विकल्पों के माध्यम से कुछ पेड़ों को बचाया जा सकता था।
वर्ष 2024 से जुड़े एक रिकॉर्ड में इस मार्ग पर नीम, शीशम, महारुख और काशिद सहित कई प्रजातियों के पेड़ होने की जानकारी सामने आई थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इनमें 50 शीशम, 40 महारुख और 40 काशिद के पेड़ शामिल थे। हालांकि, नीम के पेड़ों की संख्या उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
पर्यावरणविदों ने इससे पहले भी सड़क को छह लेन में बदलने की योजना पर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि मार्ग के किनारे लगे पुराने पेड़ों की उम्र और पर्यावरणीय महत्व को देखते हुए परियोजना का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए। केवल पेड़ों को काटकर सड़क का विस्तार करने के बजाय ऐसी वैकल्पिक योजना तैयार की जाए, जिससे यातायात की समस्या का समाधान भी हो और अधिकतम पेड़ों को सुरक्षित भी रखा जा सके।
लोक निर्माण विभाग की ओर से 694 पेड़ों को काटे जाने की संख्या बताई गई है, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुमान में यह आंकड़ा अधिक है। दोनों आंकड़ों में अंतर होने के कारण काटे जाने वाले पेड़ों की अंतिम सूची सार्वजनिक करने की मांग भी उठ सकती है। पेड़ों की प्रजाति, उम्र, स्वास्थ्य और सड़क परियोजना में उनकी स्थिति से संबंधित जानकारी उपलब्ध होने पर पूरे मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों की चिंता विशेष रूप से उन पेड़ों को लेकर है, जिन्हें तैयार होने में कई दशक लगे हैं। पुराने बरगद, नीम और इमली जैसे पेड़ बड़े क्षेत्र में छाया उपलब्ध कराते हैं। इसके साथ ही वे पक्षियों और अन्य जीवों के लिए प्राकृतिक ठिकाने का काम करते हैं। इन पेड़ों के हटने से सड़क किनारे का पूरा प्राकृतिक स्वरूप बदलने की आशंका जताई जा रही है।
पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि नए पौधे लगाना पुराने विकसित पेड़ों की तत्काल भरपाई नहीं कर सकता। किसी पुराने पेड़ जितनी छाया और पर्यावरणीय उपयोगिता देने में नए पौधे को वर्षों लग सकते हैं। ऐसे में प्रतिपूरक पौधारोपण के साथ लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और जीवित रहने की निगरानी भी जरूरी होगी। हालांकि, इस परियोजना के तहत कितने नए पौधे लगाए जाएंगे और उनके लिए कौन-सा स्थान चुना गया है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
सड़क चौड़ीकरण का समर्थन करने वाले लोगों के लिए मुख्य चिंता यातायात व्यवस्था है, जबकि विरोध कर रहे पर्यावरणविद पेड़ों को बचाने के लिए डिजाइन में बदलाव चाहते हैं। उनका सुझाव है कि जहां संभव हो वहां सड़क की दिशा या चौड़ाई में व्यावहारिक परिवर्तन, पेड़ों के आसपास सुरक्षित स्थान अथवा अन्य तकनीकी विकल्पों पर विचार किया जाए। किसी पेड़ का प्रत्यारोपण संभव है या नहीं, इसका निर्णय भी विशेषज्ञों की राय के आधार पर होना चाहिए।
इस परियोजना ने सड़क निर्माण से पहले पारदर्शी पर्यावरणीय आकलन और सार्वजनिक संवाद की आवश्यकता को सामने रखा है। यदि विभाग पेड़ों की गणना, कटाई की अनुमति, वैकल्पिक डिजाइन और प्रतिपूरक पौधारोपण की योजना सार्वजनिक करता है, तो स्थानीय लोगों की कई शंकाएं दूर हो सकती हैं।
फिलहाल पुराने पेड़ों की कटाई शुरू होने से विवाद गहरा गया है। एक ओर छह लेन सड़क को क्षेत्र की यातायात जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों पुराने पेड़ों के नुकसान को लेकर गंभीर चिंता है। अब पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों की मांग है कि शेष पेड़ों की कटाई से पहले परियोजना की समीक्षा कर उन्हें बचाने वाले सभी संभव विकल्पों पर विचार किया जाए।





