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नासिक। महाराष्ट्र में प्रस्तावित पुणे-नासिक सेमी-हाई-स्पीड रेलवे परियोजना को लेकर शनिवार को एक बार फिर विरोध तेज हो गया। नासिक-पुणे हाईवे स्थित हिवरगांव पावसा टोल प्लाजा पर हजारों किसानों, नागरिकों और सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने चक्का जाम आंदोलन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि प्रस्तावित पुणे-नासिक रेलवे रूट को संगमनेर से होकर गुजारा जाए। आंदोलन के कारण हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ और बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संगमनेर क्षेत्र को रेलवे परियोजना से जोड़ना स्थानीय किसानों, व्यापारियों और आम लोगों के हित में होगा। उनका आरोप है कि प्रस्तावित मार्ग को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में सरकार को स्थिति स्पष्ट करते हुए परियोजना पर जल्द काम शुरू करना चाहिए।
टोल प्लाजा पर जुटे हजारों प्रदर्शनकारी
Shirdi, Maharashtra: A Chakka Jam protest was held at Hivargaon Pavsa demanding that the Nashik-Pune railway line be routed through Sangamner. Thousands of protesters participated, urging the government to start work on the direct Nashik-Pune railway line at the earliest… pic.twitter.com/49606GHXeT
— IANS (@ians_india) August 9, 2026
शनिवार को हिवरगांव पावसा टोल प्लाजा के आसपास बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय नागरिक एकत्र हुए। किसानों के साथ सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने भी आंदोलन में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर उतरकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और सरकार से रेलवे रूट को संगमनेर से जोड़ने की मांग की।
चक्का जाम आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुणे और नासिक के बीच सीधी रेलवे कनेक्टिविटी क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। यदि परियोजना को जल्द आगे बढ़ाया जाता है तो दोनों प्रमुख शहरों के बीच आवागमन आसान होने के साथ-साथ रास्ते में आने वाले क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
संगमनेर से रूट की मांग
आंदोलन का प्रमुख मुद्दा प्रस्तावित रेलवे रूट को संगमनेर से होकर गुजारने का है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संगमनेर को इस परियोजना में पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए। स्थानीय लोगों के अनुसार रेलवे लाइन से क्षेत्र में परिवहन सुविधाओं का विस्तार होगा और व्यापार तथा रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
किसानों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि संगमनेर और आसपास के इलाकों के लोगों की लंबे समय से मांग रही है कि क्षेत्र को बेहतर रेल संपर्क से जोड़ा जाए। ऐसे में पुणे-नासिक रेलवे परियोजना उनके लिए महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है।
परियोजना में पिछले कुछ महीनों से रुकावट
प्रस्तावित पुणे-नासिक सेमी-हाई-स्पीड रेलवे परियोजना पिछले कुछ महीनों से विभिन्न कारणों से अड़चनों का सामना कर रही है। परियोजना को लेकर विरोध भी जारी है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि परियोजना को लेकर जो भी तकनीकी, प्रशासनिक या अन्य बाधाएं हैं, उन्हें जल्द दूर किया जाए। उन्होंने रेलवे लाइन का काम फिर से शुरू करने और परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की मांग की।
किसानों की भागीदारी से आंदोलन तेज
चक्का जाम आंदोलन में किसानों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। किसानों ने कहा कि रेलवे परियोजना केवल परिवहन से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध क्षेत्र के भविष्य से भी है। बेहतर रेल संपर्क से कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने, यात्रियों के आवागमन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, रेलवे परियोजनाओं में जमीन, मार्ग निर्धारण और अन्य प्रशासनिक पहलुओं को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चिंताएं भी सामने आती रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद कर समाधान निकालना चाहिए।
सीधे रेल संपर्क से विकास की उम्मीद
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक पुणे और नासिक महाराष्ट्र के महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र हैं। दोनों शहरों के बीच बेहतर रेल संपर्क से यात्रियों के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी फायदा होगा। सेमी-हाई-स्पीड रेलवे परियोजना से यात्रा का समय कम होने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
संगमनेर को मार्ग में शामिल करने की मांग कर रहे लोगों का कहना है कि इससे आसपास के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि रेलवे परियोजना को लेकर स्पष्ट निर्णय जल्द लिया जाए। उनका कहना है कि लंबे समय तक परियोजना में देरी होने से लोगों में निराशा बढ़ रही है। सरकार को संबंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधियों, किसानों और सामाजिक संगठनों से बातचीत कर रूट को लेकर समाधान निकालना चाहिए।
आंदोलनकारियों ने यह भी मांग की कि पुणे-नासिक सीधी रेलवे लाइन पर काम जल्द से जल्द दोबारा शुरू किया जाए। उनका कहना है कि परियोजना में देरी का असर क्षेत्र के विकास पर पड़ सकता है।
हाईवे पर यातायात हुआ प्रभावित
हजारों लोगों के चक्का जाम आंदोलन में शामिल होने के कारण नासिक-पुणे हाईवे पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। टोल प्लाजा के आसपास वाहनों की आवाजाही पर असर पड़ा और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना रहा।
स्थानीय स्तर पर आंदोलन को लेकर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की नजर बनी रही। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाते हुए सरकार से सकारात्मक कदम की उम्मीद जताई।
आंदोलन से बढ़ा दबाव
पुणे-नासिक रेलवे परियोजना को लेकर जारी विरोध के बीच शनिवार का चक्का जाम सरकार पर दबाव बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। हजारों किसानों और नागरिकों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि संगमनेर से रेलवे रूट गुजारने की मांग को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष व्यापक है।
अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं। प्रदर्शनकारियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और पुणे-नासिक सेमी-हाई-स्पीड रेलवे परियोजना को लेकर जल्द ठोस निर्णय लिया जाएगा। साथ ही संगमनेर को प्रस्तावित रूट में शामिल करने की मांग पर भी सकारात्मक पहल होगी।





