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हिंगोली। महाराष्ट्र के सेंगांव तालुका में किसानों ने बुधवार दोपहर अपनी विभिन्न समस्याओं और कृषि विभाग की कथित लापरवाही के खिलाफ अनोखा और जोखिम भरा विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचने के लिए किसानों ने तक्तोडा गांव में एक कुएं में उतरकर "जलसमाधि" आंदोलन किया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कृषि विभाग के कामकाज के साथ-साथ रोजगार गारंटी योजना के तहत काम करने वाले संविदा कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
किसानों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर शिकायतें और मांगें उठाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा। कुएं में उतरकर किए गए प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी मांगों और कृषि क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
तहसील कृषि अधिकारी का पद खाली होने का आरोप
प्रदर्शनकारी किसानों ने सेंगांव में कृषि विभाग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सेंगांव के तहसील कृषि अधिकारी का पद लंबे समय से खाली है। फिलहाल इस पद का काम एक प्रभारी अधिकारी के भरोसे चल रहा है। किसानों का कहना है कि पूर्णकालिक अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने के कारण कृषि विभाग से संबंधित काम प्रभावित हो रहे हैं और किसानों को समय पर मार्गदर्शन व सहायता नहीं मिल पा रही है।
किसानों के अनुसार, कृषि विभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती से सीधे जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग है। ऐसे में तहसील स्तर पर अधिकारी का पद खाली रहना किसानों के हित में नहीं है। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि खाली पद पर जल्द से जल्द नियमित अधिकारी की नियुक्ति की जाए, ताकि कृषि संबंधी योजनाओं और किसानों की शिकायतों का प्रभावी ढंग से निपटारा हो सके।
नकली खाद और कीटनाशक की बिक्री का आरोप
किसानों ने तालुका में नकली खाद और कीटनाशकों की कथित बिक्री को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कुछ कृषि दुकानों पर कथित तौर पर नकली सोयाबीन खाद बेची गई। किसानों के मुताबिक, इस खाद का इस्तेमाल करने के बाद कई जगह सोयाबीन के बीज ठीक से नहीं उगे।
प्रदर्शनकारी किसानों ने आरोप लगाया कि फसल का अंकुरण नहीं होने के कारण उन्हें दोबारा बुआई करनी पड़ी। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। पहले ही खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई जैसी लागत बढ़ने से किसान आर्थिक दबाव में रहते हैं। ऐसे में कथित रूप से खराब या नकली कृषि सामग्री के कारण दोबारा बुआई करना उनकी परेशानी और बढ़ा देता है।
किसानों ने मांग की कि कृषि विभाग को कृषि दुकानों की नियमित जांच करनी चाहिए और यदि किसी दुकान पर नकली या मानक के अनुरूप नहीं होने वाली खाद अथवा कीटनाशक की बिक्री पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
फसल खराब होने से बढ़ी परेशानी
किसानों के अनुसार, सोयाबीन की बुआई के बाद बीजों का अंकुरण नहीं होना गंभीर समस्या है। दोबारा बुआई के लिए किसानों को अतिरिक्त बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च करना पड़ा। इससे खेती की लागत बढ़ गई और किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा।
प्रदर्शनकारी किसानों ने प्रशासन से इस तरह की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि यदि कृषि सामग्री की गुणवत्ता को लेकर किसानों की शिकायतें सामने आती हैं तो संबंधित विभाग को नमूने लेकर उनकी जांच करानी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
रोजगार गारंटी योजना पर भी सवाल
किसानों ने कृषि विभाग के अलावा रोजगार गारंटी योजना के तहत काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि योजना से जुड़े कामकाज में भी किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं का पर्याप्त समाधान नहीं हो रहा है।
किसानों का कहना है कि रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके तहत मिलने वाला काम ग्रामीणों की आय का एक सहारा बनता है। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता का सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ सकता है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से योजना के तहत किए जा रहे कार्यों, कर्मचारियों की भूमिका और ग्रामीणों से जुड़ी शिकायतों की जांच कराने की मांग की।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
तक्तोडा गांव में हुए जलसमाधि प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन से उनकी मांगों पर तत्काल ध्यान देने की अपील की। किसानों का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना है। वे चाहते हैं कि कृषि विभाग में खाली पदों को भरा जाए, कृषि सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच हो और नकली खाद-कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
किसानों ने यह भी मांग की कि जिन किसानों को कथित रूप से खराब कृषि सामग्री के कारण दोबारा बुआई करनी पड़ी है, उनकी शिकायतों की जांच कर उन्हें उचित राहत दिलाई जाए।
जांच और कार्रवाई पर टिकी नजर
किसानों के प्रदर्शन के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है। यदि किसानों द्वारा लगाए गए नकली खाद और कीटनाशक बिक्री के आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए कृषि विभाग द्वारा कृषि दुकानों से खाद और कीटनाशकों के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच करना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल प्रदर्शन ने सेंगांव तालुका में किसानों से जुड़ी समस्याओं को प्रशासन के सामने प्रमुखता से ला दिया है। तहसील कृषि अधिकारी के पद के रिक्त होने, कथित नकली कृषि सामग्री की बिक्री और रोजगार गारंटी योजना से जुड़े कर्मचारियों की कार्यप्रणाली जैसे मुद्दों को लेकर किसान नाराज हैं। बुधवार को कुएं में उतरकर किया गया विरोध प्रदर्शन इसी नाराजगी का प्रतीक रहा।
अब किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच कराएगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। वहीं, कृषि विभाग और प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।





