महाराष्ट्र

NAFED प्याज़ खरीद प्रक्रिया पर किसानों की नाराज़गी, ग्रेडिंग और रिजेक्शन से बढ़ी परेशानी

Kavita2
11 Jun 2026 4:29 PM IST
NAFED प्याज़ खरीद प्रक्रिया पर किसानों की नाराज़गी, ग्रेडिंग और रिजेक्शन से बढ़ी परेशानी
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Maharashtra महाराष्ट्र: NAFED की प्याज़ खरीद प्रक्रिया को लेकर किसानों में असंतोष देखने को मिल रहा है। कई किसानों ने आरोप लगाया है कि ग्रेडिंग और रिजेक्शन के नियमों के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान और भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज़ को भी बड़ी मात्रा में रिजेक्ट किया जा रहा है, जिससे उन्हें बिना बिक्री के माल वापस अपने खर्च पर ले जाना पड़ रहा है।

सोमवार (8 जून) को चांदवड़ तालुका के एक किसान लासलगांव कृषि उपज बाजार समिति के सब-मार्केट यार्ड में NAFED खरीद केंद्र पर प्याज़ लेकर पहुंचे थे। यहां CWC के कर्मचारियों द्वारा प्याज़ की ग्रेडिंग की गई, जिसमें माल को ‘A’ और ‘B’ श्रेणी में विभाजित किया गया। हालांकि, स्टॉक का एक बड़ा हिस्सा रिजेक्ट कर दिया गया।

किसान के अनुसार, लगभग 30 क्विंटल प्याज़ में से 8 क्विंटल 10 किलोग्राम प्याज़ को रिजेक्ट कर दिया गया। उनका आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया बेहद समय लेने वाली रही और सुबह से शाम तक इसमें पूरा दिन लग गया। इसके बाद उन्हें रिजेक्ट किया गया प्याज़ वापस अपने गांव ले जाना पड़ा, जिससे अतिरिक्त परिवहन खर्च और परेशानी बढ़ गई।

किसानों का कहना है कि ग्रेडिंग के नियम कई बार पारदर्शी नहीं होते, जिससे उन्हें समझ नहीं आता कि किस आधार पर प्याज़ को रिजेक्ट किया जा रहा है। उनका यह भी आरोप है कि इससे उनकी फसल की सही कीमत नहीं मिल पा रही है और मेहनत बेकार जा रही है।

इस स्थिति को लेकर क्षेत्र के अन्य किसानों ने भी चिंता जताई है और मांग की है कि NAFED की खरीद प्रक्रिया में सुधार किया जाए। किसानों का कहना है कि यदि इसी तरह बड़े पैमाने पर रिजेक्शन होता रहा, तो उन्हें अपनी उपज बेचने में और अधिक कठिनाई होगी।

किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि ग्रेडिंग प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए और किसानों को स्पष्ट कारणों के साथ ही रिजेक्शन की जानकारी दी जाए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि खरीद केंद्रों पर प्रक्रिया को तेज और सरल बनाया जाए ताकि किसानों का समय और पैसा दोनों बच सके।

स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बन गया है और किसान लगातार इस प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं।

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