महाराष्ट्र

फेक CEO साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा मुंबई क्राइम ब्रांच ने दो आरोपियों को पकड़ा

Kavita2
20 Aug 2026 11:20 AM IST
फेक CEO साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा मुंबई क्राइम ब्रांच ने दो आरोपियों को पकड़ा
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मुंबई। मुंबई क्राइम ब्रांच की साउथ साइबर पुलिस ने ‘फेक CEO/बॉस’ साइबर फ्रॉड रैकेट के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक एयरटेल सिम कार्ड का पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंट भी शामिल है। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के कम से कम सात मामलों में शामिल रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान बिहार के सिवान जिले के रुकुंदीपुर निवासी आमिर चांद मोहम्मद खान (22) और झारखंड के धनबाद जिले के कुमारधुबी निवासी सूरज कुमार प्रदीप कुमार साव उर्फ विशाल के रूप में हुई है। आमिर चांद एयरटेल सिम डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर काम करता था, जबकि सूरज कुमार भी इस साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

मुंबई पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह फर्जी CEO या कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी बनकर लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी पहले पीड़ितों से संपर्क करते थे और खुद को कंपनी का डायरेक्टर, बॉस या वरिष्ठ अधिकारी बताकर विश्वास हासिल करते थे। इसके बाद किसी जरूरी भुगतान या कंपनी से जुड़े काम के नाम पर बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया जाता था।

पुलिस के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 26 फरवरी 2026 को हुई थी। उस दिन मुंबई के एक 43 वर्षीय व्यक्ति को एक अनजान नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज मिला। आरोपी ने खुद को कंपनी डायरेक्टर बताया और बातचीत के दौरान पीड़ित का भरोसा जीत लिया।

इसके बाद आरोपी ने पीड़ित को एक झांसे में लेकर 48,60,511 रुपये ट्रांसफर करने के लिए मना लिया। पीड़ित को जब तक ठगी का एहसास हुआ, तब तक बड़ी रकम साइबर अपराधियों के खातों में पहुंच चुकी थी।

शिकायत मिलने के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच की साउथ साइबर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

जांच के दौरान पुलिस ने डिजिटल ट्रेल, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और सिम कार्ड से जुड़ी जानकारी जुटाई। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की जांच में सामने आया कि एयरटेल सिम डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में काम करने वाला आरोपी आमिर चांद इस नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने कितने सिम कार्ड उपलब्ध कराए और क्या इनका इस्तेमाल अन्य साइबर अपराधों में भी किया गया।

मुंबई पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज सात अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इन मामलों की जानकारी संबंधित राज्यों की एजेंसियों से जुटा रही है।

इस मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता तब मिली जब वह ठगी की पूरी रकम 48.60 लाख रुपये को होल्ड कराने में कामयाब रही। इससे पीड़ित को आर्थिक नुकसान से बचाने में मदद मिली।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, फेक CEO या बॉस फ्रॉड इन दिनों तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों में शामिल है। इसमें अपराधी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारियों या व्यापारिक साझेदारों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।

ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर व्हाट्सऐप, ईमेल या फोन कॉल के जरिए संपर्क करते हैं। वे तत्काल भुगतान, गोपनीय प्रोजेक्ट या जरूरी लेनदेन का बहाना बनाकर पीड़ितों पर दबाव डालते हैं।

मुंबई पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें। अगर कोई व्यक्ति खुद को कंपनी अधिकारी बताकर अचानक भुगतान करने को कहता है तो पहले उसकी पहचान की पुष्टि जरूर करें।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। डिजिटल जांच तकनीक और बैंकिंग नेटवर्क की मदद से ऐसे अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

फिलहाल मुंबई क्राइम ब्रांच गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और मामलों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

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