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सैनिकों के सम्मान में ‘एक बंधन रक्षाबंधन’ पहल, राइडर्स ने देशभक्ति का दिया संदेश

मुंबई। भारतीय सैनिकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘एक बंधन, रक्षाबंधन’ पहल एक बार फिर चर्चा में है। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने डोंबिवली निवासी रोहित अचरेकर और उनके साथी राइडर्स की इस मुहिम को समर्थन दिया है। करीब दो दशक से चल रहे इस अभियान का उद्देश्य देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ समाज में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुंचाना है।
रोहित अचरेकर के नेतृत्व वाले ‘वे टू कॉज़ राइडर्स क्लब’ ने इस अभियान की शुरुआत की थी। पिछले करीब 20 वर्षों से क्लब से जुड़े राइडर्स अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते आ रहे हैं। समय के साथ इस अभियान से अधिक लोग जुड़ते गए और अब यह डोंबिवली में एक खास सामाजिक और देशभक्ति से जुड़ी पहल के रूप में पहचान बना चुका है।
इस बार अभियान का समापन डोंबिवली के प्रसिद्ध दही-हांडी समारोह में राइडर्स की भागीदारी के साथ हुआ। जन्माष्टमी और दही-हांडी के उत्सवी माहौल के बीच राइडर्स ने सैनिकों के प्रति सम्मान का संदेश लोगों तक पहुंचाया। धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन के साथ देशभक्ति का संदेश जोड़ने के कारण कार्यक्रम ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
20 वर्षों से जारी है अभियान
रोहित अचरेकर और उनके ‘वे टू कॉज़ राइडर्स क्लब’ की यह पहल नई नहीं है। इसे करीब दो दशक पहले शुरू किया गया था। अभियान के पीछे विचार यह था कि रक्षाबंधन के पर्व को केवल पारिवारिक रिश्तों तक सीमित न रखते हुए उन सैनिकों के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया जाए, जो सीमाओं पर तैनात रहकर देश की सुरक्षा करते हैं।
रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच सुरक्षा और विश्वास के रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना को सैनिकों से जोड़कर ‘एक बंधन, रक्षाबंधन’ अभियान आगे बढ़ाया गया। राइडर्स ने अपनी यात्राओं और कार्यक्रमों के जरिए लोगों को इस पहल से जोड़ने का प्रयास किया।
अभियान के माध्यम से सैनिकों के त्याग और सेवा को याद करने के साथ युवाओं के बीच देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का संदेश भी दिया जा रहा है।
रवींद्र चव्हाण ने दिया समर्थन
हाल के वर्षों में महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण भी इस अभियान से जुड़े हैं। उन्होंने ‘डोंबिवलीकर एक सांस्कृतिक परिवार’ के माध्यम से पहल को अपना समर्थन दिया है।
चव्हाण के समर्थन के बाद इस अभियान को स्थानीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिली है। सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ सैनिकों के सम्मान को जोड़ने वाली इस मुहिम में विभिन्न वर्गों के लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
इस पहल के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि देश की सुरक्षा में लगे जवानों के प्रति सम्मान किसी एक अवसर तक सीमित नहीं होना चाहिए। समाज को उनके योगदान और बलिदान को लगातार याद रखना चाहिए।
बाइक राइड के जरिए देशभक्ति का संदेश
बाइक राइडिंग क्लब सामान्य तौर पर यात्रा और रोमांच से जुड़े होते हैं, लेकिन ‘वे टू कॉज़ राइडर्स क्लब’ ने बाइक राइडिंग को सामाजिक उद्देश्य से जोड़ने की कोशिश की है। क्लब के सदस्य अलग-अलग अभियानों में शामिल होकर लोगों के बीच सामाजिक संदेश पहुंचाते रहे हैं।
‘एक बंधन, रक्षाबंधन’ अभियान इसी सोच का हिस्सा है। राइडर्स अपनी यात्रा के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर सैनिकों के प्रति आभार और सम्मान का संदेश देते हैं।
युवाओं में बाइक राइडिंग की लोकप्रियता को देखते हुए इस माध्यम से देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
दही-हांडी समारोह में हुआ समापन
इस बार अभियान का समापन डोंबिवली के मशहूर दही-हांडी समारोह में हुआ। शहर में जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित दही-हांडी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इसी उत्सवी माहौल के बीच राइडर्स ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
महाराष्ट्र में दही-हांडी केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि बड़े सांस्कृतिक उत्सव के रूप में भी मनाई जाती है। विभिन्न गोविंदा पथक मानव पिरामिड बनाकर हंडी फोड़ने का प्रयास करते हैं और हजारों लोग इन आयोजनों को देखने पहुंचते हैं।
ऐसे बड़े सार्वजनिक मंच पर सैनिकों के सम्मान से जुड़े अभियान का समापन होने से इसका संदेश बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा।
सैनिकों के प्रति आभार है अभियान का उद्देश्य
‘एक बंधन, रक्षाबंधन’ पहल का मूल उद्देश्य भारतीय सैनिकों के प्रति आभार जताना है। देश की सीमाओं पर तैनात जवान कई बार त्योहारों के दौरान भी अपने परिवारों से दूर रहते हैं। अभियान के आयोजकों का प्रयास इसी त्याग और जिम्मेदारी के प्रति समाज का ध्यान आकर्षित करना है।
रक्षाबंधन जैसे पर्व के माध्यम से सैनिकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की कोशिश इस पहल की प्रमुख विशेषता है। अभियान यह संदेश देता है कि देश की रक्षा में तैनात सैनिक पूरे समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं और नागरिकों को भी उनके योगदान का सम्मान करना चाहिए।
युवाओं को जोड़ने की कोशिश
राइडर्स क्लब के अभियान में युवाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। बाइक राइडिंग में रुचि रखने वाले युवाओं को सामाजिक उद्देश्य से जोड़कर देशभक्ति का संदेश फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।
ऐसी गतिविधियां युवाओं को सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़ने का एक अलग मंच उपलब्ध कराती हैं। राइडर्स के जरिए संदेश शहर से बाहर भी पहुंच सकता है और अलग-अलग क्षेत्रों के लोग अभियान से परिचित हो सकते हैं।
करीब 20 साल से अभियान का जारी रहना इसके निरंतर स्वरूप को दर्शाता है। रोहित अचरेकर और उनके साथियों ने इसे समय के साथ आगे बढ़ाया, जबकि हाल के वर्षों में रवींद्र चव्हाण के समर्थन ने इसे और विस्तार दिया है।
डोंबिवली के दही-हांडी समारोह में अभियान के समापन के साथ एक बार फिर सैनिकों के प्रति सम्मान का संदेश दिया गया। उत्सव और देशभक्ति को एक मंच पर लाने वाली इस पहल ने लोगों से देश की सुरक्षा में लगे जवानों के योगदान को याद रखने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का आह्वान किया।





