महाराष्ट्र

पाषाण झील में इकोलॉजिकल आपदा: हज़ारों मछलियों की मौत के मामले में NHAI पर गंभीर आरोप

Kavita2
19 April 2026 4:34 PM IST
पाषाण झील में इकोलॉजिकल आपदा: हज़ारों मछलियों की मौत के मामले में NHAI पर गंभीर आरोप
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Maharashtra महाराष्ट्र: पुणे की पाषाण झील में हाल ही में हुई इकोलॉजिकल आपदा, जिसमें हज़ारों मछलियों की मौत हो गई थी, की जांच अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए दस्तावेज़ों में इस घटना के पीछे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) की भूमिका पर सवाल उठे हैं।

पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (PMC) के रिकॉर्ड के अनुसार, बावधन सर्विस रोड पर चल रहे खुदाई कार्य के दौरान NHAI की गतिविधियों से एक महत्वपूर्ण सीवरेज पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। यह पाइपलाइन PMC द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के बाद झील के संरक्षण और प्रदूषण रोकने के उद्देश्य से बिछाई गई थी।

पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने के बाद उसकी मरम्मत नहीं की गई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इसके परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज और स्टॉर्मवॉटर ड्रेन सिस्टम में बहने लगा। यह प्रदूषित पानी अंततः पाषाण झील और उससे जुड़े नदी तंत्र तक पहुंच गया, जिससे जल गुणवत्ता तेजी से खराब हुई और बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत हो गई।

PMC के कोथरुड–बावधन क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि खुदाई के दौरान सीवर लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी और इसके कारण सर्विस रोड पर सीवेज का जमाव होने लगा था। इस स्थिति को लंबे समय तक नियंत्रित नहीं किया गया, जिससे पर्यावरणीय नुकसान बढ़ता गया।

स्थानीय पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि झील में अचानक ऑक्सीजन स्तर गिरने और जहरीले तत्वों के बढ़ने के कारण जलीय जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। हज़ारों मछलियों की मौत ने स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। वहीं, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण संगठनों ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज कर दी है।

दूसरी ओर, इस घटना ने प्रशासनिक समन्वय और निर्माण कार्यों के दौरान पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के पालन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाइपलाइन क्षति के बाद समय पर मरम्मत और सीवेज नियंत्रण की कार्रवाई की जाती, तो इस तरह की बड़ी आपदा को रोका जा सकता था।

फिलहाल, मामले की जांच जारी है और संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा जा रहा है। यह घटना शहरी विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती को एक बार फिर उजागर करती है।

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