महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखे जैसे हालात घोषित, पुणे के 8 तालुका भी शामिल

Kavita2
26 Sept 2026 2:00 PM IST
महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखे जैसे हालात घोषित, पुणे के 8 तालुका भी शामिल
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पुणे। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 तालुकों में से 265 में सूखे जैसे हालात घोषित किए हैं। इस सूची में पुणे जिले के आठ तालुका भी शामिल किए गए हैं। लंबे समय तक बारिश नहीं होने और कम वर्षा के कारण खरीफ की फसलों पर पड़े असर को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। पुणे जिले के भोर, वेल्हे, खेड़, शिरूर, बारामती, इंदापुर, दौंड और पुरंदर तालुका इस सूची में शामिल हैं।

राज्य सरकार ने सूखा प्रबंधन व्यवस्था के तहत ‘ट्रिगर-1’ लागू करने के बाद यह फैसला लिया है। इसके तहत बारिश की स्थिति और कृषि पर उसके प्रभाव सहित निर्धारित मानकों के आधार पर सूखे जैसी परिस्थितियों वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है। राज्य के कुल 358 तालुकों में से 265 को इस दायरे में रखा गया है।

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में लंबे समय तक बारिश नहीं होने और अपेक्षा से कम वर्षा के कारण खरीफ की फसलों पर असर पड़ा है। किसानों के लिए खरीफ सीजन में पर्याप्त और समय पर बारिश महत्वपूर्ण होती है। बारिश में लंबा अंतर आने के कारण खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान होने की स्थिति बनी और कई क्षेत्रों में कृषि गतिविधियां प्रभावित हुईं।

पुणे के आठ तालुका सूची में शामिल

पुणे जिले में भोर, वेल्हे, खेड़, शिरूर, बारामती, इंदापुर, दौंड और पुरंदर को सूखे जैसी परिस्थितियों वाले तालुकों की सूची में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में बारिश की स्थिति और खरीफ फसलों पर पड़े प्रभाव को देखते हुए सरकार की ओर से यह निर्णय लिया गया है।

पुणे जिले के अलग-अलग हिस्सों में कृषि का स्वरूप भी अलग है। ऐसे में बारिश की कमी का प्रभाव क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग फसलों और कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है। खरीफ के दौरान बारिश में कमी या लंबे समय तक बारिश नहीं होने से फसलों की वृद्धि प्रभावित होती है।

सरकार के फैसले के बाद अब इन आठ तालुकों में सूखे जैसी स्थिति को लेकर आगे की प्रक्रिया निर्धारित सूखा प्रबंधन ढांचे के अनुसार की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से लागू ‘ट्रिगर-1’ इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

कम बारिश से खरीफ फसलों पर असर

मानसून के दौरान लंबे समय तक बारिश नहीं होना किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गया। खरीफ फसलों की बुवाई और उसके बाद पौधों के विकास के लिए नियमित अंतराल पर बारिश जरूरी होती है। जिन क्षेत्रों में बारिश कम हुई या लंबे समय तक बारिश नहीं हुई, वहां फसलों पर इसका प्रतिकूल असर देखने को मिला।

महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के दौरान बड़ी संख्या में किसान मानसूनी बारिश पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में बारिश की मात्रा और उसका वितरण दोनों महत्वपूर्ण होते हैं। केवल कुल बारिश ही नहीं बल्कि फसल के अलग-अलग चरणों में समय पर बारिश होना भी जरूरी होता है।

लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने से मिट्टी में नमी कम होने लगती है। इसका सीधा असर खेतों में खड़ी फसलों पर पड़ता है। इसी तरह अपेक्षा से कम बारिश होने की स्थिति में भी सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने वाले क्षेत्रों में किसानों की परेशानी बढ़ सकती है।

‘ट्रिगर-1’ के बाद सरकार का फैसला

राज्य सरकार ने सूखा प्रबंधन फ्रेमवर्क के तहत ‘ट्रिगर-1’ लागू किया है। इसके बाद 265 तालुकों में सूखे जैसी परिस्थितियों की पहचान की गई। सूखा प्रबंधन की प्रक्रिया में अलग-अलग संकेतकों और परिस्थितियों के आधार पर क्षेत्रों की स्थिति का आकलन किया जाता है।

‘ट्रिगर-1’ लागू होना सूखे की स्थिति के आकलन की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके जरिए उन क्षेत्रों की पहचान की जाती है जहां बारिश और उससे संबंधित परिस्थितियों के कारण कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका या स्थिति सामने आती है।

सरकार की ओर से राज्य के अधिकांश तालुकों को इस सूची में शामिल किया जाना मौजूदा स्थिति की व्यापकता को दर्शाता है। 358 में से 265 तालुका इस दायरे में आए हैं। इनमें पुणे जिले के भी आठ तालुका शामिल हैं।

किसानों की स्थिति पर रहेगी नजर

सूखे जैसी परिस्थितियों की घोषणा के बाद संबंधित क्षेत्रों में कृषि और जल उपलब्धता की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। खरीफ फसलों को हुए नुकसान और आगे की परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर स्थिति की निगरानी की जाएगी।

पुणे जिले के जिन आठ तालुकों को सूची में रखा गया है, वहां खेती से जुड़े लोगों के लिए बारिश की कमी प्रमुख चिंता बनी हुई है। भोर, वेल्हे, खेड़, शिरूर, बारामती, इंदापुर, दौंड और पुरंदर में अब सूखा प्रबंधन फ्रेमवर्क के तहत स्थिति का आकलन आगे बढ़ेगा।

बारिश की कमी का असर केवल मौजूदा फसलों तक सीमित नहीं रहता। जल स्रोतों की स्थिति, मिट्टी में नमी और आगे की कृषि गतिविधियों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि सरकार सूखा प्रबंधन व्यवस्था के तहत विभिन्न चरणों में परिस्थितियों का आकलन करती है।

महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के बाद राज्य के 265 तालुका सूखे जैसी परिस्थितियों वाले क्षेत्रों की सूची में आ गए हैं। पुणे जिले के आठ तालुका भी इसमें शामिल हैं। लंबे समय तक बारिश नहीं होने और कम वर्षा से खरीफ फसलों पर पड़े असर के बीच सरकार ने ‘ट्रिगर-1’ लागू कर इन क्षेत्रों की पहचान की है।

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