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डोभाल बोले- राष्ट्र सुरक्षा सबसे अहम, तिलक के विचार आज भी प्रासंगिक

Kavita2
1 Aug 2026 4:38 PM IST
डोभाल बोले- राष्ट्र सुरक्षा सबसे अहम, तिलक के विचार आज भी प्रासंगिक
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पुणे: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने शनिवार को पुणे में ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार’ ग्रहण करते हुए कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की सोच और उनके विचार आज भी भारत के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता आंदोलन के समय थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा हमेशा देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों पुरस्कार प्राप्त करने के बाद अजीत डोभाल ने कहा कि वह इस सम्मान को पाकर बेहद सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने लोकमान्य तिलक की 106वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।

तिलक के साहस और राष्ट्रभावना को किया याद

अजीत डोभाल ने अपने संबोधन में कहा कि लोकमान्य तिलक ने उस दौर में भारतीयों में आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाई, जब ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाना बेहद कठिन था।

उन्होंने कहा कि तिलक ने लोगों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का साहस दिया। उस समय बहुत कम लोग ऐसे थे, जो ब्रिटिश शासन के सामने खुलकर अपनी बात रखने का साहस कर पाते थे।

डोभाल ने कहा कि तिलक का जीवन देश सेवा, साहस और दृढ़ संकल्प का उदाहरण है। उनके विचार आज भी देश के नागरिकों को प्रेरणा देते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा को बताया सर्वोच्च महत्व

पुरस्कार समारोह के दौरान अजीत डोभाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास और प्रगति के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

उन्होंने कहा कि देश तभी तेजी से आगे बढ़ सकता है, जब उसकी सीमाएं सुरक्षित हों और आंतरिक व्यवस्था मजबूत हो। राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक पहलू भी शामिल होते हैं।

डोभाल ने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में भारत के सामने नई तरह की सुरक्षा चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे समय में देश को सतर्क और तैयार रहना जरूरी है।

सम्मान मिलने पर जताया आभार

अजीत डोभाल ने पुरस्कार मिलने पर आयोजकों और लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकमान्य तिलक के नाम से जुड़े सम्मान को प्राप्त करना उनके लिए गर्व और जिम्मेदारी दोनों का विषय है।

उन्होंने कहा कि तिलक जैसे महान नेताओं ने देश के लिए जो योगदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करता रहेगा।

डोभाल ने कहा कि यह पुरस्कार केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों के प्रति सम्मान है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया है।

तिलक की विरासत और आज का भारत

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्हें ‘लोकमान्य’ की उपाधि जनता के समर्थन और सम्मान के कारण मिली थी।

उन्होंने स्वराज को भारतीयों का अधिकार बताया और स्वतंत्रता आंदोलन को जन-आंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके विचारों ने देश में राजनीतिक जागरूकता पैदा करने में बड़ी भूमिका निभाई।

डोभाल ने कहा कि आज का भारत जिस आत्मविश्वास के साथ दुनिया में आगे बढ़ रहा है, उसमें ऐसे महान नेताओं की सोच और संघर्ष की महत्वपूर्ण भूमिका है।

सुरक्षा और विकास का संबंध

NSA ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति के लिए सुरक्षा और स्थिरता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित माहौल में ही आर्थिक विकास, विज्ञान, तकनीक और सामाजिक प्रगति संभव होती है।

उन्होंने बदलती वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा।

डोभाल ने कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सभी को जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ काम करना चाहिए।

पुरस्कार समारोह में जुटे कई गणमान्य लोग

पुणे में आयोजित इस समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अजीत डोभाल के लंबे सार्वजनिक सेवा कार्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की गई।

अमित शाह ने भी डोभाल को भारत के आधुनिक राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के प्रमुख निर्माताओं में से एक बताया और कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा, विदेश नीति और रणनीतिक फैसलों में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

राष्ट्र सेवा के संकल्प पर जोर

अजीत डोभाल ने अपने संबोधन में कहा कि देश की सेवा और सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोकमान्य तिलक के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना ही सच्ची देशभक्ति है।

उन्होंने कहा कि भारत को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार प्रयास करते रहना होगा। लोकमान्य तिलक की सोच और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेते हुए देश को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।

‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार’ समारोह में डोभाल का संबोधन देश की सुरक्षा, राष्ट्र निर्माण और तिलक के विचारों की प्रासंगिकता पर केंद्रित रहा।

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