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ठाणे। डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों के साथ कथित मारपीट के मामले के बाद दो डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। इनमें महिला डॉक्टर सृष्टि बाविस्कर और डॉक्टर वैभव सालुंखे शामिल हैं। दोनों डॉक्टरों ने अस्पताल में काम करने के दौरान डर और असुरक्षा का माहौल होने का हवाला दिया है। वैभव सालुंखे ने इस्तीफा देने के बाद शहर भी छोड़ दिया है। डॉक्टर वैभव सालुंखे ने कहा कि उन्होंने डर के माहौल के कारण इस्तीफा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग लगातार उन पर नजर रख रहे हैं और वह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अब दोबारा अस्पताल नहीं लौटना चाहते। उनका कहना है कि भले ही अन्य डॉक्टर वहां काम करते रहें, लेकिन वह इस माहौल में काम नहीं कर सकते।
मामला डोंबिवली स्थित कल्याण-डोंबिवली नगर निगम के शास्त्री नगर अस्पताल का है। आरोप है कि शिवसेना पार्षद राकेश म्हात्रे ने अस्पताल में डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की। इस घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ गई और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। जानकारी के अनुसार, यह घटना 6 जुलाई को हुई थी। अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक, मामला उस समय शुरू हुआ जब दो डॉक्टरों ने एक नवजात शिशु के परिजनों को बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी। डॉक्टरों ने बताया था कि अस्पताल की नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में जगह उपलब्ध नहीं थी और नवजात को बेहतर देखभाल की जरूरत थी।
डॉक्टरों की सलाह के बाद बच्चे के परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान कथित तौर पर पार्षद के अस्पताल पहुंचने और डॉक्टरों के साथ विवाद होने की बात सामने आई। आरोप है कि इस दौरान एक डॉक्टर के साथ मारपीट की गई। घटना के बाद डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। डॉक्टर वैभव सालुंखे ने कहा कि काम करने के लिए सुरक्षित माहौल जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद से डर बना हुआ है और ऐसे हालात में मरीजों की सेवा करना मुश्किल हो रहा है।
वहीं, महिला डॉक्टर सृष्टि बाविस्कर ने भी इस्तीफा देकर अपना विरोध जताया है। उनके इस्तीफे के बाद अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा और कर्मचारियों के सम्मान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस मामले में अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों के साथ इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, ताकि वे बिना किसी दबाव के मरीजों की सेवा कर सकें। इस घटना के बाद चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। फिलहाल इस मामले में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें हैं। डॉक्टरों के इस्तीफे के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है और अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।





