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महाराष्ट्र
दही हांडी के घायल मरीज के बिल पर विवाद पालघर अस्पताल में मचा हंगामा
Ratna Netam
6 Sept 2026 6:51 PM IST

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पालघर (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित एक निजी अस्पताल में बिल को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि कथित तौर पर डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि कुछ शिवसेना पदाधिकारी और उनके समर्थक अस्पताल पहुंचे और बिल को लेकर बहस के बाद डॉक्टरों व कर्मचारियों के साथ हाथापाई की। मामले में पुलिस ने 17 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य कर्मियों में नाराजगी है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज और मौके पर मौजूद लोगों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं अस्पताल प्रशासन ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य कर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
बिल को लेकर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, पालघर स्थित रिलीफ हॉस्पिटल में एक मरीज के इलाज और बिल भुगतान को लेकर विवाद शुरू हुआ। मरीज के परिजनों और अस्पताल प्रबंधन के बीच पहले बातचीत हुई, लेकिन मामला धीरे-धीरे गर्म हो गया।
आरोप है कि इसके बाद कुछ लोग अस्पताल पहुंचे और बिल को लेकर डॉक्टरों व स्टाफ से सवाल-जवाब करने लगे। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई।
अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि इसी दौरान कुछ लोगों ने डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ मारपीट की।
डॉक्टरों और स्टाफ से मारपीट का आरोप
अस्पताल की ओर से दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हमलावरों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया।
बताया जा रहा है कि इस घटना से अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों और उनके परिजनों में भी डर का माहौल बन गया। कुछ देर के लिए अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित हुई।
स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि इलाज से जुड़े मामलों में बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
घटना की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना के दौरान कौन-कौन लोग मौजूद थे और किसकी क्या भूमिका थी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल में सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इस घटना के बाद अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। अगर किसी मामले में विवाद होता है तो उसके लिए कानूनी और प्रशासनिक रास्ते मौजूद हैं, लेकिन अस्पताल में हिंसा करना गंभीर अपराध है।
स्वास्थ्य संगठनों में नाराजगी
घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों में नाराजगी देखी जा रही है। डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उनका कहना है कि अगर अस्पतालों में काम करने वाले लोगों को सुरक्षा नहीं मिलेगी तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।
राजनीतिक संगठन से जुड़े लोगों पर आरोप
इस मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनके शिवसेना से जुड़े होने का आरोप लगाया गया है। हालांकि पुलिस जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों पर इस तरह के आरोप लगने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई किसी संगठन या पद के आधार पर नहीं, बल्कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर रही है। फुटेज के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना के समय कौन लोग मौजूद थे और क्या हुआ था।
इसके अलावा अस्पताल कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
मरीजों की परेशानी बढ़ी
अस्पताल में हुए हंगामे के कारण कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल कर्मचारियों को प्रभावित करती हैं, बल्कि इलाज कराने आए मरीजों के लिए भी असुविधा पैदा करती हैं।
पुलिस जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। बिल विवाद से शुरू हुआ यह मामला अब मारपीट और कानून व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि घटना में किसकी कितनी भूमिका थी और किन लोगों के खिलाफ आगे कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि स्वास्थ्य संस्थानों में विवादों को हिंसा के बजाय बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए सुलझाने की जरूरत है।
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