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मुंबई। IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत को लेकर विरोध लगातार जारी है। बुधवार को मुंबई यूथ कांग्रेस और वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) की यूथ विंग के सदस्यों ने IIT बॉम्बे परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपने माथे पर काली पट्टियां बांधकर साहिल के लिए न्याय की मांग की और मामले में नामजद प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला की तत्काल गिरफ्तारी की मांग उठाई।प्रदर्शनकारी संगठनों ने IIT बॉम्बे प्रशासन पर मामले को लेकर पक्षपात और पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरतने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने पिछले कुछ महीनों के दौरान संस्थान में छात्रों की मौत की घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। युवा संगठनों का कहना था कि जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के जरिए निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। ये प्रदर्शनकारी संगठनों के आरोप और मांगें हैं, जिन पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
काली पट्टियां बांधकर जताया विरोध
मुंबई यूथ कांग्रेस और VBA यूथ विंग के कार्यकर्ता प्रदर्शन के दौरान काली पट्टियां बांधे नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य साहिल वाकोडे के परिवार को न्याय दिलाने के साथ कैंपस में छात्रों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और शिकायत निवारण व्यवस्था से जुड़े सवालों को उठाना है।प्रदर्शन में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मामले में दर्ज FIR के आधार पर आगे की कार्रवाई की मांग की। साहिल के परिवार ने भी प्रोफेसर की गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपों की सत्यता न्यायिक प्रक्रिया में तय होनी है।
यूथ कांग्रेस ने प्रशासन पर लगाए आरोप
प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में यूथ कांग्रेस के एक प्रतिनिधि ने IIT बॉम्बे प्रशासन के शुरुआती रवैये की आलोचना की। प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि पहले शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था।दरअसल, साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे के बाहर और परिसर में अलग-अलग छात्र और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किए थे। 21 सितंबर को IIT बॉम्बे के पवई परिसर के बाहर प्रदर्शन के दौरान विभिन्न संगठनों से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की तस्वीरें और रिपोर्ट सामने आई थीं।प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि संस्थान को छात्रों की शिकायतों और उनके कल्याण से जुड़े मामलों में ज्यादा संवेदनशील और पारदर्शी व्यवस्था बनानी चाहिए।
क्या है साहिल वाकोडे मामला?
20 वर्षीय साहिल वाकोडे IIT बॉम्बे में बीटेक द्वितीय वर्ष का छात्र था। 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान कथित तौर पर उसके पास मोबाइल फोन मिलने और AI टूल ChatGPT के इस्तेमाल का मामला सामने आया था। प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला उस परीक्षा में निरीक्षक थे। बाद में उसी दिन साहिल अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया।घटना के बाद साहिल के परिवार ने जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए। पुलिस ने प्रोफेसर डुल्ला समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। ये आरोप अभी जांच के अधीन हैं और आरोपियों की जिम्मेदारी या दोष न्यायिक प्रक्रिया से तय होगा।मामले को लेकर कैंपस में छात्रों का विरोध शुरू हो गया और संस्थान से जवाबदेही तथा स्वतंत्र जांच की मांग उठाई गई।
प्रोफेसर को डीन पद से हटाया गया
लगातार विरोध के बीच IIT बॉम्बे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला को डीन के प्रशासनिक पद से हटा दिया था। हालांकि वह संस्थान में फैकल्टी सदस्य बने रहे। प्रदर्शनकारी छात्रों के एक वर्ग ने इसे पर्याप्त कार्रवाई नहीं माना और मामले की निष्पक्ष जांच तक आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की।IIT बॉम्बे ने साहिल की मौत के बाद जारी अपने शुरुआती संचार को लेकर बाद में माफी भी मांगी थी। संस्थान ने कहा था कि घटना से पहले की परिस्थितियां जांच के अधीन हैं और ऐसे में शुरुआती बयान जारी करना उचित नहीं था।
छात्रों ने रखी थीं 18 मांगें
साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे के छात्रों ने प्रशासन के सामने 18 मांगों का एक चार्टर रखा। इसमें घटना की स्वतंत्र जांच के अलावा छात्र कल्याण, शिकायत निवारण व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने जैसी मांगें शामिल थीं। छात्रों ने कैंपस में 24 घंटे मनोचिकित्सक की उपलब्धता की मांग भी की।लगातार तीन दिनों तक चले विरोध के बाद IIT बॉम्बे प्रशासन ने छात्रों की मांगों के चार्टर पर सहमति जताई थी। निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा भी की।
फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर का किया बचाव
इस मामले में IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम का पक्ष प्रदर्शनकारी छात्रों और राजनीतिक संगठनों से अलग रहा है। फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर डुल्ला का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षकों को परीक्षा में संस्थान के नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी निभानी होती है। फोरम ने साथ ही निष्पक्ष जांच की बात कही है।छात्र समुदाय के भीतर भी प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की सीमा को लेकर अलग-अलग विचार सामने आए हैं। छात्र प्रतिनिधियों के एक बयान में कहा गया था कि प्रोफेसर को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अस्थायी रूप से अलग रखने की मांग का उद्देश्य उन्हें जांच से पहले दोषी ठहराना नहीं है और उन्हें निष्पक्ष जांच का अधिकार है।
क्राइम ब्रांच कर रही मामले की जांच
साहिल वाकोडे की मौत से जुड़े मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है। साहिल के माता-पिता ने मामले में नामजद लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। परिवार की ओर से लगाए गए भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप भी जांच के दायरे में हैं।बुधवार के प्रदर्शन में यूथ कांग्रेस और VBA यूथ विंग ने मांग की कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जाए और कैंपस में छात्रों की मौत की हालिया घटनाओं से जुड़े व्यापक सवालों की भी स्वतंत्र समीक्षा हो।इस बीच IIT बॉम्बे में साहिल वाकोडे की मौत के बाद छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, शिकायत निवारण व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है। प्रदर्शनकारी संगठन तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि फैकल्टी के एक वर्ग ने जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की बात कही है। अब मामले में क्राइम ब्रांच की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।
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