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विदेशों में बढ़ी भारतीय डेयरी उत्पादों की मांग, चार महीने में 38,916 मीट्रिक टन एक्सपोर्ट

Kavita2
24 Sept 2026 3:13 PM IST
विदेशों में बढ़ी भारतीय डेयरी उत्पादों की मांग, चार महीने में 38,916 मीट्रिक टन एक्सपोर्ट
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नासिक। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कृषि और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी कड़ी में डेयरी उत्पादों का निर्यात भी भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहा है। एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच 38,916 मीट्रिक टन डेयरी प्रोडक्ट्स का निर्यात किया। इस चार महीने की अवधि में देश को करीब 1,391 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई।

भारत लंबे समय से दुनिया के प्रमुख दूध उत्पादक देशों में शामिल है। देश में दूध उत्पादन का बड़ा आधार होने के कारण घरेलू खपत के साथ-साथ डेयरी से जुड़े वैल्यू-एडेड उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। घी, मक्खन, पनीर, दूध, क्रीम और प्रोसेस्ड चीज जैसे उत्पाद अब भारतीय डेयरी सेक्टर के निर्यात बास्केट में महत्वपूर्ण स्थान बना रहे हैं।

चार महीने में 38,916 मीट्रिक टन डेयरी एक्सपोर्ट

APEDA के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान भारत ने कुल 38,916 मीट्रिक टन डेयरी उत्पाद विदेशी बाजारों में भेजे। इससे 1,391 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा कमाई हुई। यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है, जब भारतीय कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर तलाशने पर जोर दिया जा रहा है।

डेयरी उत्पादों के निर्यात में केवल सामान्य दूध या दुग्ध उत्पाद ही शामिल नहीं हैं, बल्कि कई तरह के प्रोसेस्ड और वैल्यू-एडेड उत्पाद भी बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं। इससे डेयरी क्षेत्र में किसानों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों के लिए संभावनाएं बढ़ रही हैं।

वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पादों का महत्व इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि इन उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने, अलग-अलग बाजारों की जरूरत के मुताबिक पैक करने और दूर के देशों तक पहुंचाने की सुविधा अपेक्षाकृत बेहतर होती है। घी और प्रोसेस्ड चीज जैसे उत्पादों की विदेशों में मांग भारतीय कंपनियों और डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों के लिए नए बाजार खोल रही है।

2024-25 में 247.87 मिलियन टन दूध उत्पादन

भारत का डेयरी क्षेत्र देश की कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्ष 2024-25 में भारत ने 247.87 मिलियन टन दूध का उत्पादन किया। देश में बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से डेयरी गतिविधियों से जुड़े हैं।

दूध उत्पादन का इतना बड़ा आधार भारत को घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी मजबूत स्थिति प्रदान करता है। हालांकि कच्चे दूध के बजाय उससे तैयार किए जाने वाले वैल्यू-एडेड उत्पादों का निर्यात अधिक आर्थिक मूल्य पैदा कर सकता है। यही वजह है कि घी, मक्खन, पनीर, क्रीम और प्रोसेस्ड चीज जैसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ और अंतरराष्ट्रीय खाद्य मानकों का पालन निर्यात कारोबार में अहम भूमिका निभाता है। भारतीय निर्यातकों के लिए अलग-अलग देशों की खाद्य सुरक्षा और आयात संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना भी जरूरी होता है।

UAE और सऊदी अरब प्रमुख बाजार

APEDA के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब भारतीय डेयरी उत्पादों के प्रमुख बाजार रहे। इनके बाद अमेरिका, भूटान और बहरीन का स्थान रहा।

खाड़ी देशों में भारतीय डेयरी उत्पादों की मांग का एक प्रमुख कारण वहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों की मौजूदगी भी है। भारतीय भोजन और पारंपरिक खाद्य उत्पादों के प्रति मांग के कारण घी जैसे उत्पादों का बाजार मजबूत बना हुआ है।

खास तौर पर भारतीय घी की खाड़ी देशों में मांग का उल्लेख किया जा रहा है। भारतीय व्यंजनों, मिठाइयों और पारंपरिक भोजन में घी के इस्तेमाल के कारण विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के बीच इसकी खपत बनी रहती है। इसके अलावा स्थानीय बाजार में भी भारतीय घी की पहचान एक पारंपरिक और प्रीमियम डेयरी उत्पाद के तौर पर बनी हुई है।

वैल्यू-एडेड उत्पादों पर बढ़ा जोर

डेयरी क्षेत्र में अब केवल दूध उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। दूध से अलग-अलग उत्पाद तैयार कर उन्हें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने से अधिक मूल्य हासिल किया जा सकता है। इसी वजह से वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पादों का महत्व बढ़ रहा है।

घी, मक्खन और पनीर के अलावा प्रोसेस्ड चीज, दूध और क्रीम जैसे उत्पाद भी निर्यात बाजार में पहुंच बना रहे हैं। इन उत्पादों की मांग बढ़ने से डेयरी प्रसंस्करण उद्योग को विस्तार मिलने की संभावना है।

निर्यात में बढ़ोतरी का लाभ दूध उत्पादक किसानों तक पहुंचाने के लिए मजबूत सप्लाई चेन, बेहतर संग्रहण व्यवस्था, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण क्षमता और गुणवत्ता नियंत्रण महत्वपूर्ण होंगे। इससे किसानों को उनके उत्पाद के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है।

भारतीय डेयरी सेक्टर के लिए बढ़ते अवसर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग देश के डेयरी सेक्टर के लिए नए अवसर लेकर आ रही है। अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान 38,916 मीट्रिक टन डेयरी उत्पादों का निर्यात और 1,391 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा आय इस क्षेत्र की निर्यात क्षमता को दर्शाती है।

आने वाले समय में भारतीय डेयरी उत्पादों के लिए खाड़ी देशों के साथ-साथ अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अवसर महत्वपूर्ण रह सकते हैं। हालांकि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता, कीमत, पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन जरूरी होगा।

भारत के पास बड़ा दूध उत्पादन आधार मौजूद है। ऐसे में दूध से तैयार होने वाले वैल्यू-एडेड उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की क्षमता डेयरी उद्योग के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। घी, मक्खन, पनीर और प्रोसेस्ड चीज जैसे उत्पादों की मांग बढ़ने से भारतीय डेयरी कारोबार के लिए निर्यात का दायरा और विस्तृत होने की संभावना है।

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