महाराष्ट्र

दीपके बोले बदहाल स्कूलों की सूची तैयार कर ली

Ratna Netam
15 Aug 2026 4:13 PM IST
दीपके बोले बदहाल स्कूलों की सूची तैयार कर ली
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हिंगोली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक अभिजीत दीपके ने शनिवार को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थित अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी से स्कूल ठीक करो अभियान की शुरुआत की। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गांव पहुंचे दीपके ने पहले ध्वजारोहण समारोह में हिस्सा लिया और इसके बाद जिला परिषद के एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण किया। उन्होंने स्कूल में पानी, शौचालय, खिड़कियों और विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए।
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति का सबसे ज्यादा असर गरीब, किसान और मजदूर परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के 80 साल बाद भी यदि सरकारी स्कूलों में पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तो विकास के दावों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने निरीक्षण के दौरान दावा किया कि स्कूल के शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं थी और विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच भी मौजूद नहीं थीं।
दीपके के मुताबिक स्कूल में कई खिड़कियां टूटी हुई थीं। उन्होंने दावा किया कि टूटी खिड़कियों को एक बैनर की मदद से ढका गया था, जिस पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का चित्र लगा हुआ था। दीपके ने कहा कि स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, जबकि उनके बैठने के लिए केवल चार बेंच उपलब्ध हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि निजी स्कूलों में बच्चों को जरूरी सुविधाएं दी जा सकती हैं तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इनसे वंचित क्यों रखा जा रहा है।
सीजेपी संयोजक ने कहा कि अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं का विवरण दर्ज करने के लिए एक सूची तैयार की गई है। इसमें स्कूल में पानी, शौचालय, बेंच, खिड़की, सड़क और दूसरी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता दर्ज की जाएगी। सीजेपी की टीमें महाराष्ट्र के साथ देश के अन्य हिस्सों में स्थित सरकारी स्कूलों से भी आंकड़े जुटाने का प्रयास करेंगी। इसके बाद इन आंकड़ों का संकलन कर संबंधित अधिकारियों और सरकारों से जवाब मांगा जाएगा।
दीपके ने बताया कि अभियान के अगले चरण में वह महाराष्ट्र के अलग-अलग तालुकों के सरकारी स्कूलों का दौरा करेंगे। उन्होंने अभिभावकों से भी अपने बच्चों के स्कूल जाकर वहां उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण करने की अपील की। साथ ही गांवों के सरपंचों से स्कूलों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी उठाने का आग्रह किया। अभियान का घोषित उद्देश्य ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के साथ जवाबदेही तय करना है।
दीपके ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने शिक्षा के बजट में कटौती की है और निजी संस्थानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों के दौरान देश में 94 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। हालांकि इस आंकड़े के संदर्भ और अवधि की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश को मजबूत बनाने के लिए स्कूल बंद करने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक विद्यालय खोलने और मौजूदा स्कूलों की व्यवस्था सुधारने की आवश्यकता है।
उन्होंने निजी स्कूलों की फीस सीमित करने की भी मांग की। दीपके के अनुसार कई निजी स्कूलों में अभिभावकों से एक से डेढ़ लाख रुपये तक फीस ली जा रही है, जिसे गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवार वहन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए। स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क, पीने का पानी, स्वच्छ शौचालय, पर्याप्त शिक्षक और बैठने की उचित व्यवस्था सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
सीजेपी ने सरकारी अस्पतालों में कथित रूप से खराब स्वास्थ्य सुविधाओं के खिलाफ भी ऐसा ही अभियान शुरू करने की घोषणा की है। दीपके ने कहा कि देश की राजनीतिक दिशा केवल शहरों में रहने वाले लोग तय नहीं करेंगे, बल्कि गांवों के युवाओं को भी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने नई संसद और नए प्रधानमंत्री आवास का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि गांवों में नए स्कूल बनाने और पुराने स्कूलों की मरम्मत को समान प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।
कॉकरोच जनता पार्टी को सोशल मीडिया से शुरू हुआ एक सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन बताया जाता है। इससे पहले संगठन ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर भी प्रदर्शन किया था। अब स्कूल ठीक करो अभियान के माध्यम से संगठन सरकारी शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है।
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