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एशियाटिक सोसाइटी के चुनाव का रास्ता साफ, बॉम्बे HC ने दखल से जुड़ी याचिकाएं खारिज कीं

Mumbai मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई स्थित ऐतिहासिक संस्था एशियाटिक सोसाइटी में नए चुनाव कराने का रास्ता साफ कर दिया है। यह संस्था देश की सबसे पुरानी सार्वजनिक शोध और पुस्तकालय संस्थाओं में से एक मानी जाती है, जिसकी स्थापना वर्ष 1804 में हुई थी। अदालत के इस फैसले के बाद संस्था में लंबे समय से चल रही प्रशासनिक प्रक्रिया और चुनाव से जुड़ा विवाद अब आगे बढ़ सकेगा।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने चैरिटी कमिश्नर के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में संस्था के प्रशासन और चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप को लेकर आपत्ति जताई गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल चैरिटी कमिश्नर के निर्देशों में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया गया।
इस याचिका में वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राज्यसभा सांसद कुमार केतकर सहित अन्य लोग शामिल थे। उन्होंने एशियाटिक सोसाइटी के प्रशासनिक संचालन और चुनाव प्रक्रिया में चैरिटी कमिश्नर की भूमिका को चुनौती दी थी। हालांकि अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिकाओं को खारिज कर दिया।
इस फैसले के साथ ही एशियाटिक सोसाइटी में नए चुनाव कराने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। लंबे समय से संस्था के भीतर प्रशासनिक नियंत्रण और चुनाव प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की संभावना मजबूत हो गई है।
जस्टिस फरहान दुबाश की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि संस्था के संचालन में पारदर्शिता और नियमों का पालन आवश्यक है। अदालत ने यह भी माना कि चैरिटी कमिश्नर की भूमिका को कानून के दायरे में रहकर देखा जाना चाहिए।
एशियाटिक सोसाइटी, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संस्था है, लंबे समय से अपने प्रशासनिक ढांचे को लेकर चर्चा में रही है। इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि संस्था में जल्द ही नए चुनाव कराए जाएंगे और प्रशासनिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी।
इस निर्णय को संस्था से जुड़े लोगों और प्रशासनिक मामलों पर नजर रखने वालों द्वारा एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि चुनाव प्रक्रिया कब शुरू होती है और संस्था का नया नेतृत्व किस तरह आगे बढ़ता है।





