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मराठवाड़ा में जल संकट का खतरा गांव-वार माइक्रो प्लानिंग के निर्देश

छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में इस साल औसत से कम बारिश के कारण संभावित जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रशासन को अभी से तैयारी तेज करने के निर्देश दिए हैं। महाराष्ट्र की जन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, जलापूर्ति एवं स्वच्छता तथा ऊर्जा राज्य मंत्री मेघना सकोरे-बोर्दिकर ने अधिकारियों से उपलब्ध जल संसाधनों की गांव-वार माइक्रो प्लानिंग करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले महीनों में किसी भी गांव या बस्ती में पीने के पानी की गंभीर समस्या पैदा होने का इंतजार करने के बजाय पहले से आवश्यक उपाय किए जाएं।
सकोरे-बोर्दिकर ने सोमवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मराठवाड़ा डिवीजन की मौजूदा जल स्थिति का जायजा लिया। बैठक में क्षेत्र में हुई बारिश, बांधों और अन्य जल स्रोतों में उपलब्ध पानी, संभावित जल संकट और विभिन्न पेयजल योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपलब्ध पानी का योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए ताकि गर्मी के मौसम में लोगों को पेयजल की परेशानी का सामना न करना पड़े।
हर गांव के लिए अलग जल प्रबंधन योजना
बैठक में मंत्री ने गांव-वार माइक्रो प्लानिंग पर विशेष जोर दिया। इसके तहत प्रत्येक गांव में उपलब्ध कुएं, बोरवेल, जलाशय और अन्य जल स्रोतों की स्थिति का आकलन करने को कहा गया है। साथ ही यह पता लगाने के निर्देश दिए गए कि वर्तमान जल भंडारण कितने समय तक स्थानीय आबादी की जरूरतों को पूरा कर सकता है।
अधिकारियों से कहा गया कि ऐसे गांवों और इलाकों की पहले से पहचान की जाए, जहां आने वाले महीनों में पानी की कमी होने की आशंका अधिक है। इसके आधार पर वैकल्पिक जल स्रोतों और जरूरत पड़ने पर टैंकर जैसी व्यवस्थाओं की तैयारी की जा सकेगी।
मंत्री ने कहा कि पानी की उपलब्धता और मांग का आकलन जमीनी स्तर पर होना चाहिए। केवल जिले या तालुका स्तर के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय प्रत्येक गांव की वास्तविक स्थिति के अनुसार योजना तैयार की जानी चाहिए।
नियमित पेयजल आपूर्ति पर जोर
सकोरे-बोर्दिकर ने अधिकारियों को नागरिकों तक नियमित और बिना रुकावट के पीने का पानी पहुंचाने के लिए अग्रिम उपाय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां जलापूर्ति योजनाएं संचालित हैं, वहां उनकी नियमित निगरानी की जाए और किसी तकनीकी खराबी के कारण आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में उसे जल्द ठीक किया जाए।
बैठक में रुकी हुई और अधूरी जलापूर्ति योजनाओं का मुद्दा भी उठा। मंत्री ने अधिकारियों से ऐसी योजनाओं की अलग-अलग समीक्षा कर काम में तेजी लाने को कहा। जिन परियोजनाओं में प्रशासनिक, तकनीकी या अन्य स्तर पर बाधा है, उसे दूर करने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
कम बारिश के कारण बढ़ी चिंता
मराठवाड़ा महाराष्ट्र के उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां वर्षा में कमी होने पर जल संकट का खतरा बढ़ जाता है। खेती के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था भी मानसून और जलाशयों में जमा पानी पर काफी हद तक निर्भर रहती है। इस साल औसत से कम बारिश को देखते हुए प्रशासन आने वाले महीनों की स्थिति का आकलन कर रहा है।
समीक्षा के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध जल भंडारण की जानकारी ली गई। मंत्री ने अधिकारियों से जलाशयों में मौजूद पानी और संभावित मांग का तुलनात्मक आकलन करने को कहा। इससे यह तय किया जा सकेगा कि किस इलाके में मौजूदा जल स्रोत पर्याप्त हैं और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त व्यवस्था करने की जरूरत पड़ सकती है।
जलापूर्ति योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश
बैठक में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण सहित जलापूर्ति से जुड़े विभागों की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। सकोरे-बोर्दिकर ने कहा कि जिन परियोजनाओं का काम लंबे समय से लंबित है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा करने और तय समय सीमा में कार्य पूरा करने पर जोर दिया। इसका उद्देश्य यह है कि जिन गांवों के लिए नई जलापूर्ति परियोजनाएं बनाई गई हैं, वहां लोगों को जल्द उनका लाभ मिल सके।
इसके अलावा पहले से संचालित योजनाओं की क्षमता और उनकी मौजूदा स्थिति का आकलन करने को भी कहा गया। यदि किसी योजना की क्षमता स्थानीय आबादी की मौजूदा जरूरतों के मुकाबले कम है तो उसके लिए वैकल्पिक उपाय तलाशने के निर्देश दिए गए।
पानी के स्रोतों की नियमित निगरानी
मंत्री ने स्थानीय प्रशासन को जल स्रोतों की नियमित निगरानी करने को कहा। खास तौर पर उन इलाकों पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं, जहां गर्मी के दौरान हर साल पानी की समस्या सामने आती है। ऐसे क्षेत्रों के लिए पहले से कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
गांवों में मौजूद सार्वजनिक कुओं और अन्य स्रोतों की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उपलब्ध जल संसाधनों का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर पेयजल के लिए किया जाए और किसी क्षेत्र में स्थिति बिगड़ने से पहले आवश्यक कदम उठा लिए जाएं।
अधिकारियों के साथ की विस्तृत समीक्षा
बैठक में अतिरिक्त कलेक्टर संभाजी अडकुने, रेजिडेंट डिप्टी कलेक्टर जनार्दन विधाते, अतिरिक्त डिवीजनल कमिश्नर (राजस्व) रीता मैत्रेवाड और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की मुख्य इंजीनियर मनीषा पालंडे समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने मंत्री को क्षेत्र में हुई बारिश, मौजूदा जल भंडारण और विभिन्न पेयजल योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। इसके बाद संभावित जल संकट वाले क्षेत्रों को लेकर आवश्यक कदमों पर चर्चा की गई।
गर्मी से पहले तैयारी पूरी करने पर फोकस
सरकार की कोशिश है कि गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले संभावित जल संकट वाले इलाकों की पहचान और वहां वैकल्पिक व्यवस्था की योजना तैयार कर ली जाए। गांव-वार माइक्रो प्लानिंग इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
इसके जरिए प्रशासन के पास यह जानकारी उपलब्ध रहेगी कि किस गांव में कितना पानी मौजूद है, वहां की दैनिक जरूरत कितनी है और मौजूदा स्रोत कितने समय तक पानी उपलब्ध करा सकते हैं। जरूरत के मुताबिक नए स्रोत, मौजूदा योजनाओं की मरम्मत या दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था पर फैसला लिया जा सकेगा।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पेयजल से संबंधित समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई की जाए और विभागों के बीच बेहतर समन्वय रखा जाए। कम बारिश को देखते हुए प्रशासन के सामने आने वाले महीनों में उपलब्ध पानी का प्रभावी प्रबंधन बड़ी चुनौती होगी। इसी कारण सरकार ने अभी से गांव स्तर पर तैयारी शुरू करने और लंबित जलापूर्ति योजनाओं को गति देने पर जोर दिया है।





