महाराष्ट्र

Dahisar नदी रिवाइटलाइज़ेशन प्रोजेक्ट पर फिर विवाद, तीसरी बार हुआ उद्घाटन

Kavita2
11 May 2026 9:52 AM IST
Dahisar नदी रिवाइटलाइज़ेशन प्रोजेक्ट पर फिर विवाद, तीसरी बार हुआ उद्घाटन
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Maharashtra महाराष्ट्र: मुंबई की 4.75 किलोमीटर लंबी दहिसर नदी के रिजुविनेशन, रिवाइटलाइज़ेशन और ब्यूटीफिकेशन प्रोजेक्ट का रविवार को एक बार फिर उद्घाटन किया गया। यह इस परियोजना का तीसरा उद्घाटन बताया जा रहा है। उद्घाटन लोकसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने किया। हालांकि, इस मौके पर एक बार फिर परियोजना की प्रगति और जमीनी स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

रिवर एक्टिविस्ट्स का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से केवल उद्घाटन और घोषणाएं हो रही हैं, जबकि असल में नदी की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। एक्टिविस्ट और मुंबई रिवर मार्च के संस्थापक गोपाल झावेरी, जो स्थानीय निवासी भी हैं, ने कहा कि दहिसर नदी की हालत बेहद खराब है और यह अब भी गंदे पानी और कचरे से भरा नाला बनी हुई है।

गोपाल झावेरी ने बताया कि इस परियोजना की शुरुआत सबसे पहले वर्ष 2016-17 में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा की गई थी। इसके बाद वर्ष 2021-22 में तत्कालीन पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने भी इसका उद्घाटन किया था। लेकिन उनके अनुसार, लगभग 10 वर्षों के बाद भी न तो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पूरी तरह से काम कर रहा है और न ही नदी में गंदे पानी और गोबर का बहाव रुक पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और परियोजना केवल कागजों और कार्यक्रमों तक सीमित रह गई है।

झावेरी का कहना है कि नदी अभी भी “गोबर और कचरे से भरा नाला” बनी हुई है, जिसमें सुधार के दावे सिर्फ औपचारिकता लगते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वास्तव में काम हुआ होता तो नदी की स्थिति अब तक बदल चुकी होती।

वहीं दूसरी ओर, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने परियोजना की प्रगति का बचाव किया है। रविवार के उद्घाटन कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय कॉरपोरेटर, वार्ड कमेटी के चेयरमैन और स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य प्रकाश दारकेकर ने कहा कि इस बार परियोजना के फेज-1 का उद्घाटन रुस्तमजी क्षेत्र के पास किया गया है। उन्होंने दावा किया कि STP के संचालन को भी देखा गया है और कुछ काम जमीन पर चल रहा है।

हालांकि, दारकेकर ने यह भी स्वीकार किया कि अभी और प्रयासों की जरूरत है ताकि परियोजना अपने पूरे लक्ष्य तक पहुंच सके। उनके अनुसार, काम शुरू हो चुका है लेकिन इसे पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए और सुधार की आवश्यकता है।

इस बीच, लगातार हो रहे उद्घाटन और धीमी प्रगति को लेकर स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ता दिख रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतने वर्षों और कई उद्घाटनों के बावजूद दहिसर नदी की स्थिति में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं हो पाया।

यह मामला एक बार फिर मुंबई की नदियों की सफाई और शहरी पर्यावरण परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर बहस को सामने लाता है।

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