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बारिश की कमी से सूख रही फसलें किसानों ने उठाई क्लाउड सीडिंग की मांग

बीड: जिले में लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बारिश की कमी का सीधा असर खेतों में खड़ी सोयाबीन और कपास की फसलों पर दिखाई देने लगा है। बिगड़ते हालात के बीच 'शेतकरी हक मोर्चा' ने सरकार और जिला प्रशासन से किसानों की फसलों को बचाने के लिए तत्काल क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश का ऑपरेशन शुरू करने की मांग की है।
किसान और एक्टिविस्ट राजेंद्र आमटे ने इस संबंध में जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल सूखने लगी है। यदि जल्द पानी नहीं मिला तो कपास की फसल को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार को समय रहते प्रभावी कदम उठाना चाहिए।
राजेंद्र आमटे ने कहा, "बारिश न होने की वजह से किसानों की सोयाबीन की फसलें सूख रही हैं। कपास की फसल पूरी तरह बर्बाद होने से पहले सरकार और प्रशासन को तुरंत क्लाउड सीडिंग का प्रयोग करना चाहिए। इससे किसानों को बचाने में मदद मिलेगी, वरना वे भारी संकट में पड़ जाएंगे।"
शेतकरी हक मोर्चा का कहना है कि मौजूदा समय किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। खेतों में फसल खड़ी है और उसके विकास के लिए पर्याप्त नमी की आवश्यकता है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर मिट्टी की नमी तेजी से कम होती है, जिससे फसल की वृद्धि प्रभावित होने लगती है। संगठन ने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
सोयाबीन और कपास क्षेत्र की प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल हैं। बड़ी संख्या में किसानों की सालभर की आमदनी इन फसलों के उत्पादन पर निर्भर करती है। किसानों ने बीज, खाद, कीटनाशक और खेत की तैयारी पर पहले ही काफी पैसा खर्च किया है। अब बारिश की कमी से फसल खराब होने की स्थिति में उनकी पूरी लागत पर संकट खड़ा हो सकता है।
किसानों का कहना है कि बुआई के बाद फसल तैयार करने के लिए समय-समय पर बारिश जरूरी होती है। मानसून के दौरान लंबा अंतराल आने से फसलें पानी के तनाव का सामना करती हैं। सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं रखने वाले किसानों के लिए स्थिति और कठिन हो जाती है। ऐसे किसान मुख्य रूप से बारिश के पानी पर निर्भर रहते हैं।
इसी परिस्थिति को देखते हुए शेतकरी हक मोर्चा ने क्लाउड सीडिंग को संभावित विकल्प के रूप में अपनाने की मांग की है। क्लाउड सीडिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें उपयुक्त बादलों की मौजूदगी में वैज्ञानिक तरीके से बारिश की संभावना बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। हालांकि इसकी सफलता मौसम और बादलों की अनुकूल परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
संगठन का कहना है कि सरकार और प्रशासन को तकनीकी विशेषज्ञों से सलाह लेकर तत्काल यह पता लगाना चाहिए कि जिले में क्लाउड सीडिंग की परिस्थितियां अनुकूल हैं या नहीं। यदि मौसम इसके लिए उपयुक्त है तो किसानों की फसलों को बचाने के उद्देश्य से ऑपरेशन शुरू किया जाना चाहिए।
किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता कपास और सोयाबीन की फसलों को बचाने की है। खेतों में फसल लगाने के बाद किसान पहले ही आर्थिक निवेश कर चुके हैं। ऐसे में उत्पादन घटने या पूरी फसल बर्बाद होने से उन पर कर्ज और दूसरे आर्थिक दायित्वों का दबाव बढ़ सकता है।
शेतकरी हक मोर्चा ने प्रशासन से केवल कृत्रिम बारिश की मांग ही नहीं उठाई बल्कि किसानों की मौजूदा स्थिति का गंभीरता से आकलन करने की जरूरत भी बताई है। संगठन चाहता है कि कृषि विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें और फसलों की वास्तविक स्थिति का जायजा लें।
यदि फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान होने की आशंका बनती है तो सरकार को वैकल्पिक उपायों पर भी विचार करना पड़ सकता है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं वहां पानी की व्यवस्था बेहतर करने और किसानों को तकनीकी सलाह देने जैसे कदम भी राहत प्रदान कर सकते हैं।
किसानों के मुताबिक बारिश में लंबे अंतराल का असर केवल मौजूदा उत्पादन पर नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फसल उत्पादन कम होने से किसानों की आय प्रभावित होती है और इसका असर कृषि से जुड़े कारोबार, मजदूरी और स्थानीय बाजारों पर भी दिखाई देता है।
राजेंद्र आमटे ने चेताया कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो किसान भारी संकट में पड़ सकते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि स्थिति गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय फसल बचाने के उपाय अभी से शुरू किए जाएं। किसानों की प्राथमिक मांग है कि क्लाउड सीडिंग की संभावना का तत्काल तकनीकी परीक्षण कराया जाए।
कृत्रिम बारिश को लेकर फैसला करने से पहले मौसम संबंधी परिस्थितियों का आकलन आवश्यक होता है। इसके लिए ऐसे बादलों की मौजूदगी जरूरी होती है जिनमें पर्याप्त नमी हो। इसलिए किसानों की मांग पर आगे बढ़ने की स्थिति में मौसम विशेषज्ञों और संबंधित तकनीकी एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
जिले में बारिश की कमी के कारण किसानों की निगाहें अब आसमान के साथ-साथ सरकार और प्रशासन पर भी टिकी हैं। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में प्राकृतिक रूप से अच्छी बारिश होगी, लेकिन लगातार सूखे जैसे हालात को देखते हुए वे वैकल्पिक उपायों की मांग कर रहे हैं।
शेतकरी हक मोर्चा का कहना है कि कृषि क्षेत्र में संकट गहराने से पहले सरकार को सक्रिय होना चाहिए। फसलों की वर्तमान स्थिति का सर्वेक्षण कर उन क्षेत्रों की पहचान की जानी चाहिए जहां पानी की कमी का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। इसके आधार पर राहत और फसल संरक्षण के उपाय तय किए जा सकते हैं।
फिलहाल जिला कलेक्टर कार्यालय को ज्ञापन सौंपकर किसानों ने अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचा दी है। अब प्रशासन की ओर से क्लाउड सीडिंग की मांग पर क्या फैसला लिया जाता है, इस पर किसानों की नजर बनी हुई है। बारिश नहीं होने से सूख रही सोयाबीन और संकट में आई कपास की फसल को देखते हुए किसानों ने स्पष्ट किया है कि समय पर कदम उठाना बेहद जरूरी है, क्योंकि देरी होने पर फसलों को हुए नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो सकता है।





