महाराष्ट्र

आरे मेट्रो कॉम्प्लेक्स के बिजली डक्ट में मिला मगरमच्छ, रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया

Kavita2
23 Sept 2026 4:16 PM IST
आरे मेट्रो कॉम्प्लेक्स के बिजली डक्ट में मिला मगरमच्छ, रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया
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मुंबई। मुंबई के आरे इलाके में बुधवार, 23 सितंबर 2026 की सुबह उस समय हलचल मच गई, जब आरे मेट्रो कॉम्प्लेक्स के अंदर एक बिजली के डक्ट में मगरमच्छ दिखाई दिया। करीब 3 फीट 7 इंच लंबे युवा भारतीय मार्श मगरमच्छ को देखने के बाद इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों और वन्यजीव बचाव दल को दी गई। इसके बाद मगरमच्छ को सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर डक्ट से बाहर निकाला गया।

मगरमच्छ बिजली से जुड़े डक्ट के अंदर मौजूद था। ऐसी जगह पर वन्यजीव के मिलने से उसके साथ-साथ वहां मौजूद कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता थी। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे बचाव दल ने स्थिति का जायजा लिया और मगरमच्छ को बिना नुकसान पहुंचाए बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की।

भारतीय मार्श मगरमच्छ को आमतौर पर 'मगर' या 'मगरमच्छ' कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Crocodylus palustris है। यह भारत में पाए जाने वाले प्रमुख मगरमच्छों में से एक है। यह प्रजाति आमतौर पर झीलों, तालाबों, नदियों, जलाशयों और दलदली क्षेत्रों में पाई जाती है।

बिजली के डक्ट में छिपा था मगरमच्छ

आरे मेट्रो कॉम्प्लेक्स में मगरमच्छ का मिलना कर्मचारियों के लिए अप्रत्याशित घटना थी। सुबह परिसर के भीतर बिजली के डक्ट में हलचल दिखाई देने के बाद जांच की गई तो अंदर मगरमच्छ मौजूद मिला। करीब 3 फीट 7 इंच लंबाई होने के कारण यह एक युवा मगरमच्छ बताया गया।

बिजली के डक्ट जैसी संकरी जगह से मगरमच्छ को निकालना आसान नहीं था। बचाव दल को इस बात का ध्यान रखना था कि रेस्क्यू के दौरान न तो मगरमच्छ घायल हो और न ही आसपास मौजूद लोगों को कोई खतरा हो। ऐसे रेस्क्यू में प्रशिक्षित कर्मचारियों को वन्यजीव के व्यवहार और उसके अचानक प्रतिक्रिया देने की संभावना को ध्यान में रखकर काम करना पड़ता है।

सावधानी से चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन

मगरमच्छ की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया गया। इसके बाद बचाव दल ने उसे डक्ट से बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। संकरी जगह होने के कारण पूरी प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरती गई।

युवा मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने के बाद बाहर निकाला गया। घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है। मगरमच्छ के रेस्क्यू के बाद उसकी स्थिति की जांच की गई, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे किसी तरह की चोट तो नहीं लगी है।

वन्यजीवों के रेस्क्यू के मामलों में आमतौर पर स्वास्थ्य परीक्षण के बाद संबंधित वन विभाग के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाती है। वन्यजीव को उसके अनुकूल प्राकृतिक आवास में छोड़ने का फैसला भी सक्षम वन अधिकारियों की निगरानी में किया जाता है।

आरे क्षेत्र में मौजूद हैं प्राकृतिक जलस्रोत

मुंबई का आरे क्षेत्र बड़े हरित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इसके आसपास प्राकृतिक वनस्पति, छोटे जलस्रोत और वन्यजीवों के आवास मौजूद हैं। यह इलाका संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र से भी जुड़ा हुआ है।

मानसून के दौरान जलस्रोतों का स्तर बढ़ने और छोटे नालों में पानी का प्रवाह तेज होने पर कई बार जलीय या अर्ध-जलीय जीव अपने सामान्य क्षेत्र से बाहर निकल सकते हैं। मगरमच्छ भी पानी के रास्ते या आसपास के नम क्षेत्रों से गुजरते हुए मानव गतिविधि वाले स्थानों तक पहुंच सकते हैं। हालांकि इस मगरमच्छ के मेट्रो परिसर के बिजली डक्ट तक पहुंचने का सटीक रास्ता तत्काल स्पष्ट नहीं हुआ।

भारतीय मार्श मगरमच्छ की खासियत

भारतीय मार्श मगरमच्छ मीठे पानी में रहने वाली मगरमच्छ प्रजाति है। यह भारत के अलावा दक्षिण एशिया के कुछ अन्य हिस्सों में भी पाया जाता है। इसका शरीर चौड़ा और मजबूत होता है तथा यह पानी और जमीन दोनों जगह रह सकता है।

युवा मगरमच्छ अक्सर छोटे जलीय जीवों, मछलियों, मेंढकों और दूसरे छोटे जीवों को अपना भोजन बनाते हैं। आकार बढ़ने के साथ इनके भोजन का दायरा भी बढ़ सकता है। मगरमच्छ सामान्य तौर पर पानी के आसपास रहना पसंद करते हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर जमीन पर भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक जा सकते हैं।

भारत में मगरमच्छ वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित जीव हैं। ऐसे में किसी मगरमच्छ के मानव आबादी या किसी संस्थान के परिसर में पहुंचने पर उसे पकड़ने, नुकसान पहुंचाने या दूसरी जगह ले जाने का काम प्रशिक्षित वन्यजीव विशेषज्ञों और संबंधित विभाग की निगरानी में किया जाना चाहिए।

वन्यजीव दिखने पर दूरी बनाए रखना जरूरी

विशेषज्ञ लगातार सलाह देते हैं कि मगरमच्छ या किसी अन्य जंगली जीव के दिखाई देने पर लोग उसके करीब जाने, उसे पकड़ने या भगाने की कोशिश न करें। ऐसी कोशिश से वन्यजीव आक्रामक प्रतिक्रिया दे सकता है और व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है।

ऐसी स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाकर वन विभाग, पुलिस या अधिकृत वन्यजीव बचाव दल को सूचना देना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। घटनास्थल के आसपास भीड़ जमा होने से भी बचना चाहिए, क्योंकि शोर और हलचल से जानवर तनाव में आ सकता है।

सुरक्षित रेस्क्यू से टला खतरा

आरे मेट्रो कॉम्प्लेक्स में मिले करीब 3 फीट 7 इंच लंबे युवा भारतीय मार्श मगरमच्छ का समय रहते पता चलने और रेस्क्यू किए जाने से संभावित खतरा टल गया। बिजली के डक्ट जैसी जगह पर लंबे समय तक फंसे रहने से मगरमच्छ के लिए भी खतरा पैदा हो सकता था।

घटना एक बार फिर मुंबई जैसे महानगर में शहरी विकास और आसपास मौजूद प्राकृतिक वन्यजीव आवासों के बीच संपर्क को सामने लाती है। खासकर मानसून के दौरान वन्यजीवों के असामान्य स्थानों पर दिखाई देने की स्थिति में सतर्कता और प्रशिक्षित बचाव दल की मदद महत्वपूर्ण होती है।

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