महाराष्ट्र

संसद में ऑफिस पर संकट, Uddhav गुट पर असर

Kanchan Paikara
24 Jun 2026 6:51 PM IST
संसद में ऑफिस पर संकट, Uddhav गुट पर असर
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New Delhi नई दिल्ली : उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) के लिए राजनीतिक मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। पहले लोकसभा में पार्टी के कुछ सांसदों द्वारा शिवसेना (UBT) का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद अब एक और बड़ा झटका लगने की संभावना जताई जा रही है। ताजा स्थिति में संसद परिसर में पार्टी को मिले ऑफिस पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, संसद परिसर में शिवसेना (UBT) को आवंटित कार्यालय को लेकर पुनर्विचार किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा असर पार्टी की संसदीय गतिविधियों पर पड़ेगा। संसद में किसी भी राजनीतिक दल के लिए कार्यालय एक महत्वपूर्ण स्थान होता है, जहां से सांसद अपनी रणनीति बनाते हैं, बैठकों का आयोजन करते हैं और संसदीय कामकाज को आगे बढ़ाते हैं। ऐसे में यदि यह ऑफिस वापस लिया जाता है, तो शिवसेना (UBT) के लिए यह एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक झटका माना जाएगा।

पहले ही लोकसभा में पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है क्योंकि कई सांसदों ने शिवसेना (UBT) छोड़कर शिंदे गुट का दामन थाम लिया था। इस घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे गुट की राजनीतिक ताकत को प्रभावित किया है। अब संसद परिसर में ऑफिस से जुड़ी संभावित कार्रवाई से पार्टी की स्थिति और कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे लंबे विवाद और शिवसेना के दो गुटों के बीच चल रही खींचतान का हिस्सा है। 2022 में पार्टी में हुए विभाजन के बाद से ही दोनों गुटों के बीच पहचान और अधिकारों को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। समय-समय पर सांसदों और विधायकों के पाला बदलने से स्थिति और जटिल होती गई है।

संसद परिसर में पार्टी ऑफिस को लेकर फैसला अगर बदलता है, तो यह सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं होगा, बल्कि राजनीतिक संदेश भी देगा। इससे यह संकेत जा सकता है कि संसद में किस गुट की स्थिति अधिक मजबूत है। यही कारण है कि यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

उद्धव ठाकरे गुट के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पार्टी पहले ही संगठनात्मक और संसदीय स्तर पर कई बदलावों से गुजर रही है। लगातार हो रहे राजनीतिक घटनाक्रमों ने पार्टी की रणनीति और भविष्य की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल इस पूरे मामले पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे शिवसेना (UBT) के लिए एक और संभावित झटका माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो सकती है।

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