महाराष्ट्र

मुंबई कैथोलिक समुदाय में बढ़ा शवदाह का चलन

Kavita2
17 July 2026 4:26 PM IST
मुंबई कैथोलिक समुदाय में बढ़ा शवदाह का चलन
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मुंबई: ईसाई समुदाय में सदियों से दफनाने की परंपरा को अंतिम संस्कार का प्रमुख तरीका माना जाता रहा है, लेकिन मुंबई के रोमन कैथोलिक समुदाय में अब धीरे-धीरे एक बदलाव देखने को मिल रहा है। शहर में बढ़ती आबादी, कब्रिस्तानों में जगह की कमी और रखरखाव की बढ़ती लागत के कारण कई परिवार अब शवदाह (Cremation) को विकल्प के रूप में अपनाने लगे हैं।

मुंबई के रोमन कैथोलिक समुदाय में यह बदलाव पिछले कुछ वर्षों में अधिक स्पष्ट हुआ है। चर्च से जुड़े लोगों और अंतिम संस्कार सेवाएं देने वालों का कहना है कि पहले जहां अधिकतर परिवार दफन संस्कार को प्राथमिकता देते थे, वहीं अब शवदाह के लिए अनुरोधों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

धार्मिक परंपराओं से जुड़े होने के बावजूद कई परिवार व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए इस विकल्प की ओर बढ़ रहे हैं। मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में कब्रिस्तान की जमीन सीमित है। नए कब्रिस्तान विकसित करने के लिए जगह मिलना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में मौजूदा कब्रिस्तानों पर दबाव बढ़ रहा है।

समुदाय के लोगों का कहना है कि कब्र की देखभाल भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। कई परिवारों के सदस्य अब मुंबई से दूर रहने लगे हैं या विदेशों में बस गए हैं। ऐसे में वर्षों तक कब्र का नियमित रखरखाव करना उनके लिए कठिन हो जाता है। शवदाह के बाद अस्थियों को सुरक्षित रखना या किसी स्मृति स्थल पर रखना कई परिवारों को अधिक सुविधाजनक लगने लगा है।

चर्च से जुड़े लोगों के अनुसार, कैथोलिक परंपरा में शवदाह को पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया गया है। धार्मिक मान्यताओं और नियमों का पालन करते हुए इसे स्वीकार किया जा सकता है। हालांकि, कई परिवार अब भी दफन संस्कार को भावनात्मक और धार्मिक रूप से अधिक जुड़ा हुआ मानते हैं।

अंतिम संस्कार सेवाओं से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले दो दशकों में शवदाह के विकल्प को लेकर लोगों की सोच में काफी बदलाव आया है। पहले यह प्रक्रिया बहुत कम देखने को मिलती थी, लेकिन अब कई परिवार पहले से ही अपनी अंतिम इच्छा के रूप में शवदाह का उल्लेख करने लगे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई हिस्सों में ईसाई समुदायों के बीच भी शवदाह का चलन बढ़ा है। पश्चिमी देशों में जगह की कमी, पर्यावरण संबंधी चिंताओं और बदलती जीवनशैली के कारण कई लोग अब दफनाने के बजाय शवदाह को चुन रहे हैं।

मुंबई में भी यही कारण धीरे-धीरे प्रभाव डाल रहे हैं। महानगर में जमीन की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है और सार्वजनिक स्थानों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में कब्रिस्तान के लिए अतिरिक्त जमीन उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन गया है।

समुदाय के कुछ सदस्यों का कहना है कि अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिवार की भावनाओं से जुड़ा विषय भी है। इसलिए कई लोग अपनी परिस्थितियों के अनुसार निर्णय ले रहे हैं। कुछ परिवार पारंपरिक दफन संस्कार को जारी रखना चाहते हैं, जबकि कुछ लोग शवदाह को अधिक व्यावहारिक मान रहे हैं।

चर्च के प्रतिनिधियों का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण बात व्यक्ति की आस्था और परिवार की इच्छा का सम्मान करना है। धार्मिक दिशा-निर्देशों के भीतर रहते हुए परिवारों को अपने निर्णय लेने की अनुमति दी जाती है।

मुंबई के रोमन कैथोलिक समुदाय में यह बदलाव धीरे-धीरे हो रहा है और इसे परंपरा के खत्म होने के बजाय बदलती परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन के रूप में देखा जा रहा है। दफन संस्कार आज भी समुदाय का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन शवदाह अब एक स्वीकार्य विकल्प के रूप में अपनी जगह बना रहा है।

आने वाले वर्षों में शहर की बढ़ती आबादी और सीमित संसाधनों को देखते हुए यह प्रवृत्ति और बढ़ सकती है। धार्मिक आस्था और आधुनिक शहरी जरूरतों के बीच संतुलन बनाते हुए मुंबई का कैथोलिक समुदाय अंतिम संस्कार की परंपराओं में एक नए दौर का सामना कर रहा है।

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