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महाराष्ट्र में नॉन-डेयरी पनीर पर सख्ती, उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर एक साल के लिए रोक

मुंबई। स्कूल कैंपस में प्रोसेस्ड फूड की बिक्री पर रोक लगाने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा को लेकर एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य ने अब नॉन-डेयरी पनीर यानी एनालॉग पनीर के उत्पादन, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से जारी किया गया है और एक साल तक प्रभावी रहेगा।
महाराष्ट्र यह कदम उठाने वाला छत्तीसगढ़ के बाद दूसरा राज्य बन गया है। इससे पहले छत्तीसगढ़ में भी एनालॉग पनीर के इस्तेमाल और सेवन पर रोक लगाई गई थी। सरकार का कहना है कि यह फैसला उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है।
राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंडे की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि ऐसे पनीर पर रोक लगाई जा रही है, जो पूरी तरह से डेयरी उत्पादों से तैयार नहीं होता है। विभाग के अनुसार, बाजार में कुछ जगह ऐसे उत्पादों की बिक्री की शिकायतें सामने आई थीं, जिन्हें पनीर के नाम पर बेचा जा रहा था, लेकिन उनमें पारंपरिक डेयरी पनीर के बजाय अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था।
एनालॉग पनीर को आमतौर पर ऐसे उत्पाद के रूप में जाना जाता है जिसमें दूध के ठोस पदार्थों की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च, प्रोटीन या अन्य सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को पनीर के नाम पर ऐसे उत्पाद न बेचे जाएं जो निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते।
आदेश के तहत राज्य में नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, स्टोरेज, परिवहन और बिक्री पर रोक लगा दी गई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजार में उपलब्ध ऐसे उत्पादों की जांच करें और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करें।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र सरकार खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर लगातार सख्ती बरत रही है। हाल ही में स्कूल परिसरों में बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रोसेस्ड फूड की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था।
खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि बच्चों और आम उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी बढ़ाई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, असली पनीर दूध से तैयार किया जाता है, जबकि एनालॉग पनीर में कई बार दूध आधारित सामग्री की मात्रा कम या नहीं के बराबर हो सकती है। ऐसे उत्पादों की पहचान और सही लेबलिंग जरूरी है, ताकि उपभोक्ता सही जानकारी के आधार पर खरीदारी कर सकें।
व्यापारियों और खाद्य कारोबारियों को भी नए आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा है कि प्रतिबंध के दौरान यदि कोई निर्माता या विक्रेता नॉन-डेयरी पनीर की बिक्री करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में लोग पनीर का इस्तेमाल करते हैं। होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सेवाओं और खाद्य दुकानों में इसकी मांग अधिक रहती है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई बाजार में बिकने वाले पनीर उत्पादों की जांच को और तेज कर सकती है।
सरकार का कहना है कि यह प्रतिबंध उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए लगाया गया है और इसका उद्देश्य किसी खाद्य व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
एक साल तक लागू रहने वाले इस आदेश के दौरान विभाग स्थिति की समीक्षा करेगा और जरूरत के अनुसार आगे के कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को बाजार निगरानी बढ़ाने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
महाराष्ट्र में नॉन-डेयरी पनीर पर लगी यह रोक खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस कार्रवाई का बाजार और उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ता है।





