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मुंबई। खाद्य सुरक्षा को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्यभर में एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर के उत्पादन, प्रोसेसिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने यह फैसला खाद्य नमूनों की जांच में सामने आई गंभीर कमियों के बाद लिया है।
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की जांच में पाया गया कि बड़ी संख्या में एनालॉग पनीर के नमूने तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। अधिकारियों के अनुसार, कई नमूनों में प्राकृतिक दूध की जगह वनस्पति वसा का इस्तेमाल किया गया था, जिससे खाद्य गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ीं।
308 पनीर सैंपल की हुई जांच
सरकार का यह फैसला अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पूरे महाराष्ट्र से लिए गए पनीर के नमूनों की जांच के आधार पर लिया गया है। इस अवधि में कुल 308 पनीर सैंपल एकत्र किए गए और उनकी प्रयोगशाला में जांच कराई गई।
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि इनमें से 109 सैंपल यानी करीब 35.4 प्रतिशत खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए। इनमें 79 सैंपल खराब गुणवत्ता वाले मिले, जबकि 30 सैंपल मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाए गए।
इन नतीजों के बाद राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया।
दूध की जगह इस्तेमाल हो रही थी वनस्पति वसा
FDA की जांच में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां पनीर में प्राकृतिक दूध के फैट की जगह वनस्पति तेल या अन्य प्रकार की वसा का इस्तेमाल किया गया था।
एनालॉग पनीर को आमतौर पर दूध से बने पारंपरिक पनीर के विकल्प के रूप में तैयार किया जाता है, लेकिन खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार इसकी गुणवत्ता और लेबलिंग स्पष्ट होनी चाहिए। जांच में सामने आई कमियों ने इस बात को लेकर चिंता बढ़ाई कि उपभोक्ताओं को असली और नकली उत्पाद में अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई
महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत यह कार्रवाई की है। राज्य के फूड सेफ्टी कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने बताया कि यह आदेश फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 30(2)(a) के तहत जारी किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रयोगशाला जांच के परिणामों और जनप्रतिनिधियों से मिली जानकारी के आधार पर लिया गया है। सरकार का उद्देश्य लोगों को असुरक्षित खाद्य पदार्थों से बचाना है।
उत्पादन से बिक्री तक सभी गतिविधियों पर रोक
प्रतिबंध के तहत एनालॉग पनीर से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन को शामिल किया गया है। यानी अब राज्य में इसके निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर रोक रहेगी।
सरकार का कहना है कि केवल किसी एक स्तर पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, इसलिए पूरे नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाया गया है।
उपभोक्ताओं की सेहत प्राथमिकता
अधिकारियों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। खासकर ऐसे उत्पाद जिनका सेवन बड़ी संख्या में लोग करते हैं, उनकी नियमित जांच जरूरी है।
पनीर का इस्तेमाल महाराष्ट्र में बड़ी मात्रा में होता है और यह होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानों और घरों में भी लोकप्रिय खाद्य पदार्थ है। ऐसे में खराब गुणवत्ता वाले पनीर की बिक्री रोकना सरकार की प्राथमिकता बन गई थी।
बाजार पर पड़ेगा असर
एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध का असर उन कारोबारियों पर पड़ सकता है, जो इस तरह के उत्पादों का निर्माण या बिक्री करते हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह कदम व्यापार को प्रभावित करने के लिए नहीं बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
प्रशासन की ओर से आगे भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच जारी रखने की बात कही गई है।
आगे भी जारी रहेंगी जांच
FDA अधिकारियों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राज्य में अन्य खाद्य उत्पादों की भी समय-समय पर जांच की जाएगी, ताकि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री मिल सके।
सरकार ने कारोबारियों से भी अपील की है कि वे खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें और केवल निर्धारित गुणवत्ता वाले उत्पाद ही बाजार में उपलब्ध कराएं।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र सरकार का एनालॉग पनीर पर एक साल का प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा है। 308 नमूनों की जांच में सामने आई कमियों के बाद लिया गया यह फैसला उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया कदम है।





