महाराष्ट्र

नशीली दवाओं की बिक्री पर कसेगा शिकंजा, CDSCO बनाएगा निगरानी का नया सिस्टम

Kavita2
12 Oct 2026 9:55 AM IST
नशीली दवाओं की बिक्री पर कसेगा शिकंजा, CDSCO बनाएगा निगरानी का नया सिस्टम
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मुंबई। देश में नशीले और मन पर प्रभाव डालने वाले पदार्थों वाली दवाओं के गैर-कानूनी इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत दवाओं के निर्माण, बिक्री, भंडारण, निरीक्षण और नियामकीय कार्रवाई से जुड़े आंकड़ों को एक व्यवस्थित तरीके से जुटाने की योजना है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हर महीने निर्धारित प्रारूप में जानकारी मांगी जाएगी, ताकि दवाओं की आपूर्ति और उनके इस्तेमाल पर बेहतर निगरानी रखी जा सके।

यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो गई है, जब ओपिओइड पदार्थों वाली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के मामले सामने आ रहे हैं। जून 2026 में महाराष्ट्र के पुणे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और एंटी-नारकोटिक्स सेल-1 की कार्रवाई के दौरान SPAS-TRASCEN PLUS के 10,492 कैप्सूल जब्त किए गए थे। इन कैप्सूल में ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड, डाइसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड और एसिटामिनोफेन शामिल हैं। अधिकारियों ने 424.06 ग्राम ट्रामाडोल बरामद होने की जानकारी दी थी।

CDSCO की प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद केवल दवाओं की बिक्री पर नजर रखना नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी है कि मौजूदा नियामकीय व्यवस्था में कहां कमियां हैं और किन स्तरों पर निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।

हर महीने राज्यों से लिया जाएगा डेटा

नशीले और साइकोट्रोपिक पदार्थों वाली दवाओं की निगरानी को लेकर 18 सितंबर 2026 को हुई औषधि परामर्श समिति (DCC) की बैठक में इस विषय पर चर्चा की गई। समिति ने ऐसी दवाओं के निर्माण, बिक्री, स्टॉक, निरीक्षण और नियामकीय कार्रवाई की जानकारी जुटाने के लिए एक विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटाबेस की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक के निष्कर्षों के अनुसार, CDSCO राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए डेटा जमा करने का एक समान प्रारूप जारी करेगा। इसमें लाइसेंसों की संख्या और उनकी श्रेणियों, दवाओं की मात्रा, किए गए निरीक्षणों और ऑडिट तथा नियमों के उल्लंघन पर की गई कार्रवाई से संबंधित जानकारी शामिल होगी। प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए राज्य औषधि नियामकों से भी परामर्श किया जा सकता है।

इस व्यवस्था से अलग-अलग राज्यों से मिलने वाले आंकड़ों को एक समान तरीके से दर्ज और विश्लेषित करना आसान हो सकेगा। इससे नियामक एजेंसियों को दवाओं की आपूर्ति और भंडारण से जुड़ी गतिविधियों की बेहतर तस्वीर मिल सकती है।

निर्माण से बिक्री तक निगरानी की तैयारी

प्रस्तावित व्यवस्था में दवाओं की पूरी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े आंकड़ों को महत्व दिया जाएगा। इसमें यह जानकारी शामिल होगी कि संबंधित दवाओं के निर्माण और बिक्री से जुड़ी गतिविधियां कहां हो रही हैं, कितना स्टॉक रखा जा रहा है, कितने निरीक्षण किए गए और नियमों के उल्लंघन पर क्या कदम उठाए गए।

इस तरह के डेटा को एक जगह इकट्ठा करने से राज्यों के बीच निगरानी संबंधी अंतर और नियामकीय कमियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में लाइसेंस, स्टॉक या निरीक्षण से संबंधित निगरानी में कमी दिखाई देती है, तो संबंधित नियामक एजेंसियां उस पर ध्यान दे सकती हैं।

औषधि परामर्श समिति ने नियमित रूप से डेटा जमा करने और उसका विश्लेषण करने के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने की सिफारिश भी की है। इसके अलावा, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के मौजूदा ऑनलाइन पोर्टल को आवश्यक बदलावों के साथ इस्तेमाल करने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य ऐसी दवाओं की आवाजाही को शुरू से अंतिम स्तर तक ट्रैक करने की व्यवस्था विकसित करना है।

मार्च 2027 तक कमियां दूर करने का लक्ष्य

CDSCO को ड्रग कंट्रोल विजन दस्तावेज 2026-2029 के तहत इस विषय पर काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आधिकारिक समिति की बैठक के विवरण के अनुसार, नशीले और साइकोट्रोपिक पदार्थों वाली दवाओं के गैर-कानूनी इस्तेमाल और उनके अवैध दिशा-परिवर्तन से जुड़ी नियामकीय कमियों को मार्च 2027 तक दूर करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके लिए पहले से जारी निर्देशों, राज्यों में लागू नियंत्रण व्यवस्था और मानक संचालन प्रक्रियाओं को एक साथ रखकर व्यापक कार्ययोजना तैयार करने की सिफारिश की गई है। इससे विभिन्न राज्यों में अपनाई जा रही प्रक्रियाओं का आकलन करने और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आगे की रणनीति तैयार करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, प्रस्तावित निगरानी प्रणाली के सभी तकनीकी विवरण और इसे लागू करने की अंतिम समय-सारणी अभी स्पष्ट नहीं है। साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म की उपयोगिता और मौजूदा पोर्टल में आवश्यक बदलावों की संभावना पर आगे काम किया जाना है।

पुणे में ट्रामाडोल के कैप्सूल जब्त होने के बाद बढ़ी चिंता

पुणे में जून 2026 के दौरान की गई कार्रवाई ने ओपिओइड युक्त दवाओं की बिक्री और वितरण पर निगरानी के महत्व को सामने रखा। महाराष्ट्र FDA और एंटी-नारकोटिक्स सेल-1 की कार्रवाई में SPAS-TRASCEN PLUS के 10,492 कैप्सूल जब्त किए गए थे। इनमें ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड के साथ डाइसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड और एसिटामिनोफेन शामिल थे।

अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान 424.06 ग्राम ट्रामाडोल बरामद हुआ था, जिसे नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत वाणिज्यिक मात्रा बताया गया। इस घटना से दवाओं के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रभावी निगरानी की जरूरत रेखांकित होती है।

प्रस्तावित राष्ट्रीय व्यवस्था के तहत नियमित आंकड़ों और निरीक्षण संबंधी जानकारी के जरिए नियामक एजेंसियां संभावित कमियों की पहचान कर सकेंगी। हालांकि, यह व्यवस्था किस तरह काम करेगी और इससे अवैध बिक्री के मामलों में कितनी कमी आएगी, यह इसके वास्तविक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

डिजिटल निगरानी और कार्रवाई पर रहेगा जोर

CDSCO की योजना में समान प्रारूप में मासिक डेटा जमा करने, साझा डिजिटल मंच विकसित करने और मौजूदा पोर्टल के इस्तेमाल की संभावना तलाशने जैसे कदम शामिल हैं। इन उपायों से दवाओं के कारोबार से जुड़ी जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से जुटाने में मदद मिल सकती है।

अब आगे की प्रक्रिया में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से परामर्श, डेटा प्रारूप को अंतिम रूप देना और साझा डिजिटल व्यवस्था विकसित करना महत्वपूर्ण होगा। मार्च 2027 तक नियामकीय कमियों को दूर करने का लक्ष्य इस पहल की समयसीमा तय करता है।

फिलहाल उद्देश्य स्पष्ट है—नशीले और साइकोट्रोपिक पदार्थों वाली दवाओं के निर्माण, बिक्री और भंडारण पर निगरानी मजबूत करना तथा अवैध इस्तेमाल रोकने के लिए नियामकीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना।

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