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महाराष्ट्र में बिजली परियोजना के लिए 32,490 पेड़ काटने की योजना पर विवाद

Kavita2
25 Oct 2026 10:36 AM IST
महाराष्ट्र में बिजली परियोजना के लिए 32,490 पेड़ काटने की योजना पर विवाद
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रायगढ़। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में प्रस्तावित 3,000 मेगावाट क्षमता की पंप्ड स्टोरेज बिजली परियोजना को लेकर राजनीतिक और पर्यावरणीय विवाद खड़ा हो गया है। कर्जत तालुका में प्रस्तावित इस परियोजना के लिए 32,490 पेड़ काटने की योजना सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। एक ओर इस परियोजना से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की योजना ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

यह विवाद 'सैडोंगर 1 कर्जत ऑफ-स्ट्रीम ओपन लूप पंप्ड स्टोरेज' परियोजना से जुड़ा है। प्रस्तावित परियोजना की क्षमता 3,000 मेगावाट बताई गई है। इसका उद्देश्य बिजली व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाने और जरूरत के समय ऊर्जा उपलब्ध कराने में योगदान देना है।

32,490 पेड़ों की कटाई की योजना पर सवाल

रायगढ़ जिले के कर्जत तालुका में प्रस्तावित बिजली परियोजना के लिए 32,490 पेड़ों को काटने की योजना ने पर्यावरणीय चिंताओं को जन्म दिया है।

इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से स्थानीय हरित क्षेत्र, वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

विपक्षी दलों ने परियोजना की पर्यावरणीय कीमत को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका विरोध मुख्य रूप से विकास परियोजना के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाने की योजना से जुड़ा है।

हालांकि उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि पेड़ों की कटाई के लिए सभी आवश्यक मंजूरियां मिल चुकी हैं या मामला अभी विभिन्न स्वीकृतियों की प्रक्रिया में है।

इसलिए प्रस्तावित कटाई को पहले से पूरी हो चुकी कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्या है सैडोंगर 1 कर्जत परियोजना?

सैडोंगर 1 कर्जत ऑफ-स्ट्रीम ओपन लूप पंप्ड स्टोरेज परियोजना एक प्रस्तावित जल-आधारित ऊर्जा भंडारण परियोजना है।

इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 3,000 मेगावाट बताई गई है।

पंप्ड स्टोरेज तकनीक का उपयोग बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने के लिए किया जाता है।

इस प्रणाली में कम मांग या अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने के समय पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय तक पंप किया जाता है।

इसके बाद बिजली की मांग बढ़ने पर ऊपरी जलाशय से पानी नीचे छोड़कर टरबाइन के माध्यम से बिजली पैदा की जाती है।

इस तरह यह तकनीक ऊर्जा भंडारण का काम करती है। हालांकि पानी को ऊपर पंप करने और बाद में बिजली बनाने की प्रक्रिया में कुछ ऊर्जा की हानि भी होती है।

बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाने में मिलेगी मदद

प्रस्तावित परियोजना से महाराष्ट्र और अन्य संबंधित क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी होती हैं, जब बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है।

इसके अलावा सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से मिलने वाली बिजली की उपलब्धता मौसम और समय के अनुसार बदलती रहती है।

ऐसी स्थिति में ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके बाद में जरूरत के समय ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद कर सकती हैं।

3,000 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना से ग्रिड की विश्वसनीयता और ऊर्जा सुरक्षा में योगदान मिलने की उम्मीद है।

हालांकि परियोजना की कुल ऊर्जा भंडारण क्षमता, संचालन अवधि और निर्माण लागत का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

विपक्ष ने उठाए पर्यावरणीय प्रभाव के मुद्दे

परियोजना के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं।

विपक्ष का कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरणीय नुकसान का भी गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए।

विशेष रूप से बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाने की योजना से स्थानीय पर्यावरण पर संभावित प्रभाव चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि किन विपक्षी नेताओं ने क्या विशिष्ट बयान दिए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

परियोजना को लेकर उठे सवालों के बीच पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, वन संरक्षण और वैकल्पिक उपायों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है।

पेड़ों की कटाई से क्या हो सकता है असर?

किसी भी क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई का असर स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।

पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने, मिट्टी के संरक्षण और स्थानीय जलचक्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसके अलावा अनेक पक्षियों, कीटों और अन्य जीवों के लिए पेड़ प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराते हैं।

यदि किसी परियोजना के कारण बड़े क्षेत्र में वनस्पति हटाई जाती है, तो स्थानीय जैव विविधता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि सैडोंगर 1 कर्जत परियोजना के मामले में वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन संबंधित क्षेत्र की वनस्पति, भूमि की स्थिति और आधिकारिक पर्यावरणीय अध्ययन के आधार पर ही किया जा सकेगा।

केवल पेड़ों की संख्या के आधार पर पूरे पर्यावरणीय नुकसान का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है।

विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन

महाराष्ट्र में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच बिजली उत्पादन और ऊर्जा भंडारण से जुड़ी परियोजनाओं का महत्व बढ़ रहा है।

राज्य में औद्योगिक गतिविधियों, शहरीकरण और बिजली की मांग को देखते हुए ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत बनाना आवश्यक माना जाता है।

दूसरी ओर प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।

इसी कारण बड़ी परियोजनाओं में विकास की जरूरतों और पर्यावरणीय प्रभावों के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया जाता है।

कर्जत की प्रस्तावित परियोजना को लेकर भी यही सवाल सामने आया है कि ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्य को पूरा करते हुए पेड़ों की कटाई और अन्य संभावित पर्यावरणीय प्रभावों को किस तरह कम किया जा सकता है।

पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया होगी महत्वपूर्ण

बड़ी जल-ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए लागू नियमों के अनुसार विभिन्न तकनीकी और पर्यावरणीय स्वीकृतियों की आवश्यकता हो सकती है।

इनमें परियोजना की प्रकृति और भूमि की स्थिति के आधार पर पर्यावरणीय प्रभाव आकलन तथा वन संबंधी मंजूरियां शामिल हो सकती हैं।

यदि प्रस्तावित निर्माण के लिए वन भूमि का उपयोग किया जाना है, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करना आवश्यक होगा।

इसके अलावा परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरणीय नुकसान को कम करने के उपाय भी महत्वपूर्ण होते हैं।

हालांकि इस परियोजना की मंजूरियों की वर्तमान स्थिति और किसी प्रतिपूरक वनीकरण योजना का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

स्थानीय लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण परियोजना

कर्जत तालुका में प्रस्तावित इस परियोजना का प्रभाव केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता।

बड़ी निर्माण परियोजनाओं में भूमि उपयोग, स्थानीय आवागमन, जल संसाधन और आसपास के पर्यावरण से जुड़े सवाल भी सामने आ सकते हैं।

ऐसे में स्थानीय लोगों को परियोजना की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होता है।

यदि परियोजना के कारण किसी क्षेत्र की भूमि या प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग बदलता है, तो उसके प्रभाव का आकलन किया जाना आवश्यक है।

हालांकि इस मामले में किसी गांव के विस्थापन, भूमि अधिग्रहण या प्रभावित परिवारों की संख्या को लेकर पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

अब परियोजना के अगले कदम पर नजर

रायगढ़ जिले की 3,000 मेगावाट क्षमता वाली सैडोंगर 1 कर्जत पंप्ड स्टोरेज परियोजना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण प्रस्ताव के रूप में सामने आई है।

लेकिन इसके लिए 32,490 पेड़ों की कटाई की योजना ने राजनीतिक और पर्यावरणीय विवाद पैदा कर दिया है।

एक तरफ परियोजना से बिजली ग्रिड को मजबूती मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इसके पर्यावरणीय प्रभाव पर सवाल उठाए हैं।

अब परियोजना से जुड़े आधिकारिक पर्यावरणीय अध्ययन, मंजूरियों और पेड़ों की कटाई को लेकर अंतिम निर्णय पर नजर रहेगी।

इस विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाएगी।

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