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महाराष्ट्र में BHMS डॉक्टरों के MMC रजिस्ट्रेशन पर विवाद

Kavita2
29 July 2026 10:17 AM IST
महाराष्ट्र में BHMS डॉक्टरों के MMC रजिस्ट्रेशन पर विवाद
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मुंबई। महाराष्ट्र में मॉडर्न फार्माकोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्स (CCMP) करने वाले बीएचएमएस (BHMS) डॉक्टरों के महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में रजिस्ट्रेशन को लेकर चल रहा विवाद मंगलवार को हुई हाई लेवल बैठक के बाद भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया। मेडिकल एजुकेशन मंत्री हसन मुश्रीफ की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई बैठक में इस लंबे समय से लंबित मामले पर चर्चा की गई, लेकिन बैठक के बाद अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आने लगे हैं।

जहां महाराष्ट्र काउंसिल ऑफ होम्योपैथी और इंटीग्रेटेड डॉक्टर्स एसोसिएशन (N) ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए दावा किया कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है, वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने कहा कि अभी तक इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

CCMP डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन का मामला

महाराष्ट्र में कई बीएचएमएस डॉक्टरों ने मॉडर्न फार्माकोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्स (CCMP) पूरा किया है। इन डॉक्टरों की मांग है कि उन्हें महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण की अनुमति दी जाए, ताकि वे आधुनिक चिकित्सा पद्धति से जुड़ी सेवाएं दे सकें।

यह मामला लंबे समय से विवादों में रहा है। एक तरफ होम्योपैथी डॉक्टरों का कहना है कि आवश्यक प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें सीमित अधिकारों के साथ चिकित्सा सेवा देने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं दूसरी ओर एलोपैथिक डॉक्टरों के संगठन इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं।

मंत्रालय में हुई महत्वपूर्ण बैठक

मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में मेडिकल एजुकेशन मंत्री हसन मुश्रीफ की अध्यक्षता में संबंधित विभागों और विभिन्न चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य CCMP करने वाले बीएचएमएस डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े विवाद का समाधान निकालना था।

बैठक में कानूनी स्थिति, डॉक्टरों के अधिकार, मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था पर संभावित प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, बैठक के बाद किसी स्पष्ट और आधिकारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई।

होम्योपैथी संगठनों ने बताया सकारात्मक

महाराष्ट्र काउंसिल ऑफ होम्योपैथी और इंटीग्रेटेड डॉक्टर्स एसोसिएशन (N) ने बैठक को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। संगठनों का दावा है कि चर्चा के बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

इन संगठनों के अनुसार, 29 जुलाई से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। उनका कहना है कि CCMP करने वाले डॉक्टरों को लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है और अब समाधान की दिशा में कदम बढ़े हैं।

IMA ने फैसले पर उठाए सवाल

दूसरी ओर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इस दावे से असहमति जताई है। IMA का कहना है कि बैठक में अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

IMA पहले से ही CCMP डॉक्टरों के MMC रजिस्ट्रेशन का विरोध करता रहा है। संगठन का तर्क है कि चिकित्सा पद्धतियों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना जरूरी है और बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के किसी भी तरह का बदलाव मरीजों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

IMA ने पहले चेतावनी दी थी कि यदि कानूनी विवाद का समाधान होने से पहले रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू की गई तो राज्यभर में मेडिकल सेवाएं बंद करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

कानूनी विवाद बना बड़ी चुनौती

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चुनौती कानूनी स्थिति को लेकर है। CCMP डॉक्टरों के अधिकार और उनके रजिस्ट्रेशन को लेकर अदालतों में भी विवाद चल रहा है।

मेडिकल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निर्णय में मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सा गुणवत्ता और नियमों का पालन सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए। सरकार के सामने सभी पक्षों के हितों को संतुलित करने की चुनौती है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर

यदि इस मामले में जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। एक ओर ग्रामीण और छोटे शहरों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा मानकों को बनाए रखना भी जरूरी है।

CCMP डॉक्टरों का पक्ष है कि वे अतिरिक्त प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और उन्हें सीमित दायरे में सेवा देने की अनुमति मिलनी चाहिए। जबकि विरोध करने वाले संगठन इसे चिकित्सा क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन के रूप में देखते हैं।

अब सरकार के अगले कदम पर नजर

मंगलवार की बैठक के बाद अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले फैसले पर है। फिलहाल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होने को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन आधिकारिक आदेश का इंतजार है।

महाराष्ट्र में CCMP डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन का यह मामला केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था, कानून और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। सरकार को अब ऐसा समाधान निकालना होगा, जो सभी पक्षों के बीच संतुलन स्थापित कर सके।

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