महाराष्ट्र

तेंदुए की खाल बरामदगी मामले के बाद विवाद

Kavita2
18 Aug 2026 10:19 AM IST
तेंदुए की खाल बरामदगी मामले के बाद विवाद
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मुंबई। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था वाइल्डलाइफ SOS ने सोमवार को अपने अधिकारियों के कथित तौर पर वन्यजीव शिकार और तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। संस्था ने कहा कि उसका काम हमेशा से वन्यजीव अपराधों को रोकना और अवैध शिकार के खिलाफ कार्रवाई में जांच एजेंसियों की मदद करना रहा है।

वाइल्डलाइफ SOS की ओर से जारी बयान में कहा गया कि संस्था द्वारा जुटाई गई शिकार-रोधी खुफिया जानकारी को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और वैध संरक्षण कार्यों को वन्यजीव अपराधों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

यह विवाद उत्तर प्रदेश में तेंदुए की खाल बरामद होने के बाद शुरू हुआ। मामले की जांच के दौरान कुछ खबरों में संस्था के कथित रूप से वन्यजीव तस्करी से जुड़े लोगों के संपर्क में होने का दावा किया गया था। हालांकि, संस्था ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ मिलकर वन्यजीव अपराधों के खिलाफ लगातार काम करती रही है।

दस तेंदुए की खाल बरामदगी के बाद उठे सवाल

मामला जुलाई में सामने आया, जब उत्तर प्रदेश वन विभाग और पुलिस ने आगरा-ग्वालियर रोड पर कार्रवाई करते हुए 10 तेंदुओं की खालें बरामद की थीं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई वाइल्डलाइफ SOS से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी।

इस कार्रवाई में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस अवैध कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

जांच के दौरान कुछ सवाल उठे कि जिस संस्था ने कार्रवाई के लिए सूचना उपलब्ध कराई, उसके ही कुछ लोगों के कथित रूप से तस्करी नेटवर्क से संबंध तो नहीं थे। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।

संस्था ने दी सफाई

वाइल्डलाइफ SOS ने कहा कि वन्यजीव अपराधों के खिलाफ काम करने वाली संस्थाओं के लिए खुफिया जानकारी जुटाना और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जांच एजेंसियों तक पहुंचाना एक सामान्य प्रक्रिया है।

संस्था ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य कभी भी किसी अपराध को बढ़ावा देना नहीं रहा है। उसने कहा कि वर्षों से वह वन विभाग, पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर वन्यजीव संरक्षण के लिए काम कर रही है।

संस्था के अनुसार, अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग करना उसके संरक्षण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसी के तहत वह संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देती है।

मध्य प्रदेश STSF जांच का भी जिक्र

इस मामले में मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) की एक अलग जांच का भी उल्लेख किया गया है। खबरों के अनुसार, बड़ी बिल्लियों यानी बाघ और तेंदुए के शिकार से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किए गए दो संदिग्धों के वाइल्डलाइफ SOS से कथित संबंध होने की बात सामने आई है।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि जांचकर्ता इस संभावना की जांच कर रहे हैं कि कहीं संस्था के शिकार-रोधी अभियानों का गलत इस्तेमाल तो नहीं किया गया।

हालांकि, ये सभी आरोप जांच के स्तर पर हैं। अभी तक किसी अदालत या आधिकारिक जांच एजेंसी ने इन आरोपों को प्रमाणित नहीं किया है।

वन्यजीव अपराध रोकना बड़ी चुनौती

भारत में बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों का अवैध शिकार लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। वन्यजीव तस्कर खाल, हड्डियों और अन्य अंगों की अवैध बिक्री के लिए संरक्षित प्रजातियों को निशाना बनाते हैं।

ऐसे मामलों में खुफिया जानकारी और जमीनी स्तर पर निगरानी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संरक्षण संगठनों का कहना है कि सरकारी एजेंसियों के साथ सहयोग के बिना वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण मुश्किल है।

वाइल्डलाइफ SOS लंबे समय से वन्यजीव बचाव, संरक्षण और अवैध व्यापार के खिलाफ अभियान चलाने वाली प्रमुख संस्थाओं में शामिल रही है। संस्था ने कहा कि वह आगे भी वन्यजीव अपराधों के खिलाफ अपनी भूमिका निभाती रहेगी।

जांच पूरी होने का इंतजार

तेंदुए की खाल बरामदगी और कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े आरोपों की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

फिलहाल वाइल्डलाइफ SOS ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि संस्था का काम वन्यजीव संरक्षण है, न कि किसी अपराध में शामिल होना। वहीं, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी।

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