महाराष्ट्र

पुणे में मेयर के बंगले पर पेड़ काटने को लेकर विवाद, PMC ने जांच शुरू की

Kavita2
30 April 2026 3:59 PM IST
पुणे में मेयर के बंगले पर पेड़ काटने को लेकर विवाद, PMC ने जांच शुरू की
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Maharashtra महाराष्ट्र: पुणे में मेयर के बंगले परिसर में पेड़ काटने की घटना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले में यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या पेड़ काटने की पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार अपनाई गई थी या नहीं। घटना के बाद पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (PMC) ने जांच शुरू कर दी है।

नगर आयुक्त नवल किशोर राम ने कहा है कि यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की पूरी जांच पारदर्शी तरीके से की जा रही है।

सिविक अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में केवल उन डालियों को काटने की अनुमति दी गई थी जो खतरनाक स्थिति में थीं या किसी दुर्घटना का कारण बन सकती थीं। नियमों के अनुसार, पेड़ काटने या उन्हें हटाने की अनुमति ट्री कंजर्वेशन कमेटी द्वारा फोटो और औपचारिक आवेदन के आधार पर दी जाती है।

सूत्रों के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में मेयर के बंगले परिसर में लगभग 21 पेड़ों को लेकर एक प्रस्ताव भेजा गया था। इस प्रस्ताव में यूकेलिप्टस, पीपल, जामुन, आम, अंबर और नींबू जैसे विभिन्न प्रकार के पेड़ शामिल थे, जिन्हें खतरनाक या हटाने योग्य बताया गया था।

यह प्रस्ताव शिवाजीनगर-घोले रोड वार्ड कार्यालय द्वारा मंजूर किया गया था। मंजूरी मिलने के बाद ट्री कंजर्वेशन विभाग ने पिछले कुछ दिनों में पेड़ों की छंटाई और कटाई का काम किया।

हालांकि अब इस प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या केवल डालियों की अनुमति थी या पूरे पेड़ों को काटने की अनुमति ली गई थी। इसी संदेह के चलते स्थानीय स्तर पर विवाद बढ़ गया है और पर्यावरण कार्यकर्ता भी इस मामले में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

नगर निगम ने कहा है कि सभी दस्तावेजों और अनुमति प्रक्रिया की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जाएगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पेड़ों की कटाई से पर्यावरण पर असर पड़ सकता है और इस तरह के फैसलों में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यदि पेड़ खतरनाक स्थिति में थे तो सुरक्षा के लिए कार्रवाई जरूरी थी।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि नियमों का पालन सही तरीके से किया गया था या नहीं।

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