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नागपुर। महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने नागपुर डिवीजन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। बेहद रोमांचक मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार और मौजूदा एमएलसी अभिजीत वंजारी ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार एवं पूर्व विधायक सुधाकर कोहाले को 3,271 मतों के अंतर से पराजित किया। कांग्रेस उम्मीदवार को कुल 67,231 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी ने 63,960 वोट हासिल किए। इस सीट पर मंगलवार सुबह शुरू हुई मतगणना गुरुवार, 29 अक्टूबर की तड़के पूरी हुई। करीब 40 घंटे से अधिक समय तक चली वोटों की गिनती में कई बार चुनावी समीकरण बदलते नजर आए। नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है। ऐसे में यहां कांग्रेस की जीत को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
40 घंटे से ज्यादा चली मतगणना, आखिरी दौर में बदला परिणाम
#WATCH | Nagpur, Maharashtra: Congress candidate Abhijit Vanjari has taken a lead over the BJP’s Sudhakar Kohale during the counting of second-preference votes in the Graduates' MLC election. Congress candidate Abhijit Vanjari said, "The BJP exerted all its might—all their leaders were present in Nagpur—yet the voters stood with us. Our party remained united, and the leaders and workers of the Maha Vikas Aghadi stood together as one. Numerous organizations supported me; in fact, I had mentioned in my campaign materials that 48 organizations were backing me. This victory belongs to the workers and leaders of those very organizations." (28.10)
— ANI (@ANI) October 28, 2026
नागपुर डिवीजन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इसके बाद मंगलवार, 27 अक्टूबर की सुबह मतगणना शुरू हुई।
मतगणना के शुरुआती दौर में भाजपा प्रत्याशी सुधाकर कोहाले ने बढ़त बनाई थी। बुधवार को दूसरे दौर की गिनती पूरी होने तक कोहाले कांग्रेस उम्मीदवार से 4,294 मतों से आगे चल रहे थे।
उस समय भाजपा उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के 60,924 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के अभिजीत वंजारी को 56,630 मत प्राप्त हुए थे।
निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले को 24,249 प्रथम वरीयता मत मिले थे।
हालांकि, प्रथम वरीयता के मतों की गणना में कोई भी उम्मीदवार जीत के लिए निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर सका।
इसके बाद दूसरी वरीयता के मतों की गिनती और उम्मीदवारों के उन्मूलन की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी चरण में अभिजीत वंजारी ने भाजपा प्रत्याशी को पीछे छोड़ दिया।
अभिजीत वंजारी को मिले 67,231 वोट, भाजपा प्रत्याशी को 63,960
अंतिम मतगणना के बाद कांग्रेस के अभिजीत वंजारी को विजेता घोषित किया गया।
उम्मीदवार पार्टी अंतिम मत
अभिजीत वंजारी कांग्रेस 67,231
सुधाकर कोहाले भाजपा 63,960
जीत का अंतर: 3,271 मत।
इस जीत के साथ अभिजीत वंजारी ने नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अपना लगातार दूसरा कार्यकाल सुनिश्चित कर लिया।
इससे पहले वर्ष 2020 में भी वंजारी ने भाजपा के संदीप जोशी को हराकर यह सीट जीती थी।
इस बार भाजपा ने उम्मीदवार बदलते हुए पूर्व विधायक सुधाकर कोहाले को मैदान में उतारा था, लेकिन पार्टी सीट वापस हासिल नहीं कर सकी।
फडणवीस और गडकरी के गृह क्षेत्र में भाजपा की हार
नागपुर की स्नातक निर्वाचन सीट राजनीतिक दृष्टि से खास महत्व रखती है।
नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय होने के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है।
इस चुनाव में भाजपा ने पूरी सक्रियता दिखाई थी। मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सुधाकर कोहाले के समर्थन में प्रचार किया था।
इसके बावजूद भाजपा उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा।
यह चुनाव इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में लंबे समय तक भाजपा का प्रभाव रहा है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी स्वयं इस निर्वाचन क्षेत्र से कई बार विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं।
उन्होंने जुलाई 1990 से मई 2014 तक करीब 24 वर्षों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था।
नितिन गडकरी की पुरानी सीट पर कांग्रेस का लगातार दूसरा कब्जा
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र लंबे समय तक भाजपा के महत्वपूर्ण राजनीतिक आधारों में शामिल रहा।
नितिन गडकरी के कार्यकाल के दौरान इस सीट पर भाजपा की मजबूत पकड़ रही थी।
लेकिन वर्ष 2020 में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा के संदीप जोशी को हराकर सीट अपने नाम कर ली थी।
वर्ष 2026 के चुनाव में भाजपा ने इसे दोबारा हासिल करने की कोशिश की। पार्टी ने पूर्व विधायक सुधाकर कोहाले को उम्मीदवार बनाया।
चुनाव प्रचार में वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता के बावजूद अंतिम परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहा।
राजनीतिक विश्लेषण में इस परिणाम को स्नातक मतदाताओं के बीच स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रभाव और चुनावी रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, केवल इस निर्वाचन क्षेत्र के नतीजे से पूरे नागपुर या महाराष्ट्र के मतदाताओं की राजनीतिक राय का आकलन नहीं किया जा सकता।
दूसरी वरीयता के वोटों ने पलट दिया चुनावी मुकाबला
नागपुर स्नातक चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू मतगणना की प्रक्रिया रही।
दरअसल, विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अधिमान्य मतदान प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है।
इसमें मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार प्रथम, द्वितीय और आगे की वरीयता देते हैं।
यदि किसी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के मतों से जीत के लिए निर्धारित कोटा प्राप्त नहीं होता, तो नियमों के अनुसार अन्य वरीयता के मतों की गणना की जाती है।
नागपुर में भाजपा उम्मीदवार को शुरुआती बढ़त मिली थी, लेकिन दूसरी वरीयता और उन्मूलन चरणों के बाद कांग्रेस उम्मीदवार आगे निकल गए।
इस प्रक्रिया ने मुकाबले को गुरुवार तड़के तक अनिश्चित बनाए रखा।
महाराष्ट्र विधान परिषद में महाविकास आघाड़ी को तीन सीटें
महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों पर हुए चुनावों के अंतिम परिणामों में विपक्षी महाविकास आघाड़ी को तीन सीटें मिलीं।
कांग्रेस ने नागपुर स्नातक सीट पर जीत हासिल की, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को दो सीटों पर सफलता मिली।
पुणे स्नातक सीट पर हर्षदा देशमुख-जाधव ने भाजपा की स्मिता जाधव को पराजित किया।
वहीं छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी एनसीपी (एसपी) ने जीत हासिल की।
सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को दो सीटें मिलीं। इनमें भाजपा ने पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और शिवसेना ने अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज की।
कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना
नागपुर में जीत के बाद कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर राजनीतिक हमला बोला।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस सोशल मीडिया पोस्ट का मुद्दा उठाया, जिसमें चुनाव के सभी परिणाम आने से पहले कांग्रेस की सीटों को लेकर टिप्पणी की गई थी।
कांग्रेस ने दावा किया कि नागपुर का अंतिम परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री को अपना पुराना पोस्ट हटाना पड़ा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी नागपुर में पार्टी की जीत को लेकर प्रतिक्रिया दी और भाजपा के दावों पर सवाल उठाए।
वहीं अभिजीत वंजारी ने चुनाव परिणाम के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने अपनी जीत में कांग्रेस संगठन की एकजुटता और विभिन्न संगठनों के समर्थन को महत्वपूर्ण बताया।
विधानसभा चुनाव से अलग होते हैं स्नातक सीटों के समीकरण
विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान करने वालों की पात्रता विधानसभा चुनाव के मतदाताओं से अलग होती है।
इन निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करते हैं।
इसलिए उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान, स्नातकों से जुड़े मुद्दे और मतदाता संपर्क अभियान चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
नागपुर में कांग्रेस की जीत से पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर उत्साह मिला है। दूसरी ओर भाजपा के लिए यह परिणाम अपनी चुनावी तैयारियों की समीक्षा करने का अवसर है।
कुल मिलाकर, नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अभिजीत वंजारी की लगातार दूसरी जीत ने कांग्रेस को महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में महत्वपूर्ण सफलता दिलाई है। करीब 40 घंटे से अधिक चली मतगणना के बाद 3,271 मतों से हुई इस जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए सिरे से चर्चा शुरू कर दी है।





