महाराष्ट्र

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन पर भड़के CM फडणवीस

Ratna Netam
12 Oct 2026 6:50 PM IST
राहुल गांधी और INDIA गठबंधन पर भड़के CM फडणवीस
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नागपुर। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी INDIA गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विपक्ष के उस प्रस्तावित कदम पर सवाल उठाए, जिसके तहत गठबंधन के नेता भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करना चाहते थे। फडणवीस ने कहा कि देश ऐसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं करेगा, जो संवैधानिक ढांचे को कमजोर करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी शिकायत या विवाद का समाधान संविधान और कानून के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के तरीके की आलोचना की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि न्यायिक मामलों से जुड़ी शिकायतों को सड़कों पर प्रदर्शन के बजाय कानूनी प्रक्रिया के जरिए उठाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का भी जिक्र किया।
राहुल गांधी और INDIA गठबंधन पर निशाना
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्षी गठबंधन के नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की योजना पर आपत्ति जताई।उन्होंने कहा कि देश में संविधान के तहत अलग-अलग संस्थाओं की भूमिकाएं और अधिकार निर्धारित हैं। ऐसे में न्यायिक मामलों से संबंधित शिकायतों को उचित कानूनी माध्यम से उठाया जाना चाहिए।फडणवीस ने राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष का यह कदम संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला हो सकता है।हालांकि, यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप है। किसी विरोध प्रदर्शन को संवैधानिक ढांचे के लिए खतरा मानने का प्रश्न उसके वास्तविक स्वरूप, उद्देश्य और कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।फडणवीस ने कहा कि देश ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा, जो संवैधानिक संस्थाओं की व्यवस्था को प्रभावित करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के फैसले पर सवाल
विपक्षी INDIA गठबंधन के नेताओं द्वारा मुख्य न्यायाधीश से मिलने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की योजना को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है।इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने कहा कि न्यायिक संस्थाओं से संबंधित मामलों में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है।उन्होंने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के तरीके पर सवाल उठाए।मुख्यमंत्री का कहना था कि यदि किसी पक्ष को शिकायत है, तो उसे अदालत में उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करना चाहिए।उन्होंने सड़कों पर प्रदर्शन और न्यायिक प्रक्रिया के बीच अंतर बताते हुए कानून के अनुसार समाधान खोजने पर जोर दिया।हालांकि, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना भी भारत में संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत आता है। इस अधिकार पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।इसलिए किसी विशेष प्रदर्शन की वैधता का आकलन उसके तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के रुख का किया समर्थन
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया।उन्होंने कहा कि न्यायिक मामलों में शिकायतों के समाधान के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।भारतीय न्याय व्यवस्था में विभिन्न मामलों की सुनवाई और उनके समाधान के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं।किसी भी व्यक्ति या संगठन को न्यायिक राहत प्राप्त करने के लिए संबंधित अदालत के समक्ष उचित याचिका या आवेदन प्रस्तुत करना होता है।फडणवीस ने इसी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए विपक्ष के प्रस्तावित मार्च की आलोचना की।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सुप्रीम कोर्ट के उस विशिष्ट आदेश या टिप्पणी का पूरा विवरण नहीं दिया गया है, जिसका मुख्यमंत्री ने समर्थन किया।ऐसे में न्यायालय की स्थिति को फडणवीस के बयान से अलग रखते हुए समझना आवश्यक है।
संवैधानिक ढांचे को लेकर जताई चिंता
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि देश के संवैधानिक ढांचे का सम्मान करना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।उन्होंने विपक्ष की गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की अलग-अलग संवैधानिक जिम्मेदारियां हैं।इन संस्थाओं के बीच निर्धारित अधिकारों और प्रक्रियाओं का पालन लोकतांत्रिक व्यवस्था के संचालन का महत्वपूर्ण आधार है।
फडणवीस ने विपक्ष के प्रस्तावित मार्च को इसी संदर्भ में उठाया।
हालांकि, संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना करना, कानूनी राहत मांगना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अलग-अलग लोकतांत्रिक गतिविधियां हैं।किसी विशेष गतिविधि से संवैधानिक व्यवस्था कमजोर होती है या नहीं, इसका निष्कर्ष केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
इंदिरा गांधी के आपातकाल का किया जिक्र
राहुल गांधी और कांग्रेस की आलोचना करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख किया।उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कांग्रेस पर संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया।भारत में 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया था।
यह आपातकाल मार्च 1977 तक लागू रहा।
उस अवधि में नागरिक स्वतंत्रताओं, राजनीतिक गतिविधियों और प्रेस की स्वतंत्रता पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए थे।भारतीय राजनीति में आपातकाल का दौर आज भी लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों से संबंधित बहसों का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।फडणवीस ने इसी ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के वर्तमान राजनीतिक रुख की आलोचना की।
कांग्रेस पर संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कांग्रेस पर संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया।उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास में आपातकाल जैसा घटनाक्रम शामिल रहा है।फडणवीस ने विपक्ष के वर्तमान कदमों की आलोचना करते हुए कांग्रेस के पिछले निर्णयों का उल्लेख किया।हालांकि, किसी राजनीतिक दल के ऐतिहासिक फैसलों और वर्तमान गतिविधियों के बीच संबंध का आकलन अलग-अलग तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।आपातकाल का ऐतिहासिक तथ्य और विपक्ष के प्रस्तावित मार्च पर फडणवीस की टिप्पणी दो अलग संदर्भ हैं।मुख्यमंत्री ने अपने बयान में इन दोनों विषयों को जोड़ते हुए कांग्रेस के राजनीतिक दृष्टिकोण पर सवाल उठाए।
कानूनी प्रक्रिया के जरिए समाधान पर जोर
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि शिकायतों का समाधान कानून के अनुसार होना चाहिए।उनके अनुसार, न्यायपालिका से संबंधित मामलों को उचित कानूनी मंच पर उठाना ही सही तरीका है।भारत में न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत याचिकाएं दाखिल करने, आदेशों को चुनौती देने और उपलब्ध कानूनी उपायों का उपयोग करने की व्यवस्था है।
फडणवीस ने विपक्ष से इसी प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्षी गठबंधन की ओर से मुख्य न्यायाधीश से मिलने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में है।हालांकि, उपलब्ध विवरण में विपक्षी नेताओं की ओर से फडणवीस की टिप्पणी पर दी गई किसी नई प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच संवैधानिक प्रक्रिया पर चर्चा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की टिप्पणी के बाद इस मुद्दे में संवैधानिक प्रक्रिया और राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के तरीके प्रमुख विषय बनकर सामने आए हैं।फडणवीस ने न्यायिक मामलों के समाधान के लिए कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही।उन्होंने राहुल गांधी और INDIA गठबंधन पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के इतिहास से आपातकाल का उदाहरण भी दिया।दूसरी ओर, लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों और राजनीतिक संगठनों को कानून के दायरे में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार भी प्राप्त है।इसलिए न्यायिक प्रक्रिया और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को उनके अलग-अलग संवैधानिक संदर्भों में समझना महत्वपूर्ण है।
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया बयान
सोमवार को नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट मार्च के प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना करते हुए वर्ष 1975 के आपातकाल को भी याद किया।फिलहाल उपलब्ध जानकारी में INDIA गठबंधन की ओर से उनके आरोपों पर किसी नई आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।फडणवीस का यह बयान विपक्ष के विरोध प्रदर्शन, न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर जारी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
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