महाराष्ट्र

पंढरपुर वारी पर बनी डॉक्यूमेंट्री के मुंबई प्रीमियर में शामिल हुए CM देवेंद्र फडणवीस

Kavita2
10 July 2026 10:19 AM IST
पंढरपुर वारी पर बनी डॉक्यूमेंट्री के मुंबई प्रीमियर में शामिल हुए CM देवेंद्र फडणवीस
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Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की प्रसिद्ध धार्मिक परंपरा पंढरपुर वारी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म “पंढरपुर वारी एंड द फुटप्रिंट्स ऑफ द सेंट” के मुंबई प्रीमियर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महाराष्ट्र की संत परंपरा, वारकरी संस्कृति और भगवान विट्ठल के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को याद करते हुए वारी को राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान बताया।

सोलापुर जिले के मंदिरों के शहर पंढरपुर में हर साल आयोजित होने वाली वारी यात्रा महाराष्ट्र की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक है। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर लाखों वारकरी भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए पैदल यात्रा करते हुए पंढरपुर पहुंचते हैं। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक मानी जाती है।

हर साल ज्येष्ठ और आषाढ़ महीने के दौरान पूरा महाराष्ट्र भगवान विट्ठल की भक्ति में डूब जाता है। संत ज्ञानेश्वर महाराज और संत तुकाराम महाराज की पालकियां जब अपने निर्धारित मार्गों से पंढरपुर की ओर बढ़ती हैं, तो हजारों-लाखों श्रद्धालु उनके साथ जुड़ जाते हैं। इस दौरान भजन, कीर्तन और अभंगों की गूंज पूरे रास्ते में सुनाई देती है।

डॉक्यूमेंट्री फिल्म “पंढरपुर वारी एंड द फुटप्रिंट्स ऑफ द सेंट” में इसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाने का प्रयास किया गया है। फिल्म में वारी की परंपरा, संतों के विचार, वारकरी समुदाय की जीवनशैली और इस यात्रा से जुड़े सामाजिक संदेशों को प्रस्तुत किया गया है।

मुंबई में आयोजित प्रीमियर कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वारी केवल एक यात्रा नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की आत्मा से जुड़ी हुई परंपरा है। उन्होंने कहा कि सदियों से यह यात्रा लोगों को समानता, भक्ति, सेवा और मानवता का संदेश देती आ रही है।

मुख्यमंत्री ने संत परंपरा के योगदान को भी याद किया और कहा कि संतों ने अपने विचारों के माध्यम से समाज को नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि वारी में शामिल होने वाले लोग जाति, वर्ग और आर्थिक भेदभाव से ऊपर उठकर एक साथ चलते हैं, जो समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देता है।

वारी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें शामिल होने वाले श्रद्धालु लंबी दूरी पैदल तय करते हैं। कई वारकरी कई दिनों तक यात्रा करते हुए पंढरपुर पहुंचते हैं। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी और विश्राम की व्यवस्था की जाती है। यह यात्रा सेवा और सहयोग की भावना का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है।

डॉक्यूमेंट्री के निर्माताओं ने बताया कि फिल्म के माध्यम से दुनिया को महाराष्ट्र की इस अनोखी परंपरा से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। उनका उद्देश्य केवल धार्मिक पहलू दिखाना नहीं, बल्कि वारी के पीछे छिपे सामाजिक और मानवीय मूल्यों को भी सामने लाना है।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि आधुनिक समय में जब लोग तेजी से डिजिटल जीवनशैली की ओर बढ़ रहे हैं, ऐसे में वारी जैसी परंपराएं लोगों को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का काम करती हैं। यह यात्रा आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ सामाजिक जुड़ाव का भी माध्यम बनती है।

पंढरपुर वारी की शुरुआत कई सदियों पुरानी मानी जाती है। संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत नामदेव और अन्य संतों की शिक्षाओं ने इस परंपरा को मजबूत बनाया। वारकरी संप्रदाय में भगवान विट्ठल को समर्पित भक्ति, नामस्मरण और सेवा को विशेष महत्व दिया जाता है।

आषाढ़ी एकादशी के मौके पर पंढरपुर में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। प्रशासन भी इस दौरान सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम करता है। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से हर साल वारी को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारियां की जाती हैं।

मुंबई में आयोजित डॉक्यूमेंट्री प्रीमियर ने एक बार फिर महाराष्ट्र की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में ला दिया है। फिल्म के जरिए वारी की परंपरा और संतों के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में हुए इस आयोजन ने पंढरपुर वारी के महत्व को और अधिक रेखांकित किया। वारी आज भी लाखों लोगों के लिए आस्था, अनुशासन, सेवा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनी हुई है। यह यात्रा महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान का ऐसा हिस्सा है, जो हर वर्ष श्रद्धालुओं को भक्ति और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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