महाराष्ट्र

नागपुर में CM देवेंद्र फडणवीस ने खसदार सांस्कृतिक महोत्सव 2025 को संबोधित किया

SHIDDHANT
8 Nov 2025 9:24 PM IST
नागपुर में CM देवेंद्र फडणवीस ने खसदार सांस्कृतिक महोत्सव 2025 को संबोधित किया
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Maharashtra महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को नागपुर में आयोजित खसदार सांस्कृतिक महोत्सव 2025 को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोककला की सराहना की और कहा कि राज्य सरकार हमेशा परंपराओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने महोत्सव में भाग लेने वाले कलाकारों और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल सांस्कृतिक संरक्षण में योगदान देते हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं और ग्रामीण समाज में कला और संस्कृति के प्रति रुचि भी बढ़ाते हैं। फडणवीस ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा विभिन्न जिलों और तहसीलों में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक महोत्सव ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कलाकारों को सम्मानित किया और कहा कि लोक संस्कृति और पारंपरिक कला के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि खसदार सांस्कृतिक महोत्सव जैसे कार्यक्रम समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं। महोत्सव में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, संगीत और रंगमंच प्रस्तुत किए। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आए दर्शकों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार ऐसे आयोजनों को और अधिक बढ़ावा देगी, ताकि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत हो सके।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया कि वे पारंपरिक कला और संस्कृति को सीखें और इसे आधुनिक पीढ़ी तक पहुँचाएं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर हमारे सामाजिक और आर्थिक विकास का भी हिस्सा है। खसदार सांस्कृतिक महोत्सव 2025 में विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के अलावा, कला और शिल्प के स्टॉल भी लगाए गए, जहां स्थानीय कारीगरों ने अपने हस्तशिल्प प्रदर्शित किए। मुख्यमंत्री ने इन कारीगरों की मेहनत की सराहना की और कहा कि राज्य सरकार उन्हें तकनीकी और विपणन सहायता प्रदान करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। यह महोत्सव राज्य की सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं का उत्सव साबित हुआ, जिसमें स्थानीय समुदाय, कलाकार और सरकार ने मिलकर अपनी सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाया।
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