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- अभिजीत दीपके को हिरासत...

मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार को उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को मुंबई पुलिस ने मरीन ड्राइव इलाके से हिरासत में लिया था। यह घटनाक्रम गांधी जयंती पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से ठीक पहले सामने आया है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर रिपोर्ट को गलत बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा।
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि गुरुवार को अभिजीत दीपके मरीन ड्राइव पर समर्थकों और तख्तियों के साथ दिखाई दिए थे। इसके बाद पुलिस की एक टीम, जिसमें एक महिला निरीक्षक भी शामिल थीं, उन्हें पुलिस वाहन में मरीन ड्राइव थाने ले गई। रिपोर्ट में इसे कुछ समय के लिए हिरासत में लेने की कार्रवाई बताया गया था। हालांकि मुंबई पुलिस ने भी औपचारिक रूप से हिरासत में लिए जाने से इनकार किया और कहा कि दीपके को पूछताछ के सिलसिले में थाने ले जाया गया था।
इस बीच CJP ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से इस दावे को खारिज किया। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि दीपके की हिरासत वाली खबर गलत है। यह बयान पार्टी का आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जिसे चुनाव आयोग के बारे में स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अभिजीत दीपके ने भी इस रिपोर्ट के जवाब में कार के अंदर से अपनी एक सेल्फी पोस्ट की। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने संकेत दिया कि वह स्वतंत्र रूप से मुंबई में मौजूद हैं और उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबर सही नहीं है। पार्टी के पदाधिकारियों ने भी दावा किया कि दीपके मुंबई की सड़कों पर घूम रहे थे और उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार या औपचारिक रूप से हिरासत में नहीं लिया था।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि दीपके को कुछ समय के लिए पुलिस स्टेशन ले जाया गया था और बाद में जाने दिया गया। वहीं CJP ने इसे हिरासत बताए जाने का विरोध किया। मुंबई पुलिस की ओर से भी कहा गया कि दीपके को हिरासत में नहीं लिया गया था। इसलिए फिलहाल सबसे स्पष्ट स्थिति यही है कि उन्हें पुलिस स्टेशन ले जाए जाने की खबर सामने आई, लेकिन इस कार्रवाई को औपचारिक हिरासत मानने पर पक्षों के अलग-अलग दावे हैं।
यह पूरा विवाद 2 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP के आंदोलन से जुड़ा हुआ है। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। CJP ने चुनावी मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। ये आरोप CJP के हैं; चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं को निर्धारित संस्थागत और कानूनी व्यवस्था के अनुरूप बताया है।
CJP की योजना मुंबई से विरोध अभियान शुरू करने की रही है। संगठन ने शिवाजी पार्क क्षेत्र में प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया था। हालांकि मुंबई पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस ने इसके पीछे कानून-व्यवस्था, यातायात, आपातकालीन वाहनों की आवाजाही और आयोजन स्थल से संबंधित अनुमति जैसे कारण बताए थे।
इसके बावजूद संगठन ने अपना विरोध कार्यक्रम जारी रखने की बात कही थी। पार्टी ने इसे देशव्यापी अभियान में बदलने की योजना भी घोषित की है। मुंबई के बाद अलग-अलग शहरों में कार्यक्रम और बाद में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की बात कही गई है।
मरीन ड्राइव की घटना के कारण प्रदर्शन से पहले ही राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव बढ़ गया। पुलिस संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है, जबकि CJP अपने कार्यक्रम को अभिव्यक्ति और विरोध के अधिकार से जोड़ रही है। पुलिस की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने के बाद भी संगठन की रणनीति को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
दीपके ने पुलिस स्टेशन ले जाए जाने की रिपोर्ट पर अपनी तरफ से भी अलग विवरण दिया है। उनके अनुसार एक महिला पुलिस अधिकारी ने उन्हें साथ चलने को कहा था और बाद में पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद उन्हें जाने दिया गया। दीपके ने दावा किया कि इस कार्रवाई से उनका समय खराब हुआ। पुलिस ने इसे हिरासत की कार्रवाई नहीं माना।
घटना को लेकर सबसे अहम बात यह है कि किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दीपके पुलिस के संपर्क में आए और थाने तक ले जाए गए, लेकिन CJP और मुंबई पुलिस दोनों ने औपचारिक हिरासत की भाषा से इनकार किया है। दूसरी ओर कुछ समाचार रिपोर्टों ने इसे संक्षिप्त हिरासत बताया।
फिलहाल CJP का ध्यान अपने 2 अक्टूबर के विरोध कार्यक्रम पर है। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर अभियान चला रही है। वहीं पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बिना अनुमति वाले प्रदर्शन को नियंत्रित करने की तैयारी में है।
अभिजीत दीपके की कथित हिरासत को लेकर सामने आई अलग-अलग सूचनाओं के बीच यह मामला अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। CJP ने रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जबकि दीपके ने कार से सेल्फी पोस्ट कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। अब नजर इस बात पर है कि गांधी जयंती पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन किस रूप में आगे बढ़ता है और पुलिस उसकी अनुमति तथा कानून-व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाती है।





