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मुंबई : सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री खिलाई जा रही है।
अभिजीत दिपके ने अपने पोस्ट में दावा किया कि उन्होंने एक स्कूल की रसोई का निरीक्षण किया, जहां खाने की कुछ चीजें एक्सपायर हो चुकी मिलीं। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी स्कूलों में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर शेयर किया वीडियो
अभिजीत दिपके ने अपने X (पहले ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में वह एक स्कूल की रसोई में जांच करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
Expired food items are being used to feed children in Govt Schools. Would those sitting in power feed the same food to their own children?
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) August 29, 2026
And if exposing this means FIRs against us, then please do. We won’t stop exposing the truth.#SchoolThikKaro pic.twitter.com/EvxIDEH4DT
वीडियो में उन्होंने कुछ खाद्य सामग्री दिखाई और दावा किया कि ये सामान उपयोग की अवधि पूरी होने के बाद भी रखा गया था।
उन्होंने वीडियो के माध्यम से सरकार और प्रशासन से सवाल किया कि क्या जिम्मेदार लोग अपने बच्चों को भी ऐसा ही भोजन खिलाना पसंद करेंगे।
सरकार से पूछे सवाल
अपने पोस्ट में अभिजीत दिपके ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को खराब या एक्सपायर खाद्य सामग्री दी जा रही है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
FIR की बात पर भी दी प्रतिक्रिया
अभिजीत दिपके ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि अगर इस मुद्दे को सामने लाने के कारण उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाती है तो भी वह पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने लाने का काम जारी रहेगा और बच्चों के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाया जाता रहेगा।
स्कूल भोजन व्यवस्था पर उठे सवाल
सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाला भोजन कई राज्यों में मध्याह्न भोजन या अन्य योजनाओं के तहत उपलब्ध कराया जाता है।
इन योजनाओं का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना है।
ऐसे में यदि खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती हैं तो यह गंभीर विषय माना जाता है।
जांच की जरूरत
हालांकि, अभिजीत दिपके द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो किस स्कूल का है और खाद्य सामग्री वास्तव में एक्सपायर थी या नहीं।
ऐसे मामलों में संबंधित विभाग द्वारा जांच के बाद ही स्थिति साफ हो सकती है।
प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ी
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो तथ्यों को स्पष्ट करना भी जरूरी होगा।
स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की नियमित जांच और गुणवत्ता नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है।
बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता
बच्चों की सेहत को देखते हुए भोजन की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। खराब या एक्सपायर खाद्य सामग्री का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
अभिभावक भी चाहते हैं कि स्कूलों में मिलने वाले भोजन की नियमित निगरानी हो और किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए।
मामले पर नजर
फिलहाल अभिजीत दिपके के वीडियो के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या कोई जांच शुरू की जाती है।
सरकारी स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर उठे इस मुद्दे ने एक बार फिर निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करने की जरूरत को सामने ला दिया है।





