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CIDCO का बड़ा अभियान: पावने इंडस्ट्रियल एरिया की पहाड़ी से मलबा हटाया जा रहा

Maharashtra महाराष्ट्र: सीआईडीसीओ (CIDCO) ने पावने इंडस्ट्रियल एरिया से सटी एक पहाड़ी पर जमा भारी मात्रा में गाद और कंस्ट्रक्शन मलबे को हटाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। यह कदम संभावित भूस्खलन के खतरे को देखते हुए उठाया गया है, जिससे आसपास स्थित औद्योगिक इकाइयों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था।
यह कार्रवाई गुरुवार को शुरू की गई, जिसमें जेसीबी एक्सकेवेटर और डंपरों की मदद से पहाड़ी पर जमा मलबे को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारी बारिश के दौरान मिट्टी और मलबे के खिसकने की आशंका को कम करना और क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संबंधित पहाड़ी का लंबे समय से अवैध तरीके से कचरा और निर्माण कार्य से निकले मलबे को डंप करने के लिए उपयोग किया जा रहा था। वर्षों से जमा हो रहे इस मलबे के कारण पहाड़ी की संरचना कमजोर हो गई थी और यह अस्थिर स्थिति में पहुंच गई थी।
हाल ही में हुई हल्की बारिश के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जब पहाड़ी पर जमा गाद का एक हिस्सा अचानक नीचे खिसक गया। इसके चलते पहाड़ी का कुछ हिस्सा ढह गया, जिससे आसपास मौजूद उद्योगपतियों और श्रमिकों के बीच दहशत फैल गई। इस घटना ने प्रशासन को तुरंत कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया।
स्थानीय लोगों और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने पहले भी इस अवैध डंपिंग को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन पर्याप्त कार्रवाई न होने के कारण स्थिति लगातार गंभीर होती गई। अब मॉनसून सीजन को देखते हुए भूस्खलन का खतरा और बढ़ गया है, जिसे देखते हुए CIDCO ने यह विशेष सफाई अभियान शुरू किया है।
अधिकारियों ने बताया कि मलबा हटाने के साथ-साथ क्षेत्र की निगरानी भी की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी अवैध गतिविधियों को रोका जा सके। इसके लिए संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस इलाके में डंपिंग पर सख्त नियंत्रण रखें।
CIDCO का कहना है कि यह अभियान केवल तात्कालिक खतरे को कम करने के लिए नहीं है, बल्कि लंबे समय के लिए क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। पहाड़ी को स्थिर करने और आसपास के औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद उम्मीद है कि पावने इंडस्ट्रियल एरिया में भूस्खलन का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।





